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Dharam

​​मक्का के मीना मैदान में शैतान को मिली सजा, जानिए कुर्बानी की पूरी कहानी

यह पवित्र त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, आज्ञाकारिता और कुर्बानी की मिसाल है. इसका सबसे गहरा संबंध सऊदी अरब के मक्का स्थित मीना नामक ऐतिहासिक मैदान से है, जहां हजरत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह की राह में सबसे बड़ी परीक्षा दी थी. मीना का मैदान आज भी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए खास […]

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यह पवित्र त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, आज्ञाकारिता और कुर्बानी की मिसाल है. इसका सबसे गहरा संबंध सऊदी अरब के मक्का स्थित मीना नामक ऐतिहासिक मैदान से है, जहां हजरत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह की राह में सबसे बड़ी परीक्षा दी थी.

मीना का मैदान आज भी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए खास है. हज के दौरान लाखों लोग यहां तंबुओं में रहते हैं, इसलिए इसे तंबुओं का शहर भी कहा जाता है.

हजरत इब्राहिम का इम्तिहान

बकरीद की कहानी हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था से शुरू होती है. अल्लाह ने उनके विश्वास की परीक्षा लेने के लिए उनसे अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी मांगी. हजरत इब्राहिम बिना किसी हिचकिचाहट के तैयार हो गए. वे अपने बेटे को लेकर मीना के मैदान की ओर चले. रास्ते में शैतान (इब्लीस) तीन बार उनके सामने आया. उसने भावनाओं का सहारा लेकर उन्हें बहकाने की कोशिश की.

शैतान ने कहा- ‘अपने बूढ़े होने पर इकलौते बेटे को कैसे कुर्बान कर सकते हो?’ लेकिन हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश पर पूरी तरह भरोसा रखा. उन्होंने हर बार जमीन से कंकड़ उठाकर शैतान पर मारे और उसे भगा दिया.

शैतान को सजा और कुर्बानी का चमत्कार

जब हजरत इब्राहिम ने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाने की तैयारी की, तो अल्लाह ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर हजरत इस्माइल की जगह एक भेड़ भेज दी. इस तरह बेटा बच गया और कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई. आज भी हज यात्रा के दौरान मुसलमान जमरात नामक तीन जगहों पर पत्थर फेंकते हैं. यह कार्य शैतान को सजा देने और बुराई को दूर भगाने का प्रतीक है. मीना का मैदान इसी वजह से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है.

बकरीद का संदेश

बकरीद हमें सिखाती है कि सच्ची कुर्बानी अपनी इच्छाओं, लगाव और सुख-सुविधाओं को अल्लाह की राह में त्यागने की है. इस दिन मुसलमान बकरे, भेड़ या अन्य हलाल जानवर की कुर्बानी देते हैं और गरीबों में हिस्सा बांटते हैं. 2026 में बकरीद 28 मई को मनाई जाएगी. इस मौके पर लोग न सिर्फ नमाज अदा करते हैं बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और दान का संदेश भी फैलाते हैं.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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