कान्स फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत 12 मई से हो रही है और यह 23 मई तक चलेगा. फ्रांस के कान्स शहर में होने वाले दुनिया इस सबसे प्रतिष्ठित समारोह में अब बड़ी संख्या में भारतीय सेलिब्रिटी भी पहुंचते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यहां किसी भारतीय की मौजूदगी ही दुर्लभ थी. कान्स फिल्म फेस्टिवल के नाम पर अक्सर ऐश्वर्या राय बच्चन का चेहरा याद आता है, लेकिन वो इस फेस्टिवल में पहुंचने वाली पहली भारतीय नहीं थीं.
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1982 वो साल था जब कोई भारतीय पहली बार इस फेस्टिवल में पहुंचा था. उनका नाम था मृणाल सेन. वो कान्स फिल्म फेस्टिवल में बतौर जूरी शामिल हुए थे. दिलचस्प बात है कि उसी साल उनकी फिल्म ‘ख़ारिज’ ने जूरी पुरस्कार जीता था. यही वजह थी कि उनकी उपस्थिति सुर्खियां बनी थी.
फिल्म ख़ारिज एक बाल मजदूर पर आधारित थी. यह एक ऐसे बच्चे की कहानी थी जो मजदूरी करता है और रहस्यमय स्थितियों में मर जाता है. उसे काम पर रखने वाला ही बुरा व्यवहार करने के लिए खुद को दोषी मानता है और उसके माता-पिता से बदला लेने और पुलिस की चल रही जांच के डर से उलझा हुआ है.
मृणाल सेन.
मीरा नायर से ऐश्वर्या राय बच्चन तक, कौन-कौन पहुंचा?
- मीरा नायर (1990): देश की जानी-मानी फिल्ममेकर मीरा नायर को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धी दिलाने का श्रेय दिया जाता है. वह साल 1990 में कान्स फिल्म महोत्सव में जूरी मेंबर के तौर पर जुड़ीं. उनकी फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ को पसंद किया गया. इस फिल्म को Caméra d’Or (गोल्डन कैमरा) अवॉर्ड मिला था, जो सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म को दिया जाता है. इसके अलावा इसे ऑडियंस अवॉर्ड भी मिला था.
फिल्ममेकर मीरा नायर.
- अरुंधति रॉय (2000): बुकर पुरस्कार जीतने सहित अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए जानी जाने वाली अरुंधति रॉय ने 2000 में कान फिल्म महोत्सव में जूरी सदस्य के रूप में काम किया था.
- ऐश्वर्या राय बच्चन (2002): इस फिल्म फेस्टिवल में ऐश्वर्या राय बच्चन की एंट्री 2002 में तब हुई जब उन्होंने संजय लीला भंसाली और शाहरुख खान के साथ फिल्म देवदास के लिए वहां पहुंची और खूब प्रशंसा बटोरी. अगले साल, वह कान्स जूरी का हिस्सा बनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनीं. ऐश्वर्या राय बच्चन के नाम कान्स रेड कार्पेट पर सबसे अधिक बार उपस्थिति दर्ज कराने का रिकॉर्ड है.
संजय लीला भंसाली और शाहरुख खान के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन.
- नंदिता दास (2005): अलग तरह की फिल्मों को बनाने के लिए पहचानी जाने वालीं नंदिता दास साल 2005 में कान्स फिल्म फेस्टिवल पहुंचीं. यहां जूरी में अपनी सेवाएं दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई. वह 2013 में उभरते फिल्म निर्माताओं को समर्थन देने वाले सिनेफॉन्डेशन पैनल में भाग लेने के लिए लौटीं और उन्होंने शॉर्ट फिल्म्स की जूरी में भी अपनी सेवाएं दीं.
- शर्मिला टैगोर (2009): दिग्गज भारतीय फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर को 2009 में जूरी में शामिल होने का इंविटेशन मिला. यह उनके करियर का एक और यादगार पल था.
- शेखर कपूर (2010): भारतीय सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर शेखर कपूर ने 2010 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में बतौर जूरी अपनी सेवाएं दीं. उन्हें ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है. शेखर कपूर को गोल्डन ग्लोब्स और बाफ्टा जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किया गया था.
- विद्या बालन (2013): भले ही कांन्स फिल्म फेस्टिवल में विद्या बालन की फिल्में नहीं रिलीज हुई, लेकिन वो दीपिका पादुकोण से 10 साल पहले ही इस फेस्टिवल का हिस्सा बनीं. उन्होंने साल 2013 में जूरी सदस्य के रूप में हिस्सा लिया.
- दीपिका पादुकोण (2023): साल 2023 में दीपिका पादुकोण ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत से जूरी सदस्य के रूप में चुने जाने पर इतिहास रच दिया.





