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Food Safety: हर घर से जुड़ी WHO की चौंकाने वाली ये रिपोर्ट, खराब खाने से हर साल 86 करोड़ लोग बीमार और 15 लाख मौतें

Food Safety: हर घर से जुड़ी WHO की चौंकाने वाली ये रिपोर्ट, खराब खाने से हर साल 86 करोड़ लोग बीमार और 15 लाख मौतें

कई बार हम खराब और अनहाइजेनिक खाना खा लेते हैं. लेकिन यह हमारी सेहत के लिए खासा नुकसानदेह साबित हो सकता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की ओर से आज गुरुवार को जारी नए अनुमानों के मुताबिक खराब खाने की वजह से हर 86 करोड़ लोग बीमार पड़ जाते हैं और इनमें से हालत बिगड़ने पर 15 लाख से अधिक मौत की मुंह में चले जाते हैं. छोटे बच्चों को लेकर ये आंकड़े सचेत करते हुए बताते हैं, 5 साल से कम उम्र के बच्चों को बड़े बच्चों और बड़े लोगों के मुकाबले खराब खाने से बीमार होने का खतरा करीब तीन गुना अधिक होता है.

Food Safety: हर घर से जुड़ी WHO की चौंकाने वाली ये रिपोर्ट, खराब खाने से हर साल 86 करोड़ लोग बीमार और 15 लाख मौतें
Food Safety: हर घर से जुड़ी WHO की चौंकाने वाली ये रिपोर्ट, खराब खाने से हर साल 86 करोड़ लोग बीमार और 15 लाख मौतें

दुनिया की आबादी का महज 9 फीसदी होने के बाद भी छोटे बच्चे खाने से होने वाली बीमारियों के करीब एक तिहाई मामलों से परेशान रहते हैं, खासकर डायरिया से जुड़ी बीमारियां जो इस कम उम्र के ग्रुप के लिए बहुत ही जानलेवा साबित हो सकती हैं. साथ ही, खाने में मिथाइल मरकरी (Methylmercury) और लेड जैसे केमिकल के संपर्क में आने से उनके दिमाग को नुकसान भी पहुंचा सकता है और बच्चों में जिंदगी भर न्यूरोलॉजिकल और डेवलपमेंट से जुड़ी समस्याएं बनी रह सकती है.

बीमारी को फैलने से रोकने के उपाय

इस वैश्विक ऑर्गनाइजेशन का अनुमान है कि खराब खाने से हर साल करीब 86 करोड़ (866 Million) से अधिक लोग बीमार हो जाते हैं जबकि 15 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है. जबकि इन मौतों में से कई को स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और हाइजीन, पाश्चराइज्ड किए फ़ूड सेफ्टी के तरीकों को अपनाने और गरीब लोगों को हेल्थ केयर सेंटर तक पहुंचने जैसे कई उपायों के जरिए रोका जा सकता है.

हालांकि साल 2000 के बाद से खाने से होने वाली बीमारियों और समस्याओं का कुल बोझ कम हुआ है, फिर भी इसमें क्षेत्रीय असंतुलन की स्थिति बनी हुई है, जिनमें सबसे अधिक बोझ अफ़्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में बना हुआ है.

केमिकल खतरों से ज्यादा नुकसान

खाने में बैक्टीरिया और वायरस के साथ-साथ पैरासाइटिक इन्फेक्शन समेत बायोलॉजिकल खतरों के संपर्क में आने से ज्यादातर खाने से होने वाली बीमारियां हुईं (2021 में करीब 86 करोड़), जबकि केमिकल के संपर्क में आने से अधिक मौतें हुईं. साल 2021 में, दूषित खाने से होने वाली मौतों में केमिकल खतरों की वजह से करीब 73% मौतें हुईं. इनमें से अधिकतर केमिकल से जुड़ी मौतें इनऑर्गेनिक आर्सेनिक (42%) और लेड (31%) से जुड़ी हुई थीं, क्योंकि इनसे दिल की बीमारी और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

सेहत पर पड़ने वाले असर के अलावा, अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है कि 2021 में खाने से होने वाली बीमारियों की वजह से प्रोडक्टिविटी में करीब 310 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2,96,88,00,25,00,000 रुपये) का नुकसान हुआ (बीमारी की वजह से काम से दूर रहना). जब देशों के बीच रहने-सहने के खर्च में अंतर के लिए आर्थिक असर को एडजस्ट किया गया, तो प्रोडक्टिविटी में नुकसान का अनुमान बढ़कर 647 बिलियन अमेरिकी डॉलर (6,19,55,26,42,50,000 रुपये) हो गया.

सेहत की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेः घेब्रेयेसस

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा, “खाद्य सुरक्षा कोई छोटा मुद्दा नहीं है. यह हर खाने, हर परिवार, हर दिन से जुड़ा हुआ है. असुरक्षित और खराब खाना हमेशा से एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता रही है, लेकिन अब तक हमें इसके हैरान करने वाले इंसानी और आर्थिक नुकसान की बड़ी तस्वीर नहीं पता थी. लेकिन नए अनुमान ने इसे काफी हद तक बदल दिया है.” वो आगे कहते हैं, “पहली बार, देशों के पास अपने-अपने आंकड़े हैं जिससे यह पता चलता है कि समस्या सबसे ज्यादा कहां पर है. इस जानकारी के साथ, सरकारें अपने-अपने यहां लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए जरूरी कामों को प्राथमिकता दे सकती हैं.”

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WHO के नए आंकड़ों ने 2000 से 2021 तक 194 देशों से बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट और केमिकल सहित 42 बड़े फ़ूडबोर्न खतरों का आकलन करके सबूतों के आधार में काफी हद इजाफा किया है. अनुमानों में अब मेटल, रोटावायरस और ट्रिपैनोसोमा क्रूज़ी (चागास बीमारी पैदा करने वाला पैरासाइट) सहित नए खतरे शामिल हो गए हैं.

खाने की चीजें कुदरती सोर्स और इंसानी गतिविधियों की वजह से इनऑर्गेनिक आर्सेनिक, लेड और मिथाइलमरकरी जैसे केमिकल से खराब हो सकती हैं. एक बार ये चीजें अगर फ़ूड चेन में शामिल हो जाती हैं, तो उन्हें हटाना अक्सर मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है. संगठन सरकारों से अपील करता है कि वे बेहतर खेती के तरीकों, सख्त इंडस्ट्रियल कंट्रोल और मजबूत एनवायरनमेंटल नियमों के जरिए, इस तरह से सोर्स पर ही खाने को खराब होने से रोक सकते हैं.

कैंसर और दिमागी कमजोरी का खतरा

हालांकि खाने में कुछ मेटल की मौजूदगी समय के साथ कम हो रही है, लेकिन इन अनुमानों से पहली बार पता चला है कि मेटल के खाने से दिल की बीमारियां, कैंसर और दिमागी कमजोरी का खतरा बढ़ रहा है. इनऑर्गेनिक आर्सेनिक और लेड एक साल में 10 लाख से अधिक मौतों से जुड़े हैं. मिथाइलमरकरी बढ़ते दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है और बच्चों में जिंदगी भर न्यूरोलॉजिकल और डेवलपमेंटल दिक्कतें पैदा कर सकता है.

बदलते खान-पान, पर्यावरणीय दबाव, ग्लोबलाइज़ेशन और फ़ूड सिस्टम में असमानताएं यह तय करती रहती हैं कि कौन सबसे अधिक असुरक्षित खाने के संपर्क में आता है. कम रिसोर्स वाले समुदायों में रहने वाले बच्चे और लोग सबसे अधिक सेहत को लेकर जूझते रहते हैं. खास तौर से लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों में. अफ़्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों में मिलकर खाने से होने वाली करीब तीन-चौथाई बीमारियां और दुनिया भर में होने वाली 60% मौतें होती हैं.

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