Property Rights After Religion Change: भारतीय कानून के तहत केवल धर्म बदलने मात्र से किसी संतान का पिता की संपत्ति से कानूनी हक समाप्त नहीं होता है।

अदालतों के फैसलों के अनुसार, धर्म बदलना व्यक्तिगत पसंद का विषय है और इससे खून के रिश्ते या कानूनी वारिस का संबंध खत्म नहीं होता। आइए जानते हैं भारतीय कानूक के मुताबकि अगर पिता के वसीयत बनाए बगैर मृत्यु हो गई तो धर्म बदलने पर उनकी संपत्ति पर संतान का हक होगा या नहीं?
पैतृक संपत्ति पर हक
यदि संपत्ति पैतृक है यानी दादा या परदादा के समय से चली आ रही है , तो अदालतों में फैसले के अनुसार, केवल धर्म परिवर्तन करने से जन्मजात रिश्ते या अधिकार खत्म नहीं हो सकते हैं।
भारतीय न्याय व्यवस्था के तहत 1850 के Caste Disabilities Removal Act और विभिन्न फैसलों में यह माना गया है कि केवल धर्म बदलने से संपत्ति का अधिकार नहीं छीना जा सकता है।
वसीयत न होने पर किसका होगा हक
यदि पिता की अचानक मृत्यु हो जाती है और वो अपनी वसीयत बनाकर नहीं गए हैं, तो ऐसे में उनके जितने भी बच्चें होंगे उन्हें उस संपत्ति का बराबरबराबर हिस्सा दिया जाएगा। चाहे उनमें से किसी संतान ने अपना धर्म क्यों न बदल लिया हो। कानूनी वारिसों के साथ उसका भी संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलता है।
पिता की स्वंय की कमाई की संपत्ति
यदि पिता की खुद की कमाई संपत्ति है, तब अगर पिता चाहे तो किसी भी संतान को अपनी जायदाद से बेदखल कर सकते हैं। क्योंकि पिता की कमाई पर उनका स्वंय का पूरा अधिकार होता है कि वे जिसे चाहें उसे अपनी वसीयत लिखकर संपत्ति दें। इससे फर्क नहीं पड़ता कि संतान ने धर्म बदला हो या न हो।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 की धारा 26 कहती है कि यदि कोई हिंदू व्यक्ति किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण कर लेता है, तो धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को तो संपत्ति में अधिकार मिल सकता है, लेकिन धर्मांतरण के बाद पैदा हुई उसकी संतानें अपने हिंदू रिश्तेदारों की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं बन सकती हैं।