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रिलायंस का बड़ा दांव, 5 साल के बांड से 12,500 करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी​

Reliance Bond Issue: भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बार फिर घरेलू बांड बाजार में बड़ा कदम रखने जा रही है. कंपनी अपने कारोबार को रफ्तार देने के लिए 12,500 करोड़ रुपये की बड़ी रकम जुटा रही है. इसके लिए 5 साल के बांड का सहारा लिया जा रहा है. खास बात ये […]

Reliance Bond Issue: भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बार फिर घरेलू बांड बाजार में बड़ा कदम रखने जा रही है. कंपनी अपने कारोबार को रफ्तार देने के लिए 12,500 करोड़ रुपये की बड़ी रकम जुटा रही है. इसके लिए 5 साल के बांड का सहारा लिया जा रहा है. खास बात ये है कि देश के दिग्गज बैंक इस ट्रांजैक्शन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं. साल 2023 के बाद रिलायंस का घरेलू बांड बाजार में ये पहला बड़ा कदम है. यह इश्यू 18 सितंबर को बंद होने वाला है

कैसे जुटाई जा रही इतनी बड़ी रकम

इस इश्यू का बेस साइज 10,000 करोड़ रुपये रखा गया है. इसके साथ ही 2,500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है. ग्रीनशू ऑप्शन का मतलब है कि अगर निवेशकों की मांग बढ़ती है, तो कंपनी अतिरिक्त रकम भी रख सकती है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 3,000 करोड़ रुपये एंकर निवेशकों को पहले ही दिए जा चुके हैं. बाकी बचे हिस्से को भी निवेशकों का पूरा समर्थन मिला है. इन बांड्स पर निवेशकों को 7.47 फीसदी के आसपास ब्याज मिलने की उम्मीद है.

किन बैंकों को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

रिलायंस के इस बांड इश्यू में कई प्रमुख बैंक पैसा लगा रहे हैं. इनमें एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के साथ यस बैंक शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, इस डील में सबसे बड़ा हिस्सा एक्सिस बैंक को मिलने की उम्मीद है. इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और यस बैंक का नंबर आता है. फिलहाल बैंकों या रिलायंस के प्रवक्ता की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

एलआईसी ने क्यों बनाई इस डील से दूरी

साल 2023 में जब रिलायंस ने रिटेल बांड जारी किए थे, तब भारतीय जीवन बीमा निगम ने उसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था. उस समय बांड की अवधि 10 साल थी. लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है. इस बार एलआईसी इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इस बांड की मियाद सिर्फ पांच साल है. इसके अलावा, बैंकों के पास फिलहाल काफी पैसा मौजूद है, इसलिए वे खुद इस मौके को भुनाना चाहते हैं.

बैंकों के पास कहां से आई इतनी लिक्विडिटी

अब सवाल उठता है कि बैंकों के पास इतना पैसा कहां से आया कि वे कॉरपोरेट कंपनियों को इतनी बड़ी रकम देने के लिए तैयार बैठे हैं. दरअसल, रिजर्व बैंक की खास सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा जमा के जरिए भारतीय बैंकों के पास रिकॉर्ड पैसा आया है. 31 अगस्त तक बैंकों ने इसके जरिए 127.2 अरब डॉलर जुटाए हैं. अकेले आईसीआईसीआई बैंक ने 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं.

बैंक ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट बताती है कि इस विदेशी जमा की वजह से भारतीय बैंकों को बड़ी राहत मिली है. पिछले कुछ सालों से बैंक डिपॉजिट की कमी से जूझ रहे थे. अब उनके पास पर्याप्त फंड है, जिसे वे कॉरपोरेट लोन, प्रोजेक्ट फाइनेंस या बांड में निवेश कर रहे हैं. इसी लिक्विडिटी का फायदा अब रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों को मिल रहा है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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