भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पीएम मोदी से मिले. पीएम ने उन्हें तमिल संत तिरुवल्लुवर की किताब तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया. किताब भेंट करते हुए पीएम मोदी ने कहा, यह किताब दोनों देशों के सांस्कृतिक सम्बंधों को बढ़ाने में मदद करेगी. किताब में संत तिरुवल्लुवर ने मानव की कई विशेषताओं का जिक्र किया है.

संत तिरुवल्लुवर कब पैदा हुए इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं है, लेकिन उनका जन्म ईसा पूर्व 30 से 200 सालों के बीच माना जाता है. लोकमान्यताओं के मुताबिक उनका जन्म मलयापुर के जुलाहा परिवार में हुआ था, जो वर्तमान में चेन्नई का हिस्सा है. उनकी कविताओं को तिरुक्कुरल में संकलित किया गया.
तिरुक्कुरल को तमिल वेद भी कहते हैं
तमिल संत तिरुवल्लुवर को दक्षिण का कबीर कहा जाता है क्योंकि उन्होंने भी दोहों के जरिए लोगों को कल्याण का रास्ता दिखाते हुए छोटीछोटी कविताएं लिखीं. इन्हीं कविताओं का संग्रह है तिरुक्कुरल. कविताओं का मर्म है कि इंसान का मन से पवित्र होना भी सबसे श्रेष्ठ धर्म है. यही वजह है कि संसद में कई बार पीएम मोदी से लेकर सांसदों तक ने अपने भाषणों में संत तिरुवल्लुवर की कविताएं पढ़ीं.इसे तमिल संस्कृति में लगभग वेद जैसा दर्जा हासिल है यही वजह है कि एक बड़ा तबका इसे तमिल वेद भी कहता है.
तिरुक्कुरल तीन बड़े हिस्सों में बंटी है.
तिरुक्कुरल में क्याक्या लिखा है?
तिरुक्कुरल में कुल 1330 दोहे हैं. इन्हें 133 अध्यायों में बांटा गया है. हर अध्याय में 1010 दोहे हैं. इसकी खासियत यह है कि हर दोहा सिर्फ दो पंक्तियों का होता है, लेकिन उसमें गहरा जीवन दर्शन है. पूरी किताब तीन बड़े हिस्सों में बंटी है
- अरम यह हिस्सा अच्छे आचरण, सदाचार, सच्चाई, दया, अहिंसा, कृतज्ञता और पारिवारिक व सामाजिक जीवन में नैतिकता की बात करता है. इस हिस्से में बताया गया है कि एक अच्छा इंसान कैसे जिए, मातापिता का सम्मान कैसे करे, मेहमाननवाजी क्यों ज़रूरी है और क्रोध व ईर्ष्या से कैसे बचें.
- पोरुल यह किताब सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसमें राजा और शासन कैसा होना चाहिए, मंत्रियों के गुण, कूटनीति, सेना, न्याय व्यवस्था, धनअर्जन और मित्रता जैसे व्यावहारिक विषयों पर बात की गई है. इसे आज भी नेतृत्व और प्रशासन पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका माना जाता है.
- इनबम/कामम इस हिस्से में प्रेम, दांपत्य जीवन और वैवाहिक रिश्तों की भावनात्मक बारीकियों को काव्यात्मक ढंग से बताया गया है जैसे प्रेमियों का विरह, मिलन, ईर्ष्या और आपसी समझ.
पीएम ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया.
यह किताब क्यों है खास?
- यह किसी एक धर्म विशेष की किताब नहीं है. इसमें हिंदू, जैन, बौद्ध सभी परंपराओं के विचार झलकते हैं, इसीलिए हर धर्म के लोग इसे अपना मानते हैं.
- इसकी शिक्षाएं व्यावहारिकहैं. जैसे ईमानदारी, मेहनत, आत्मसंयम और करुणा की बात, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है.
- महात्मा गांधी सहित कई विचारकों ने इससे प्रभावित होने की बात कही है. इसका दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है.
- तमिलनाडु में हर साल इसके नाम पर उत्सव और आयोजन होते हैं. चेन्नई में तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है.