: को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ने अपना पक्ष सामने रखा है। आयोग ने कहा है कि उसके कामकाज में लिखित नोट, आपत्तियां, सुझाव और आपसी विचारविमर्श सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी मुद्दे पर अलगअलग राय सामने आना अंतिम फैसले से पहले की प्रक्रिया है और इसे आयोग के अंतिम निर्णय से अलग करके देखा जाना चाहिए।

ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली संवैधानिक संस्था है। आयोग के मुताबिक, उसके आधिकारिक आदेश और फैसले तय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 के प्रावधानों के अनुसार कामकाज किया जाता है।
नोट्स को लेकर EC की सफाई
प्रक्रिया को लेकर सामने आई रिपोर्ट में आयोग के भीतर लिखित आपत्तियों और सुझावों का जिक्र किया गया था। इस पर ने कहा कि किसी भी संस्था में निर्णय लेने से पहले अधिकारियों और सदस्यों के बीच चर्चा होना सामान्य बात है। आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान सदस्यों की ओर से सवाल या सुझाव देना मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों में से किसी एक को ही नहीं, बल्कि सभी संबंधित अधिकारियों को सुझाव और टिप्पणियां देने का अधिकार है।
‘सिर्फ कुछ नोट्स दिखाने से पूरी तस्वीर नहीं आती’
ने कहा कि पिछले करीब 10 महीनों के कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स को सामने रखकर पूरी प्रक्रिया को समझना सही तस्वीर नहीं देता। आयोग का कहना है कि पिछले एक साल में उसने कई नई पहल और चुनाव सुधारों पर काम किया है। ECI ने SIR को भी इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा कि इससे जुड़े फैसले आयोग के स्तर पर लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
वोटर लिस्ट और डेटा सुरक्षा पर भी जवाब
ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य तकनीकी प्रणालियों को डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत संचालित किए जाने की बात कही। आयोग के अनुसार, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के कानूनी अधिकार क्षेत्र में आती है। आयोग ने कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आयोग का यह बयान पूरे विवाद पर उसकी ओर से सामने रखा गया आधिकारिक पक्ष है।
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