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Hyperactive Kids: कहीं आपका बच्चा हाइपरएक्टिव तो नहीं? इन संकेतों से पहचानें

हर समय बच्चा दूसरों की तुलना में ज्यादा एक्टिव या इंपलसिव है तो इसे हल्के में लेने की भूल नहीं करनी चाहिए. कुछ मामलों में ये कंडीशन हाइपरएक्टिव किड की हो सकती है. इस तरह के बच्चे हर समय कुछ न कुछ करते रहते हैं. उनके लिए देर तक एक जगह बैठना मुश्किल होता है. कई बार उसका ये व्यवहार नॉर्मल शरारत से अलग लगने लगता है. अब इसे आप बच्चे के बीमार होने की कंडीशन न मानें. हाइपरएक्टिव को मेडिकली Attention Deficit Hyperactivity Disorder पुकारा जाता है. इसे नॉर्मल भाषा में ADHD कहा जाता है.

Hyperactive Kids: कहीं आपका बच्चा हाइपरएक्टिव तो नहीं? इन संकेतों से पहचानें
Hyperactive Kids: कहीं आपका बच्चा हाइपरएक्टिव तो नहीं? इन संकेतों से पहचानें

बच्चा अगर ज्यादा एक्टिव है तो आपको ये समझना जरूरी है कि आखिर ये हाइपरएक्टिव होता क्या है. ऐसा होने पर बच्चा बैठे-बैठे भी अपने पैर हिलाता रहता है. चलिए आपको बताते हैं कि ये सिचुएशन क्या होती है और इसके संकेत क्या हैं?

हाइपरएक्टिव बच्चे की पहचान

एक जगह न बैठ पाना- इस कंडीशन में एक बच्चा बार-बार उठता है या दोड़ता रहता है. इसके अलावा वो कूदने जैसी सिचुएशन भी बनाता रहता है. आप ऐसी भी नोटिस कर सकते हैं कि बच्चा बैठ-बैठ भी अपने हाथों या पैरों को लगातार हिलाता रहता है.

हद से ज्यादा बोलना- हाइपरएक्टिव की प्रॉब्लम ज्यादातर मामलों में एक से चार साल के बच्चों में देखी जाती है. इस टाइप से बच्चे जरूरत से ज्यादा बोलते हैं. अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है तो वो दूसरों की बातों को बीच में काटने की कोशिश करता है. इसके अलावा वो हर सवाल के पूरे होने से पहले ही जवाब दे देता है.

ध्यान नहीं लगा पाना- एक्सपर्ट बताते हैं कि हाइपरएक्टिव बच्चे को ध्यान लगाने में भी दिक्कत होती है. पढ़ाई या किसी काम पर फोकस न कर पाना, जल्दी बोर हो जाना, चीजें भूल जाना और खिलौने, किताबें या सामान बार-बार खो देना, ये संकेत दर्शाते हैं कि बच्चा हाइपरएक्टिव है.

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impulsive नेचर- ये भी कहा जाता है कि इस टाइप के बच्चों का नेचर थोड़ा Impulsive होता है. ये लाइन में इंतजार नहीं कर पाते हैं और इन्हें गुस्सा भी जल्दी आता है. ऐसे बच्चे हमेशा चिल्लाकर बात करते हैं और उनके मतलब की बात न हो फिर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हैं.

नींद या रूटीन की प्रॉब्लम- आज के पेरेंट्स का तरीका हद से ज्यादा मॉडर्न है. ऐसे पेरेंट्स अपने बच्चे को हर समय फोन देते हैं और उन्हें रात में जल्दी सोने की नहीं कहते. बच्चे के हाइपरएक्टिव होने में फोन का भी बड़ा रोल है. ऐसा बच्चा न जल्दी सोता है और रात में बार-बार उठ भी जाता है. उसे दिनभर थकान हो जाए फिर वो शांत नहीं रह पाता है.

हाइपरएक्टिविटी के कारण

एक्सपर्ट बताते हैं कि ये प्रॉब्लम जेनेटिक हो सकती है. लेकिन कुछ बच्चों में ब्रेन डेवलपमेंट और neurotransmitters के काम करने का तरीका अलग हो सकता है. वैसे ज्यादा स्क्रीन टाइम की वजह से भी बच्चों में ये समस्या बढ़ सकती है. पेरेंट्स को ये ध्यान रखना चाहिए कि उनके बच्चे की नींद पूरी हो. क्योंकि पूरी नींद न मिलने की वजह से बच्चा चिड़चिड़ा या ज्यादा हाइपर हो सकता है.

घर पर क्या करें?

सबसे पहले बच्चे का एक बेहतर रूटीन बनाएं. इसके लिए उसके सोने, खाने और पढ़ने का समय तय रखें. सबसे जरूरी है कि उससे स्क्रीन टाइम पर लिमिट तय करें. ज्यादा मोबाइल और टीवी को देखने न दें और उसकी फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाएं. उसे बाहर खेलने भेजें, साइकलिंग कराएं, सैर या दौड़ने की आदत डालें. फिजिकल एक्टिविटी के लिए गर्मी की छुट्टियों में बच्चे को स्विमिंग की क्लासेस ज्वाइन कराई जा सकती है.

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