Train Ticket UPI Charge: 15 अक्टूबर से देश में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने मंगलवार को घोषणा की कि सरकार 15 अक्टूबर से चुनिंदा पर्सनटूमर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करेगी. इसके तहत, मर्चेंट्स को 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी और 75,000 रुपए या उससे ज्यादा के पेमेंट पर अधिकतम 300 रुपए की फीस देनी होगी.

इस घोषणा के बाद से ही आम लोगों में भारी कन्फ्यूजन फैल गया था. सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी थी कि क्या अब ट्रेन का टिकट भी महंगा हो जाएगा. मंगलवार को नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने एक एफएक्यू जारी करके इस मामले में सारे सवालों के जवाब दे दिए हैं. इससे स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई है.
यात्रियों की जेब पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ
आज के समय में ज्यादातर लोग रेलवे का टिकट बुक करते समय ऑनलाइन पेमेंट का ही इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में एक्सट्रा चार्ज की बात सुनकर हर कोई परेशान था. NPCI ने अपने जवाब में स्पष्ट कर दिया है कि करने पर रेलवे यात्रियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. नया पेमेंट ढांचा इस तरह से तैयार किया गया है कि उपभोक्ता को सिर्फ निर्धारित टिकट की कीमत ही चुकानी पड़े. भले ही आपके टिकट की कुल कीमत 2000 रुपये से ज्यादा हो, लेकिन आपकी जेब से एक भी पैसा ज्यादा नहीं कटेगा.
कौन भरेगा एक्स्ट्रा चार्ज का पैसा
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब यात्री से पैसे नहीं लिए जाएंगे तो ये नया चार्ज आखिर कौन भरेगा. नए नियम के मुताबिक 2000 रुपये से ज्यादा के रेलवे ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगाया जाएगा. सरकार ने साफ किया है कि ये पैसा मर्चेंट यानी विक्रेता को ही देना होगा. इसका मतलब ये है कि अगर आप टिकट बुक करते हैं तो ये 5 रुपये का चार्ज इंडियन रेलवे या IRCTC खुद अपनी जेब से देगा. मान लीजिए आपका टिकट 3000 रुपये का है तो आप पेमेंट के दौरान सिर्फ 3000 रुपये ही चुकाएंगे. जो अतिरिक्त 5 रुपये का चार्ज बनेगा उसका पूरा बोझ रेलवे खुद उठाएगा. यात्री पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
अन्य पेमेंट्स पर भी लागू होंगे तय नियम
NPCI ने अपने एफएक्यू में सिर्फ रेलवे ही नहीं बल्कि कुछ अन्य सेक्टर्स के बारे में भी जानकारी दी है. रेलवे के अलावा दूरसंचार सेवाओं, बीमा प्रीमियम का भुगतान तथा ईंधन भरवाने जैसी रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं पर भी 5 रुपये का ही फ्लैट MDR लगेगा. सामान्य तौर पर कई अन्य मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत का स्टैंडर्ड MDR तय किया गया है जो अधिकतम 300 रुपये तक हो सकता है. लेकिन इन चुनिंदा जरूरी सेक्टर्स में आम जनता को राहत देने के मकसद से एक निश्चित शुल्क ही तय किया गया है.
दो हजार से कम की पेमेंट रहेगी बिल्कुल फ्री
छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पुरानी व्यवस्था को ही कायम रखा है. अगर आपकी ट्रेन टिकट 2000 रुपये से कम की है तो UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का कोई MDR शुल्क नहीं लगेगा. ये पूरी तरह से फ्री रहेगा. ऐसे में वे लोग जो छोटी दूरी का सफर करते हैं या जिनका टिकट सस्ता होता है, उन्हें नए नियमों से बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. ये सारी नई व्यवस्थाएं मुख्य रूप से इसलिए लागू की गई हैं ताकि डिजिटल पेमेंट के पूरे इकोसिस्टम को बनाए रखने का खर्च मर्चेंट्स से निकाला जा सके.