बाजार में निवेश करते समय हर निवेशक सुरक्षित और अच्छे रिटर्न की उम्मीद करता है. आजकल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर ऐसे कई विज्ञापन दिख जाते हैं जो बॉन्ड्स में निवेश पर ‘गारंटीड’ या ‘फिक्स्ड’ रिटर्न का दावा करते हैं. इन लुभावने दावों के चक्कर में आकर कई लोग बिना सोचेसमझे अपनी गाढ़ी कमाई लगा देते हैं. अब बाजार नियामक संस्था सेबी ने निवेशकों को ऐसे भ्रामक विज्ञापनों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है. ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स के विज्ञापनों के लिए एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया गया है. इसका मकसद उन विज्ञापनों पर लगाम कसना है जो आम निवेशकों को बिना सही जांचपड़ताल किए पैसा लगाने के लिए प्रेरित करते हैं. सेबी ने इन प्रस्तावों पर 11 सितंबर तक सभी स्टेकहोल्डर्स से उनकी राय मांगी है.

FOMO वाले विज्ञापनों पर लगेगी लगाम
आजकल डिजिटल विज्ञापनों और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए एक ऐसा माहौल बनाया जाता है, जिसमें निवेशक को लगता है कि अगर उसने अभी निवेश नहीं किया तो बहुत बड़ा मौका हाथ से निकल जाएगा. इसे ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ कहा जाता है. सेबी का साफ मानना है कि ऐसे विज्ञापनों पर तुरंत प्रतिबंध लगना चाहिए जो निवेशकों पर जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाते हैं. नए प्रस्ताव के तहत, उन सभी विज्ञापनों पर रोक लगाई जाएगी जो लोगों को उत्साहित करके बिना रिस्क समझे निवेश करने के लिए उकसाते हैं. ‘हाई यील्ड’, ‘हाई रेटेड’ या ‘हाई रिटर्न्स’ जैसे बड़ेबड़े दावों का इस्तेमाल अब बिना पूरी जानकारी दिए नहीं किया जा सकेगा.
निवेशकों के सामने रखनी होगी पूरी तस्वीर
सेबी का यह कदम केवल भ्रामक विज्ञापनों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया है. अगर कोई भी प्लेटफॉर्म किसी खास बॉन्ड या सिक्योरिटी का प्रचार कर रहा है, तो उसे कई अहम जानकारियां अनिवार्य रूप से देनी होंगी. इनमें बॉन्ड जारी करने वाले का नाम, निवेश की अवधि और उसकी क्रेडिट रेटिंग शामिल है. इसके अलावा, निवेशकों को सिक्योरिटी का प्रकार, क्लीन प्राइस, डर्टी प्राइस, यील्ड टू मेच्योरिटी और क्रेडिट रिस्कओमीटर जैसी जरूरी तकनीकी जानकारी भी बतानी होगी. इस पहल से यह तय हो सकेगा कि आम आदमी निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले उससे जुड़े जोखिमों को पूरी तरह समझ ले.
फिक्स्ड रिटर्न के दावों पर लगेगी लगाम
विज्ञापनों में अक्सर ‘पैसिव इनकम’, ‘प्रेडिक्टेबल रिटर्न’ या ‘फिक्स्ड रिटर्न’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके यह भ्रम पैदा किया जाता है कि निवेश पर एक निश्चित मुनाफा मिलेगा ही. सेबी ने इन शब्दों के इस्तेमाल पर भी खास निर्देश जारी किए हैं. अगर कोई विज्ञापन ‘फिक्स्ड रिटर्न’ का जिक्र करता है, तो उसे बहुत ही स्पष्ट रूप से एक डिस्क्लेमर दिखाना होगा. इस डिस्क्लेमर में ये बताना अनिवार्य होगा कि डेट सिक्योरिटीज में फिक्स्ड रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है. बाजार में उतारचढ़ाव का रिस्क, क्रेडिट रिस्क और डिफॉल्ट का खतरा हमेशा बना रहता है.