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Exclusive: भारत में क्रिकेट को सरकारी मदद नहीं, लेकिन विदेश में बांटी गईं करोड़ों की क्रिकेट किट; क्या है खेल मंत्रालय की प्राथमिकता?

भारत सरकार देश में क्रिकेट को सीधे फंड नहीं देती, क्योंकि यह खेल आर्थिक रूप से सबसे मजबूत माना जाता है। हालांकि, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच में सामने आया है कि खिलाड़ियों और खेल विकास के लिए बनाए गए नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) से विदेशी क्रिकेट बोर्डों को क्रिकेट किट और खेल सामग्री भेजने पर लाखों रुपये खर्च किये गए। इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले पांच वर्षों के सरकारी रिकॉर्ड और RTI एक्ट के तहत मिले आंकड़ों की जांच की और मौजूदा तथा पूर्व सरकारी अधिकारियों के इंटरव्यू लिए।

Exclusive: भारत में क्रिकेट को सरकारी मदद नहीं, लेकिन विदेश में बांटी गईं करोड़ों की क्रिकेट किट; क्या है खेल मंत्रालय की प्राथमिकता?
Exclusive: भारत में क्रिकेट को सरकारी मदद नहीं, लेकिन विदेश में बांटी गईं करोड़ों की क्रिकेट किट; क्या है खेल मंत्रालय की प्राथमिकता?

खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के रिकॉर्ड के अनुसार, राष्ट्रीय खेल विकास निधि (NSDF) के जरिये मालदीव, जमैका और सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस के क्रिकेट बोर्डों को ‘गिफ्ट’ के तौर पर क्रिकेट सामान उपलब्ध कराया गया। इन खरीदों पर कुल करीब 1.08 करोड़ रुपये खर्च हुए। रिकॉर्ड बताते हैं कि 2022-23 में जमैका क्रिकेट एसोसिएशन को 46.23 लाख रुपये और सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस क्रिकेट एसोसिएशन को 8.79 लाख रुपये मूल्य का क्रिकेट सामान दिया गया। इसके अलावा मालदीव क्रिकेट बोर्ड को भी खेल सामग्री भेजी गई।

यह खर्च ऐसे समय हुआ, जब NSDF में आने वाला योगदान तेजी से घट रहा था। 2023-24 में फंड में 85.26 करोड़ रुपये का योगदान मिला था, जो 2025-26 तक घटकर 37.02 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद विदेशी क्रिकेट बोर्डों पर खर्च जारी रहा। NSDF फंड का संचालन केंद्रीय खेल मंत्री के अधीन एक 12-सदस्यीय परिषद करती है, लेकिन ग्रांट के प्रस्तावों को मंजूरी देने वाली संस्था खेल मंत्रालय के अधिकारियों की एक छह-सदस्यीय समिति है। यानी जिन्हें खुद इन ग्रांट्स से फायदा पहुंचता है, वही उसी व्यवस्था के अधिकारी हैं।

मामले ने इस सवाल को जन्म दिया है कि जब भारत सरकार खुद देश में क्रिकेट को फंड नहीं देती, तब विदेशी क्रिकेट संस्थाओं को सरकारी खेल फंड से सहायता क्यों दी गई। विदेशी क्रिकेट बोर्डों को दिए गए तोहफों के बारे में खेल मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था जो NSDF के मुख्य उद्देश्यों में से एक है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह दलील तब सही मानी जाती जब NSDF के पैसे का इस्तेमाल दूसरे देशों में वहां के स्थानीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता। जब भारत सरकार खुद भारत में क्रिकेट को फंड नहीं देती तो फिर दूसरे देशों में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए टैक्स देने वालों का पैसा क्यों इस्तेमाल किया जाता है, यह एक सवाल बना हुआ है।’’

विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय खेल विकास निधि की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। यदि खिलाड़ियों के लिए बने फंड का इस्तेमाल गैर-खेल या सीमित पहुंच वाली परियोजनाओं में होने लगेगा तो इससे खेल नीति की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पूर्व मंत्री के राज्य को भी मिला हिस्सा

सारा पैसा राष्ट्रीय खेल तंत्र से बाहर की संस्थाओं को ही नहीं गया। सुविधाएं लेने वालों में तत्कालीन खेल मंत्री का गृह राज्य भी शामिल है। किरण रिजिजू जब 2021-22 में खेल मंत्री थे तब चार जून को अरुणाचल प्रदेश के 26 जिला मुख्यालयों में ‘सिविल कार्य और ओपन-एयर जिम लगाने के लिए 5.93 करोड़ रुपये मंजूर किये गए थे। इसमें से 2.96 करोड़ रुपये उसी साल जारी किये गए और 2.37 करोड़ रुपये 2023-24 में जारी किये गए। राज्य में 16 मार्च 2022 को ‘15 जगहों पर दो-कोर्ट वाले बैडमिंटन हॉल बनाने’ के लिए 2.25 करोड़ रुपये और मंजूर किये गए।

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2022-23 में, जब NSDF में योगदान 85.26 करोड़ रुपये तक पहुंच गया तब सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, उपकरणों और खेल को बढ़ावा देने पर 73.18 करोड़ रुपये खर्च किये। इसमें से लगभग आधा हिस्सा SAI के बेंगलुरु केंद्र और ग्वालियर के लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स में हॉस्टल बनाने और सोनीपत स्थित SAI सेंटर में एक हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित करने पर खर्च हुआ।

2024-25 में रोहन बोपन्ना टेनिस डेवलपमेंट फाउंडेशन को 2.7 करोड़ रुपये मिले। 2025-26 में हैदराबाद में SAI-गोपीचंद अकादमी को खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और अन्य खर्चों यानी बार-बार होने वाले खर्चों के लिए 1.38 करोड़ रुपये मिले। इस संदर्भ में, संसदीय समिति की सिफारिशें बिल्कुल स्पष्ट थीं- ‘‘…इन CSR फंड्स का इस्तेमाल सख्ती से खेलों के विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और कोच वगैरह पर ही किया जाना चाहिए।’’

खिलाड़ियों को तैयार करने और ओलंपिक मिशन को मजबूत करने के लिए बने NSDF फंड से दिल्ली के न्यू मोती बाग कॉम्प्लेक्स, CSOI और अन्य अफसर संस्थानों की खेल सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किये गए। संसदीय समिति ने इस तरह के इस्तेमाल पर चिंता जताई है।

नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड या राष्ट्रीय खेल विकास निधि से राजस्थान और छत्तीसगढ़ में राष्ट्रयी स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठनों को खेल सुविधाएं और टूर्नामेंट कराने के लिए करोड़ों रुपये मंजूर किये गए। इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह जानकारी सामने आई है।

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