हिंदू धर्म में देवीदेवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सच्चे मन से पूजा करने से जातक को अपने जीवन में बड़े पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलते हैं। हालांकि अंजाने में कई लोग पूजा के दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिस कारण उनको पूजा का पूरा फल नहीं प्राप्त होता है। तो वहीं कई लोग खड़े होकर पूजा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खड़े होकर पूजाआराधना करना सही है या गलत। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

जानिए खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक रोजाना विधिविधान से पूरा करने से जातक का मन शांत और एकाग्र होता है। शास्त्रों के हिसाब से हमेशा आसन पर बैठकर ही पूजा करनी चाहिए। माना जाता है ति खड़े होकर पूजा करने से मन और शरीर में अस्थिरता बनी रहती है। इस कारण प्रभु की आराधना में मन नहीं लगता है और मन भटकता रहता है। इसलिए कहा जाता है कि हमेशा बैठकर ही प्रभु की आराधना करनी चाहिए। दरअसल, खड़े होकर पूजा करने से शरीर में उत्पन्न होने वाली पॉजिटिव एनर्जी सीधे पृथ्वी में समा जाती है, जिस कारण जातक को पूजा का पूरा फल नहीं प्राप्त होता है।
वहीं किसी भी देवीदेवता की आरती हमेशा अपने स्थान पर खड़े होकर करनी चाहिए। बैठकर आरती करने से बचना चाहिए। साथ ही पूजा के अंत में भगवान की मूर्ति की परिक्रमा जरूर करें और सच्च मन से पूजा और प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसा करने से जातक को पूजा का पूरा फल मिलता है।
जानिए पूजा के जरूरी नियम
पूजा करते समय ध्यान रखें कि इस दौरान आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं को पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
हमेशा आसन पर बैठकर पूजा करना चाहिए। क्योंकि बिना आसन के पूरा करना शुभ नहीं माना जाता है। वहीं पूजा के अंत में आसन के नीचे जमीन को प्रणाम करना न भूलें।
पूजा और आरती के दौरान हमेशा सिर ढकना चाहिए। इसको प्रभु के प्रति सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दौरान इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि शिवलिंग, शालिग्राम, जनेऊ, शंख और देवीदेवताओं की मूर्तियों को सीधे तौर पर जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इससे देवीदेवताओं के अपमान के रूप में देखा जाता है। इसलिए इन चीजों को किसी साफ आसन, कपड़े या फिर पात्र में रखना चाहिए।