India China Trade: भारतचीन के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के बाद अब दोनों देश कारोबारी मोर्चे पर अपने रिश्ते सुधारने की दिशा में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं. चीन ने सोमवार को साफ कर दिया है कि वो भारत के साथ अपनी व्यापारिक आर्थिक चिंताओं को संतुलित तरीके से सुलझाने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीनी दूतावास का ये बयान दोनों देशों के बीच बेहतर आर्थिक सहयोग की नई उम्मीद जगाता है. इस कदम का सीधा फायदा दोनों देशों के कारोबारियों के साथसाथ आम जनता को भी मिलेगा.

पीयूष गोयल से चीनी मंत्री की चर्चा
चीन की तरफ से ये सकारात्मक बयान तब आया है जब भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने चीनी समकक्ष से अहम मुलाकात की. रविवार को पीयूष गोयल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि उन्होंने चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेनताओ के साथ एक खास बैठक की है. इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारतचीन व्यापारिक संबंधों को लेकर विस्तार से बातचीत की. इसी बातचीत के ठीक एक दिन बाद भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता यू जिंग का बयान सामने आया. उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति को धरातल पर लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.
Met with Mr. Wang Wentao, Minister of Commerce of the Peoples Republic of China, and discussed IndiaChina trade and economic ties. pic.twitter.com/kjzXs31XcZ
— Piyush Goyal September 12, 2026
पीएम मोदीशी चिनफिंग की मुलाकात का नतीजा
व्यापारिक रिश्तों में आई इस नई गर्माहट को हाल ही में हुई ब्रिक्स समिट से जोड़कर देखा जा रहा है. 2 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की थी. उस वक्त शी चिनफिंग ने कहा था कि भारतचीन को एकदूसरे को खतरे या प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझीदार के तौर पर देखना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक तार्किक सोच की जरूरत है. चीनी प्रवक्ता यू जिंग ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि भारत चीन का एक बेहद अहम पड़ोसी है. आर्थिक क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों की कंपनियों को सीधा लाभ होगा.
व्यापार घाटा कम करना सबसे बड़ी चुनौती
भले ही चीन अभी रिश्ते सुधारने की बात कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन एक बहुत बड़ा मुद्दा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 202627 के अप्रैल से जुलाई के बीच भारत ने चीन को करीब 7.8 अरब डॉलर का निर्यात किया. वहीं, इसी दौरान चीन से 52.7 अरब डॉलर का आयात किया गया. इससे पहले वित्त वर्ष 202526 में भारत ने चीन से 131.6 अरब डॉलर का भारी भरकम सामान खरीदा था, जबकि भारत का कुल निर्यात सिर्फ 19.5 अरब डॉलर तक ही सीमित रहा.
इस भारी अंतर की वजह से भारत को 112 अरब डॉलर से ज्यादा के व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा. अब भारत की कोशिश यही रहेगी कि चीन के बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच आसान हो. देखना ये होगा कि चीन के इस नए रुख से इस भारी घाटे को कम करने में भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी मदद मिलती है. अगर चीन अपनी कथनी को करनी में बदलता है, तो आईटी, फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों से जुड़ी भारतीय कंपनियों को वहां काम करने के नए अवसर मिल सकते हैं.