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Plastic Currency: प्लास्टिक करंसी चलाने वाले देशों में भारत के 500 रुपए कितने हो जाते हैं? अब भारत में भी तैयारी

Plastic Currency: प्लास्टिक करंसी चलाने वाले देशों में भारत के 500 रुपए कितने हो जाते हैं? अब भारत में भी तैयारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में प्लास्टिक के नोट को चलाने पर विचार कर रहा है. इसकी वजह देश में करंसी की लगातार बढ़ती मांग है. कागज के मुकाबले इनके ज्यादा समय तक टिकने और इनकी लागत कम आने के कारण इन्हें देश में जारी किया जा सकता है. इसको लेकर बोर्ड की बैठकों में चर्चा की गई है. आम जनता के लिए इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा कसता है. दुनियाभर में दर्जनों देश पहले से ही प्लास्टिक करंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा और नीदरलैंड समेत कई देश हैं जहां प्लास्टिक की करंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

Plastic Currency: प्लास्टिक करंसी चलाने वाले देशों में भारत के 500 रुपए कितने हो जाते हैं? अब भारत में भी तैयारी
Plastic Currency: प्लास्टिक करंसी चलाने वाले देशों में भारत के 500 रुपए कितने हो जाते हैं? अब भारत में भी तैयारी

जिन देशों में प्लास्टिक की करंसी का चलन है वहां आमतौर पर इसकी एक्सपायरी 15 साल है. यानी कागज के नोटों के मुकाबले प्लास्टिक की करंसी कई गुना ज्यादा टिकती है. आइए इसी बहाने जान लेते हैं कि जिन देशों में प्लास्टिक के नोटों का चलन है वहां भारत के 500 रुपए कितने हो जाते हैं.

प्लास्टिक नोटों के चलने वाले देश में भारतीय करंसी की वैल्यू

1- ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलियन डॉलर यहां की आधिकारिक करंसी है. इसे आमतौर पर A$ या AU$ लिखते हैं. भारतीय करंसी की वहां से तुलना करें तो भारतीय 500 रुपए ऑस्ट्रेलिया जाकर 7.34 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रहे जाते हैं. आंकड़ा दोनों देशों की करंसी के अंतर को दिखाता है. ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने प्लास्टिक करंसी को जारी किया था. इसकी शुरुआत 1988 में हुई थी.

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2- कनाडा: यहां की आधिकारिक मुद्रा कनाडाई डॉलर है. इसे Can$ या C$ सिम्बल से दिखाते हैं. भारत के 100 रुपए कनाडा जाकर मात्र 7.25 कनाडाई डॉलर रह जाते हैं. इसे कंट्रोल करने और जारी करने का काम बैंक ऑफ कनाडा करता है. यहां के बैंक नोट्स को पूरी तरह से पॉलिमर में बदल दिया गया है.

कनाडाई डॉलर. फोटो: Pixabay

ब्रिटेन: ब्रिटेन ने काफी समय पहले ही अपने पारंपरिक कागजी नोटों को पॉलिमर के 5, 10, 20 और 50 पाउंड के नोटों के पूरे सेट से बदल दिया था. यहां की करंसी का आधिकारिक नाम पाउंड स्टर्लिंग है. आमतौर पर इसे ब्रिटिश पाउंड कहते हैं. पाउंड स्टर्लिंग को £ से दर्शाया जाता है और इसका करंसी कोड GBP (ग्रेट ब्रिटिश पाउंड) है. इसकी तुलना करें तो भारत के 500 रुपए ब्रिटेन में 3.92 पाउंड स्टर्लिंग हो जाते हैं.

ब्रिटेन की करंसी का आधिकारिक नाम पाउंड स्टर्लिंग है. फोटो: Pixabay

न्यूजीलैंड: यहां पूरी तरह से पॉलिमर यानी प्लास्टिक करंसी चलन में है. न्यूजीलैंड डॉलर यहां की आधिकारिक करंसी है. इसे NZD करंसी कोड से दिखाते हैं. भारत से तुलना करें तो भारतीय 500 रुपए न्यूजीलैंड में पहुंचकर 8.82 न्यूजीलैंड डॉलर हो जाते हैं. यहां करंसी को कंट्रोल करने और गाइडलाइन जारी करने का काम रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड Te Pūtea Matua करता है.

न्यूजीलैंड की करंसी का कोड NZD है. फोटो: Pixabay

ब्रुनेई: ब्रुनेई में नेशनल करंसी के रूप में केवल पॉलिमर (प्लास्टिक) के नोटों का इस्तेमाल होता है. यहां की आधिकारिक करंसी का काम ब्रुनेई डॉलर है.यहां साल 2004 में पहली बार इस तरह के नोटों का चलन शुरू हुआ. वर्तमान में 1, 5, 10, 100 और 500 के नोटों सहित सभी प्रचलित नोटों को प्लास्टिक करंसी में बदल लिया है. भारत के 500 रुपए ब्रुनेई में जाकर महज 6.71 ब्रुनेई डॉलर रह जाते हैं.

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