Petrol-Diesel Price Hike : देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शनिवार यानी 23 मई को तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है. इस बढ़ोतरी के बाद इन जरूरी ईंधनों की कीमतों में कुल मिलाकर ₹5 प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है. इसी बीच केंद्र सरकार ने दावा किया है कि विपक्ष शासित राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा हैं. दरअसल, अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग होती हैं क्योंकि राज्य सरकारें वैट (VAT) और अतिरिक्त स्थानीय सेस अलग-अलग दरों पर लगाती हैं.

केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहता है. लेकिन पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम कीमत काफी हद तक राज्य सरकारों की टैक्स नीति पर निर्भर करती है. केंद्र सरकार की अधिसूचना के हवाले से बताया कि जिन राज्यों में सबसे ज्यादा वैट लगाया जाता है. वहां प्रभावी टैक्स दर 30% या उससे अधिक हो जाती है. इसके अलावा प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी लगाया जाता है. वहीं, जिन राज्यों में सबसे कम वैट है. वहां टैक्स दर करीब 20% रहती है और कोई अतिरिक्त सेस नहीं लगाया जाता है.
राज्यवार पेट्रोल की कीमतों में अंतर
ताजा बढ़ोतरी के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल की कीमत सबसे ज्यादा ₹117.8 प्रति लीटर दर्ज की गई. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) केंद्र में भाजपा की सहयोगी है. राज्य में 31% वैट के साथ ₹4 प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क और रोड डेवलपमेंट सेस लगाया जाता है. इससे कुल टैक्स बोझ करीब 35% तक पहुंच जाता है.
आंध्र प्रदेश के बाद तेलंगाना और केरल में पेट्रोल सबसे महंगा है, जहां इसकी कीमत ₹115.7 और ₹112.3 प्रति लीटर है. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार है. वहीं, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और राजस्थान में पेट्रोल की कीमत ₹111.4 से ₹108 प्रति लीटर के बीच है. इनमें से कई राज्यों में भाजपा की सरकार है. इसके उलट भाजपा शासित हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गुजरात में पेट्रोल की कीमतें सबसे कम हैं. यहां पेट्रोल ₹99.7 से ₹99.1 प्रति लीटर के बीच बिक रहा है. वहीं, आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में पेट्रोल की कीमत ₹101.1 प्रति लीटर है.
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एक्साइज ड्यूटी कटौती के बावजूद महंगा पेट्रोल
अमेरिका-ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते संकट से सप्लाई पर पड़ने वाले असर को देखते हुए मोदी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, ताकि घरेलू अर्थव्यवस्था पर बोझ कम किया जा सके. हालांकि, राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट की गणना बेस प्राइस और ऑपरेशनल लागत पर प्रतिशत के रूप में की जाती है. इसलिए आम लोगों को मिलने वाली अंतिम कीमत अब भी राज्य सरकारों की टैक्स नीति से तय होती है. केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की थी. इसके बाद पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गया, जबकि डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई.





