चीन ने एक नई एंटी शिप मिसाइल का परीक्षण किया है. इसे वाईजेड सीरीज का नया एडीशन कहा जा रहा है. इसकी रेंज 540 किलो मीटर तथा क्रूज स्पीड 966 किलोमीटर प्रति घंटा है. लक्ष्य के करीब पहुंचने पर इसकी गति मैक3 तक पहुंच सकती है. दावा है कि इसमें रडार को चकमा देने की क्षमता भी है. इसे समुद्र में चीनी नौसेना के युद्धपोत से लांच किया गया है.

चीन के सरकारी मीडिया ने इस लांच से जुड़े फुटेज जारी किये हैं लेकिन बहुत सारी सूचनाओं को अभी भी सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन जितनी भी सूचनाएं सामने आई हैं, वह इतना बतानेजताने को पर्याप्त हैं कि चीन अपनी समुद्री सुरक्षा को दिनबदिन मजबूत कर रहा है. चीन की एंटीशिप मिसाइलों ने पहले भी दुनिया का ध्यान खींचा है. इन मिसाइलों का उद्देश्य दुश्मन के युद्धपोतों को दूर से निशाना बनाना है. इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे बड़े समुद्री प्लेटफॉर्म भी शामिल हो सकते हैं. आइए, जानते हैं कि एंटीशिप मिसाइल क्या होती है? यह रडार को कैसे चकमा देती हैं?
क्या होती है एंटीशिप मिसाइल?
एंटीशिप मिसाइल का मतलब है ऐसी मिसाइल जो समुद्र में मौजूद जहाजों को निशाना बनाती है. इसका मुख्य लक्ष्य युद्धपोत होता है. इसमें डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, क्रूजर और एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हो सकते हैं. इन मिसाइलों को कई तरह के प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है. इन्हें युद्धपोत से छोड़ा जा सकता है. इन्हें तटीय लॉन्चर से भी दागा जा सकता है. कुछ मिसाइलें लड़ाकू विमान या बॉम्बर से भी छोड़ी जाती हैं. कुछ को पनडुब्बी से लॉन्च करने की क्षमता भी होती है. इनका लक्ष्य केवल जहाज को नुकसान पहुंचाना नहीं होता. इनका उद्देश्य दुश्मन की समुद्री ताकत को कमजोर करना होता है. समुद्री रास्ते बंद करना भी इसका हिस्सा हो सकता है.
YJ सीरिज की मिसाइल.
चीन की वाईजे मिसाइल सीरीज क्या है?
चीन की एंटीशिप मिसाइलों को आमतौर पर वाईजे नाम से जाना जाता है. इसका अर्थ यिंगजी बताया जाता है. इसका मतलब ईगल स्ट्राइक यानी चील जैसा हमला है. उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने सार्वजनिक सैन्य प्रदर्शनी में इसके कई वैरिएन्ट दिखाए हैं. इन सभी की भूमिका एक जैसी नहीं है. कुछ सुपरसोनिक हैं. कुछ को हाइपरसोनिक श्रेणी में रखा जाता है. कुछ लंबी दूरी से हमला करने के लिए बनाई गई हैं. सुपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की गति से अधिक तेज चलती है. हाइपरसोनिक मिसाइल की गति मैकफाइव या उससे अधिक मानी जाती है. इतनी तेज गति से आने वाले हथियार को पहचानना और रोकना कठिन हो सकता है.
रडार को चकमा देने के मायने क्या हैं?
रडार को चकमा देने का मतलब यह नहीं कि मिसाइल पूरी तरह अदृश्य हो जाती है. इसका अर्थ है कि उसे समय पर पहचानना कठिन बनाया जा सकता है. एंटीशिप मिसाइलें इसके लिए कई तरीके अपना सकती हैं. बहुत कम ऊंचाई पर उड़ना पहला तरीका हो सकता है. ऐसी मिसाइल समुद्र की सतह के बेहद पास उड़ सकती है. इसे सीस्किमिंग कहा जाता है.
समुद्र की लहरें और पृथ्वी की गोलाई रडार की नजर को सीमित कर सकती हैं. इससे जहाज के रडार को मिसाइल देर से दिख सकती है. यदि मिसाइल बहुत तेज है, तो रक्षा प्रणाली के पास प्रतिक्रिया के लिए कम समय बचता है. यदि मिसाइल उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदलती है, तो उसे रोकना मुश्किल हो सकता है. खासकर अंतिम चरण में अचानक मोड़ लेने वाली मिसाइलें चुनौती पैदा करती हैं. आधुनिक मिसाइलों में ऐसे सिस्टम हो सकते हैं जो जैमिंग के बीच भी लक्ष्य खोजने की कोशिश करें.
चीन की हाइपर सोनिक मिसाइल.
हाइपरसोनिक स्पीड क्यों अहम है?
हाइपरसोनिक हथियारों की चर्चा इसलिए होती है क्योंकि उनकी गति बहुत ज्यादा होती है. तेज गति का अर्थ है कम चेतावनी समय. मान लीजिए कि किसी युद्धपोत के रडार को एक तेज मिसाइल देर से दिखाई देती है. तब जहाज को कुछ ही मिनट या सेकंड में फैसला लेना पड़ सकता है. उसे मिसाइल को पहचानना होगा. खतरे का आकलन करना होगा. फिर इंटरसेप्टर मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या नजदीकी रक्षा प्रणाली का उपयोग करना होगा. यही वजह है कि तेज और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलें नौसेना के लिए गंभीर चुनौती बनती हैं. लेकिन यह भी सच है कि हाइपरसोनिक मिसाइल को रोकना असंभव नहीं है. आधुनिक नौसेनाओं के पास कई स्तर की सुरक्षा होती है. इनमें लंबी दूरी के रडार, लड़ाकू विमान, मिसाइल इंटरसेप्टर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और क्लोजइन वेपन सिस्टम शामिल हो सकते हैं.
क्यों हो रही है एयरक्राफ्ट कैरियर की चर्चा?
एंटीशिप मिसाइलों की चर्चा में एयरक्राफ्ट कैरियर का नाम अक्सर आता है. एयरक्राफ्ट कैरियर समुद्र में मौजूद चलताफिरता हवाई अड्डा होता है. यह लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और बड़ी सैन्य टुकड़ी को साथ ले जा सकता है. इसी कारण यह किसी भी नौसेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है. लेकिन यह अकेले नहीं चलता. इसके साथ कई युद्धपोत, पनडुब्बियां, निगरानी विमान और सुरक्षा प्रणालियां होती हैं. भारत, अमेरिका समेत कई बड़े देशों के पास इस तरह के कैरियर उपलब्ध हैं. इस मामले में सबसे मजबूत स्थिति अमेरिका की बताई जाती है. चीन की लंबी दूरी की एंटीशिप क्षमता को अमेरिका और उसके सहयोगियों की नौसैनिक मौजूदगी के संदर्भ में देखा जाता है. खासकर पश्चिमी प्रशांत महासागर, ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में इसकी चर्चा होती है.
समुद्री युद्ध की तस्वीर कैसे बदल सकती है?
पहले समुद्री युद्ध में जहाजों के बीच दूरी कम हो सकती थी. अब लंबी दूरी से लक्ष्य खोजने और हमला करने की क्षमता बढ़ रही है. उपग्रह, ड्रोन, समुद्री गश्ती विमान और रडार नेटवर्क इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. लेकिन मिसाइल का होना ही काफी नहीं है. सबसे कठिन काम है चल रहे जहाज का सही स्थान पता लगाना. फिर उस जानकारी को मिसाइल तक पहुंचाना होता है. युद्ध के समय संचार नेटवर्क को बाधित भी किया जा सकता है. इसलिए किसी एंटीशिप मिसाइल की वास्तविक ताकत केवल उसकी रफ्तार से तय नहीं होती. लक्ष्य खोजने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है. मार्गदर्शन प्रणाली, नेटवर्क, सेंसर और लॉन्च प्लेटफॉर्म भी अहम हैं.
भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत एक बड़ी समुद्री शक्ति है. भारत की सुरक्षा और व्यापार दोनों समुद्री मार्गों से जुड़े हैं. ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी समुद्री रास्तों से आता है. चीन की नौसैनिक गतिविधियां और मिसाइल क्षमता भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती हैं. भारत भी अपनी समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी क्षमता और एंटीशिप हथियारों पर काम करता रहा है. हालांकि, हर नई मिसाइल को तत्काल युद्ध का संकेत नहीं मानना चाहिए. रक्षा तैयारियां अक्सर लंबे समय की रणनीति का हिस्सा होती हैं. फिर भी, समुद्र में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय देशों के लिए चिंता का विषय है.
इस तरह कहा जा सकता है कि चीन की नई लांच एंटीशिप मिसाइल आधुनिक समुद्री ताकत को बढ़ा सकती है. इनका लक्ष्य दुश्मन के बड़े युद्धपोतों को दूर से खतरे में डालना है. तेज गति, कम ऊंचाई पर उड़ान और दिशा बदलने जैसी विशेषताएं इन्हें चुनौतीपूर्ण बनाती हैं. चीन की नई मिसाइल लांच और मौजूदा एंटीशिप मिसाइलों का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक रक्षा और मिसाइल रोधी तकनीक की भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है.