BusinessViral

RBI के फैसले और मजबूत GDP आंकड़ों से क्या बाजार में आएगी बहार? ऐसे बदल सकता है पूरा गेम

RBI के फैसले और मजबूत GDP आंकड़ों से क्या बाजार में आएगी बहार? ऐसे बदल सकता है पूरा गेम

भारतीय शेयर बाजार के लिहाज से शुक्रवार का दिन शानदार रहा. एक ओर सुबह आरबीआई (RBI) की ओर से विदेशी निवेश बढ़ाने और विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) की उपलब्धता मजबूत करने के लिए कई ऐलान किए गए, दूसरी ओर शाम को GDP ग्रोथ रेट को लेकर उम्मीद से बेहतर आंकड़े सामने आए. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन दोनों संकेतों से क्या आने वाले दिनों में में बहार लौटकर आएगी?

RBI के फैसले और मजबूत GDP आंकड़ों से क्या बाजार में आएगी बहार? ऐसे बदल सकता है पूरा गेम
RBI के फैसले और मजबूत GDP आंकड़ों से क्या बाजार में आएगी बहार? ऐसे बदल सकता है पूरा गेम

आइए पहले जानते हैं RBI ने क्या फैसले लिए और GDP के आंकड़े कैसे रहे?

1. (RBI) ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है और मॉनेटरी पॉलिसी का रुख न्यूट्रल रखा है. इस बार RBI का फोकस विदेशी निवेश बढ़ाने पर रहा. इसके तहत केंद्रीय बैंक ने विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों के लिए 7 बड़े ऐलान किए हैं.

  • सरकारी सिक्योरिटीज में FII निवेश पर 1 अप्रैल 2026 से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स खत्म किया जाएगा.
  • 15, 30 और 40 साल की नई सरकारी सिक्योरिटीज को Fully Accessible Route (FAR) में शामिल किया गया, जिससे विदेशी निवेशकों की पहुंच बढ़ेगी.
  • जनरल रूट के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर लगी कंसंट्रेशन लिमिट हटा दी गई.
  • NRIs और OCIs को बिना SEBI रजिस्ट्रेशन के लिस्टेड शेयरों में ज्यादा निवेश की अनुमति दी गई.
  • PSU के ECB कर्ज के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई.
  • FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने पर बैंकों को मिलने वाला हेजिंग कॉस्ट सपोर्ट भी 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा.
  • एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को भारत लाने की समय-सीमा 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दी गई है.

इन कदमों का उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना, डॉलर का प्रवाह बढ़ाना और भारतीय वित्तीय बाजारों को मजबूत बनाना है.

2. के मजबूत आंकड़े

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत बढ़त दर्ज की है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की GDP वृद्धि दर बढ़कर 7.7% हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1% थी. यह आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देते हैं.

Khabar Monkey

क्या हुआ असर?

1. शेयर बाजार

5 जून को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद भारतीय शेयर बाजार मामूली कमजोरी के साथ बंद हुए. निवेशकों की नजर RBI की मौद्रिक नीति और उसके फैसलों पर रही, जिसके बाद बाजार में सीमित प्रतिक्रिया देखने को मिली. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16% फिसलकर 74,243.34 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21% की गिरावट के साथ 23,366.70 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में कुल 1,966 शेयरों में तेजी रही, 2,049 शेयरों में गिरावट दर्ज हुई, जबकि 197 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए.

2. मजबूत हुआ रुपया

भारतीय रुपये ने शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले शानदार मजबूती दिखाई. RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद रुपया 56 पैसे चढ़कर 95.18 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. विदेशी निवेश को आकर्षित करने और विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए उपायों से निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के ये कदम आने वाले दिनों में रुपये को और सहारा दे सकते हैं और विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं.

क्या होगा महंगाई का असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनेटरी पॉलिसी का नतीजा उम्मीद के मुताबिक रहा. RBI गवर्नर की ओर से घोषित सपोर्टिव उपायों से रुपये को मजबूती मिली. हालांकि, ग्रोथ के अनुमानों में कटौती और महंगाई को लेकर संतुलित नजरिए के कारण निवेशकों ने मुनाफा वसूली की. लेकिन करेंसी में आई तेजी से नियर टर्म में बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो सकता है, लेकिन महंगाई का दबाव और बॉन्ड यील्ड में मजबूती विदेशी और घरेलू दोनों निवेश पर असर डाल सकता है. इसकी वजह ये है कि आगे इस गति को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती हैं.

आगे कैसा रहेगा बाजार?

मार्केट एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि फिलहाल बेहतर GDP आंकड़े और RBI का विकास समर्थक रुख भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना रहे हैं. अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और वैश्विक परिस्थितियां ज्यादा नहीं बिगड़तीं, तो आने वाले महीनों में शेयर बाजार, निवेश और कारोबारी गतिविधियों में नई तेजी देखने को मिल सकती है. आसान शब्दों में कहें तो अर्थव्यवस्था से मिले इन दो बड़े संकेतों ने बाजार में उम्मीदों की नई बहार ला दी है और आने वाले समय में यही भारतीय बाजार का गेम चेंजर साबित हो सकता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply