IndiaEU FTA: यूरोपीय बाजार अब भारतीय कारों के लिए पूरी तरह से तैयार हो रहा है. भारतयूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का ड्राफ्ट सामने आ गया है. इसके लागू होने के बाद हर साल लाखों की संख्या में ‘मेड इन इंडिया’ गाड़ियां यूरोप की सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी. इस समझौते पर इसी साल 27 जनवरी को सहमति बनी थी. उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. अगले साल से ये डील पूरी तरह लागू हो सकती है.

रियायती ड्यूटी का पूरा गणित
यूरोपीय संघ के ड्राफ्ट के मुताबिक हर साल 2.5 लाख भारतीय कारों को उनके बाजार में एंट्री मिलेगी. शुरुआत में इन कारों पर सिर्फ 8 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी. ये छूट उन पेट्रोलडीजल के अलावा हाइब्रिड कारों पर मिलेगी, जिनकी कीमत 50,000 यूरो तक है. इसमें कार की कीमत, शिपिंग का खर्च बीमा शामिल होता है. डील लागू होने के दूसरे साल में ये ड्यूटी घटकर 6 प्रतिशत हो जाएगी. तीसरे साल में 4 प्रतिशत, चौथे साल में 2 प्रतिशत पांचवें साल में टैक्स पूरी तरह जीरो हो जाएगा. 10वें साल तक कारों का ये सालाना कोटा बढ़ाकर 4 लाख कर दिया जाएगा. अगर निर्यात इस कोटे से ज्यादा होता है, तो फिर मोस्ट फेवर्ड नेशन के तहत टैक्स चुकाना होगा.
लग्जरी गाड़ियों पर टैक्स की स्थिति
अगर कोई गाड़ी 50,000 यूरो से ज्यादा की है, तो उस पर कोटे वाली कोई छूट नहीं मिलेगी. लेकिन इन महंगी कारों पर भी लंबी अवधि में राहत दी गई है. पहले साल इन पर 8 प्रतिशत ड्यूटी लगेगी. 10वें साल में जाकर ये टैक्स घटकर जीरो हो जाएगा. इससे साफ है कि महंगी भारतीय गाड़ियों के लिए भी यूरोप का रास्ता धीरेधीरे आसान होने वाला है.
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई व्यवस्था
बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों प्लगइन हाइब्रिड के लिए यूरोपीय संघ ने एक अलग कोटा सिस्टम बनाया है. 40,000 यूरो तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5वें साल से छूट मिलनी शुरू होगी. तब 8 प्रतिशत ड्यूटी के साथ 27,500 गाड़ियों को एंट्री मिलेगी. 14वें साल तक ये कोटा 1.25 लाख गाड़ियों का हो जाएगा. वहीं 40,000 से 60,000 यूरो वाली ईवी के लिए 5वें साल में 16,250 का कोटा तय किया गया है. इससे भी महंगी यानी 60,000 यूरो से ऊपर की इलेक्ट्रिक कारों के लिए 5वें साल में 6,250 गाड़ियों का कोटा रखा गया है. 9वें साल से इन कैटेगरी पर भी ड्यूटी हटा ली जाएगी.
कृषि उत्पादों को मिला बड़ा बाजार
ये डील सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर तक सीमित नहीं है. भारतीय किसानों के साथ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को भी इसका सीधा लाभ मिलने वाला है. समझौते के ड्राफ्ट में भारतीय अंगूर, सूखे प्याज, खीरे, गुड़ से बनी रम घी जैसे कृषि उत्पादों पर भी रियायत दी गई है. खासतौर पर घी के लिए यूरोपीय संघ हर साल 1,000 मीट्रिक टन का कोटा दे रहा है. इस कोटे के तहत कस्टम ड्यूटी के बेस रेट पर 50 प्रतिशत तक की बड़ी छूट मिलेगी. इससे भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग यूरोप में तेजी से बढ़ेगी.
इस समझौते से भारत का विदेशी व्यापार नई ऊंचाइयों को छू सकता है. जब बिना किसी भारी टैक्स के भारतीय उत्पाद यूरोप पहुंचेंगे, तो वहां के बाजारों में हमारी हिस्सेदारी काफी बढ़ जाएगी. फिलहाल ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ किसानों को अब बस इस डील के आधिकारिक रूप से लागू होने का इंतजार है.