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US Iran War: 6 महीने में फूंक दिए 38 अरब डॉलर, अब अमेरिका की सांसें क्यों फूल रहीं?​

US Iran War: ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को 6 महीने बीत चुके हैं. इन 6 महीनों में अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है. कांग्रेसनल बजट ऑफिस की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी अमेरिकी सरकार की नींद उड़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब तक इस जंग में 38 अरब […]

US Iran War: ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को 6 महीने बीत चुके हैं. इन 6 महीनों में अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है. कांग्रेसनल बजट ऑफिस की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी अमेरिकी सरकार की नींद उड़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब तक इस जंग में 38 अरब डॉलर फूंक चुका है. चिंता की बात ये है कि जंग का खर्च यहीं नहीं रुकने वाला. अनुमान है कि हर महीने इस खर्च में 3 अरब डॉलर का इजाफा होगा. डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अब इस तनाव को खत्म करने के रास्ते तलाश रहा है. सबसे बड़ा लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है, जो दुनिया के व्यापार के लिए बेहद अहम है.

इस जंग का असर सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है. अब तक 18 बहादुर अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी जुलाई में सीनेट के सामने माना था कि युद्ध का खर्च 37.5 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया है. CBO की ये रिपोर्ट साफ बताती है कि जंग ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथसाथ सेना की तैयारियों पर भी गहरा असर डाला है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की बजट कमेटी के डेमोक्रेट नेता ब्रेंडन बॉयल के कहने पर ही इस पूरे खर्च की जांच की गई थी. बॉयल ने कहा कि ट्रंप के इस विनाशकारी युद्ध ने हमारे सैनिकों की जान ली है. इसके साथ ही अमेरिकी करदाताओं के अरबों डॉलर भी बर्बाद कर दिए हैं.

हथियारों का गोदाम हो रहा खाली

युद्ध में अमेरिका ने अपने हथियारों का जमकर इस्तेमाल किया है. हालात ये हैं कि लंबी दूरी की सटीक मार करने वाली मिसाइलों का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है. CBO के मुताबिक, इन हथियारों को दोबारा बनाने में अमेरिका को कम से कम पांच साल लग सकते हैं. हालांकि, जब इस खर्च का ऑडिट करने की बारी आई, तो रक्षा विभाग ने कोई खास सहयोग नहीं किया.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने ट्रंप के एक्शन को सही ठहराया है. उनका कहना है कि अमेरिकी लोगों को बचाने के लिए ये एक जरूरी कदम था. उन्होंने ये भी दावा किया कि सेना के पास किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए पर्याप्त हथियार हैं. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी हथियारों की कमी की बात को नकार दिया. लेकिन, सच्चाई कुछ और ही नजर आती है. सीनेट की सुनवाई में रक्षा सचिव हेगसेथ ने खुद हथियारों का स्टॉक भरने के लिए 90 अरब डॉलर की इमरजेंसी फंड की मांग की थी. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर पैसा नहीं मिला, तो सेना को भारी कमी का सामना करना पड़ेगा.

अर्थव्यवस्था पर महंगाई की मार

इस युद्ध की वजह से अमेरिका के घरेलू मोर्चे पर भी तनाव बढ़ गया है. CBO का अनुमान है कि 2027 के शुरुआती तीन महीनों में अमेरिका में महंगाई 0.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी. होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह हिल गया है. युद्ध से पहले दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता था. अब तेल की सप्लाई बाधित होने से कीमतें आसमान छू रही हैं.

अमेरिका की आर्थिक सेहत पहले ही खराब चल रही है. अगस्त में देश का कुल सार्वजनिक कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है. ऐसे में जंग का ये बढ़ता खर्च अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. रिपोर्ट में अभी उन हमलों के खर्च को शामिल नहीं किया गया है, जो होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हुए हैं. इसके साथ ही युद्ध के लिए लिए गए कर्ज का ब्याज भी इस 38 अरब डॉलर में शामिल नहीं है. अगर इसे भी जोड़ लिया जाए, तो खर्च का आंकड़ा कहीं ज्यादा बड़ा हो जाएगा.

इराक युद्ध में खर्च हुए थे 2 ट्रिलियन डॉलर

पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर भारी नुकसान पहुंचाया है. सैकड़ों इमारतें, लड़ाकू विमान, रिफ्यूलिंग प्लेन से लेकर ड्रोन तक तबाह हो गए हैं. सिर्फ अमेरिकी राजनयिक संपत्तियों को ही 184 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर इस युद्ध की तुलना 9/11 के बाद हुए इराक और अफगानिस्तान युद्ध से करते हैं. इराक युद्ध में करीब 2 ट्रिलियन डॉलर खर्च हुए थे, जबकि अफगानिस्तान में अमेरिका ने 2.3 ट्रिलियन डॉलर बहा दिए थे. उन दोनों युद्धों में लाखों सैनिक शामिल थे. ईरान के साथ चल रही ये जंग भले ही पैमाने में अभी छोटी लग रही हो, लेकिन जिस रफ्तार से अमेरिका का खजाना खाली हो रहा है, वो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है. CBO ने साफ कहा है कि मिसाइलों की कमी पेंटागन के लिए बड़ा रिस्क है. खासकर तब, जब चीन या ताइवान जैसे मोर्चों पर अमेरिका को किसी बड़े टकराव का सामना करना पड़े.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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