इलाहाबाद हाईकोर्ट में महोबा के श्रीनगर थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के मुकदमे में आरोपी पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के दौरान एडीजी जोन प्रयागराज ज्योति नारायण हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष पेश हुए. यह मामला सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली को लेकर हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद खासा महत्वपूर्ण हो गया है.पिछली सुनवाई 19 अगस्त को हुई थी. उस दौरान कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेशों के अनुपालन में कथित लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई थी.

सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि काउंटर एफिडेविट दाखिल किए जाने को लेकर संबंधित अधिकारियों को दो बार पत्र भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद कोई भी अधिकारी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ और न ही जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया.
हत्या जैसे मामलों में जमानत अर्जियां लंबे समय तक लंबित
इस पर हाईकोर्ट ने इसे अदालत का पूरी तरह अनादर करार दिया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आजकल अदालत को इस तरह की समस्याओं का अक्सर सामना करना पड़ रहा है. पुलिस अधिकारियों का इस तरह का रवैया अदालत के आदेशों के पालन में आनाकानी को दर्शाता है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि अधिकारियों की इसी कार्यशैली के चलते हत्या जैसे गंभीर मामलों में जमानत अर्जियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं.
डीजीपी और महाधिवक्ता को पेश होने का आदेश
हाईकोर्ट ने मामले में डीजीपी को तलब करते हुए हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया था कि पुलिस अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन करने में क्यों आनाकानी कर रहे हैं. साथ ही अगली सुनवाई पर डीजीपी और महाधिवक्ता को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था.
श्रीनगर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज
मामले में याची की ओर से अधिवक्ता शाल्विन ने अपनी दलीलें पेश कीं. पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू के खिलाफ साल 2025 में महोबा के श्रीनगर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था. याची 23 जून 2025 से जेल में बंद है. मामले की अगली सुनवाई अब 1 सितंबर को होगी. सुनवाई जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच में हुई.