नई दिल्ली में 1213 सितंबर को आयोजित iBRICS Summit 2026 ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को एक नई दिशा देने की कोशिश की. दो दिवसीय इस ऐतिहासिक सम्मेलन में 500 से अधिक शीर्ष संस्थागत निवेशकों, वित्त मंत्रियों और कारोबारी नेताओं ने हिस्सा लिया. समिट के साथ एक आकर्षण iBRICS DART Charter भी रहा जिसपर सार्वजनिक हस्ताक्षर हुए.

इसे डिजिटल एसेट्स, तेज भुगतान प्रणालियों, CBDC इंटरऑपरेबिलिटी और रियलवर्ल्ड एसेट टोकनाइजेशन को एक साझा वित्तीय ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर पेश किया गया. समिट के लीड कोचेयर और Sovereign Wealth Fund Institute के चेयरमैन लक्ष्मी नारायणन ने iBRICS DART Charter को वैश्विक सोवेरिन वेल्थ के लिए एक मजबूत वित्तीय ढांचे का ब्लूप्रिंट बताया.
समिट के समापन पर लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि DART Charter पर हस्ताक्षर सिर्फ एक सफल उद्घाटन सम्मेलन का समापन नहीं है, बल्कि 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के ग्लोबल Sovereign Wealth के लिए एक लचीले वित्तीय ढांचे की नींव है. उन्होंने इस पहल को ग्लोबल साउथ के लिए एक बड़े वित्तीय बदलाव के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि Sovereign Capital अब सिर्फ passive allocation तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल साउथ की आर्थिक व्यवस्था को सक्रिय रूप से आकार देने में भूमिका निभा सकता है.
यही iBRICS Summit 2026 का सबसे बड़ा संदेश भी रहा—विशाल Sovereign Capital को रणनीतिक परियोजनाओं, डिजिटल वित्त और भविष्य की भुगतान प्रणालियों से जोड़ना. iBRICS Summit में DART यानी Digital Assets Roundtable Charter पर सार्वजनिक हस्ताक्षर के साथ BRICS DART Working Group की स्थापना का रास्ता साफ हुआ.
इस वर्किंग ग्रुप का उद्देश्य BRICS Payment Task Force के साथ इंडस्ट्री स्तर पर समन्वय और सहयोग को मजबूत करना है. चार्टर के तहत मल्टीकरेंसी क्लियरिंग, CBDC इंटरऑपरेबिलिटी और रियलवर्ल्ड एसेट टोकनाइजेशन जैसे क्षेत्रों पर काम करने की बात कही गई. यानी भविष्य में सोने, तेल और अन्य वास्तविक परिसंपत्तियों को डिजिटल टोकन के रूप में इस्तेमाल करने से लेकर अलगअलग देशों की डिजिटल करेंसी और भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने तक की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है.
UPI और Pix की कनेक्टिविटी से बदल सकता है CrossBorder Payment
समिट में भारत के UPI और ब्राजील के Pix जैसे फास्टपेमेंट नेटवर्क को CBDC के साथ इंटरऑपरेबल बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. अगर अलगअलग देशों के राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क आपस में प्रभावी तरीके से जुड़ते हैं, तो इससे सीमा पार भुगतान और व्यापारिक लेनदेन को तेज और कम लागत वाला बनाने में मदद मिल सकती है. DART Charter में संयुक्त राष्ट्र के SDG 10.c लक्ष्य के अनुरूप सीमा पार धन हस्तांतरण की लागत को 3 प्रतिशत से नीचे लाने की प्रतिबद्धता भी जताई गई.
डॉलर से परे पेमेंट सिस्टम की दिशा में कदम
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने की चर्चा पिछले कुछ वर्षों से तेज हुई है. ऐसे में तेज भुगतान नेटवर्क, मल्टीकरेंसी क्लियरिंग और CBDC इंटरऑपरेबिलिटी का संयोजन भविष्य में गैरडॉलर आधारित सेटलमेंट को आसान बना सकता है. हालांकि, इसे तत्काल डॉलर की जगह लेने वाली व्यवस्था के रूप में देखना जल्दबाजी होगी. इसके लिए देशों के बीच तकनीकी मानकों, नियामकीय व्यवस्था, मुद्रा परिवर्तनीयता और वित्तीय स्थिरता जैसे कई मुद्दों पर व्यापक सहमति जरूरी होगी.
Sovereign Capital को Bankable Projects से जोड़ने पर जोर
iBRICS Summit का एक महत्वपूर्ण फोकस यह भी रहा कि विशाल Sovereign Capital को सीधे bankable projects से कैसे जोड़ा जाए. iBRICS के कोचेयर दुष्यंत खन्ना ने कहा कि समिट ने Sovereign Capital और वास्तविक परियोजनाओं के बीच एक पुल बनाने का काम किया है. महाराष्ट्र के वित्त एवं नियोजन राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने भी Sovereign Wealth Funds से निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार की नीतियों और रोडमैप का उल्लेख किया. उनका लक्ष्य महाराष्ट्र को ऐसे वैश्विक निवेश के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करना है.
ग्लोबल साउथ क्यों बन रहा है निवेश का नया केंद्र?
समिट में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने BRICS Plus की बढ़ती आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत को रेखांकित किया. BRICS Plus देशों के पास वैश्विक GDP और दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा है. ऐसे में आने वाले वर्षों में वैश्विक निवेश का एक बड़ा हिस्सा ग्लोबल साउथ और उभरते बाजारों की ओर जाने की संभावना है. भारत, ब्राजील, पश्चिम एशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों में इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, डिजिटल इकोनॉमी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में Sovereign Capital की भूमिका आने वाले समय में और बढ़ सकती है.
250 Principals ने साइन किया Sovereign Capital Compact
समिट के पहले दिन करीब 250 Principals ने The Sovereign Capital Compact पर हस्ताक्षर किए. इसका उद्देश्य रणनीतिक निवेश प्रतिबद्धताओं और Sovereign Capital के सहयोग को मजबूत करना था. समिट में जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल, लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, मेदांता के CIO राजीव सिक्का, राजशेखर जोशी और कॉर्पोरेट लीडर सुनीता बजाज सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया. नवीन जिंदल को SWFI की ओर से ‘Good Fellow Award’ से भी सम्मानित किया गया.
क्या iBRICS बनेगा Global South के Financial Architecture का आधार?
iBRICS Summit 2026 का सबसे बड़ा संदेश है—पूंजी, तकनीक और भुगतान प्रणालियों को एक साझा ग्लोबल साउथ फ्रेमवर्क में जोड़ने की कोशिश. SWFI चेयरमैन लक्ष्मी नारायणन के नेतृत्व में सामने आया DART Charter अगर अपने लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में सफल होता है, तो यह सिर्फ एक निवेश पहल नहीं रहेगा. यह Sovereign Wealth, Digital Assets, CBDCs और CrossBorder Payments के बीच एक नया संस्थागत ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.
आखिरकार, 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की Sovereign Wealth को अगर passive investment से strategic economic capital में बदला जाता है, तो इसका असर सिर्फ निवेश बाजार पर नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की आर्थिक ताकत और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के संतुलन पर भी पड़ सकता है. इसी मायने में दिल्ली का iBRICS Summit 2026 महज दो दिनों का निवेश सम्मेलन नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के बदलते वित्तीय भविष्य का एक महत्वपूर्ण संकेत बनकर सामने आया है.