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FD नहीं, बॉन्ड पोर्टफोलियो बना सकता है अमीर! 50 की उम्र में जानें रिटायरमेंट का स्मार्ट प्लान​

50 की उम्र के बाद रिटायरमेंट की तैयारी को लेकर ज्यादातर लोग गंभीर हो जाते हैं. इस समय सबसे बड़ा सवाल होता है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय कैसे सुनिश्चित की जाए. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति के पास करीब ₹1.3 करोड़ का निवेश योग्य फंड है, तो सही तरीके […]

50 की उम्र के बाद रिटायरमेंट की तैयारी को लेकर ज्यादातर लोग गंभीर हो जाते हैं. इस समय सबसे बड़ा सवाल होता है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय कैसे सुनिश्चित की जाए. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति के पास करीब ₹1.3 करोड़ का निवेश योग्य फंड है, तो सही तरीके से तैयार किया गया बॉन्ड पोर्टफोलियो उसे हर महीने लगभग ₹1 लाख की नियमित आय देने में मदद कर सकता है. हालांकि, यह केवल एक उदाहरण है और वास्तविक आय निवेश के प्रकार, ब्याज दरों और व्यक्तिगत जरूरतों पर निर्भर करेगी.

बॉन्ड पोर्टफोलियो क्यों बन सकता है बेहतर विकल्प?

विशेषज्ञों के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी जरूरत नियमित कैश फ्लो की होती है. बॉन्ड, डेट म्यूचुअल फंड और अन्य फिक्स्डइनकम निवेश इस जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. शेयर बाजार की तुलना में इनमें उतारचढ़ाव कम होता है, इसलिए पूंजी की सुरक्षा के साथ नियमित आय पाने की संभावना भी अधिक रहती है. यही कारण है कि रिटायरमेंट प्लानिंग में बॉन्ड पोर्टफोलियो को महत्वपूर्ण माना जाता है.

‘थ्रीबकेट’ रणनीति से मिलेगा बेहतर संतुलन

वित्तीय योजनाकार रिटायरमेंट के लिए थ्रीबकेट रणनीति अपनाने की सलाह देते हैं. पहले बकेट में 13 साल के खर्च के लिए लिक्विड फंड या शॉर्टटर्म निवेश रखे जाते हैं, ताकि अचानक जरूरत पड़ने पर पैसे की कमी न हो.

दूसरे बकेट में बॉन्ड, डेट फंड और अन्य फिक्स्डइनकम साधन शामिल किए जाते हैं, जो नियमित मासिक आय का स्रोत बनते हैं. तीसरे बकेट में इक्विटी या इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे ग्रोथ एसेट्स रखे जाते हैं, ताकि लंबे समय में महंगाई के असर को मात दी जा सके और निवेश की वैल्यू बढ़ती रहे.

पूरी रकम एक ही जगह निवेश करना सही नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद पूरी रकम सिर्फ FD या सिर्फ बॉन्ड में लगाना भी समझदारी नहीं है. इसी तरह पूरी तरह शेयर बाजार पर निर्भर रहना भी जोखिम भरा हो सकता है. सही एसेट एलोकेशन यानी अलगअलग निवेश विकल्पों में संतुलित निवेश करना लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है.

अपने खर्च और जोखिम क्षमता के अनुसार बनाएं योजना

हर व्यक्ति की आय, खर्च, स्वास्थ्य और वित्तीय लक्ष्य अलगअलग होते हैं. इसलिए किसी भी रिटायरमेंट योजना को अपनाने से पहले अपनी जरूरतों का आकलन करना जरूरी है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट के लिए ऐसा पोर्टफोलियो तैयार करें, जिसमें नियमित आय, पूंजी की सुरक्षा और लंबी अवधि की ग्रोथ—तीनों का संतुलन हो. यदि आपके पास पर्याप्त कॉर्पस है और सही निवेश रणनीति अपनाई जाए, तो रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने स्थिर आय प्राप्त करना संभव हो सकता है.

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संपादकीय टीम

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