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पेप्सिको का भारत पर बड़ा दांव, 2030 तक देश में करेगा 5700 करोड़ का भारी-भरकम निवेश​

भारत का एफएमसीजी मार्केट तेजी से बदल रहा है. ग्लोबल फूड बेवरेज कंपनी पेप्सिको ने अब भारत को लेकर अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं. कंपनी के इंडिया साउथ एशिया सीईओ जागृत कोटेचा ने स्पष्ट किया है कि आने वाले कुछ सालों में भारत पेप्सिको के टॉप 10 ग्लोबल मार्केट की लिस्ट में […]

भारत का एफएमसीजी मार्केट तेजी से बदल रहा है. ग्लोबल फूड बेवरेज कंपनी पेप्सिको ने अब भारत को लेकर अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं. कंपनी के इंडिया साउथ एशिया सीईओ जागृत कोटेचा ने स्पष्ट किया है कि आने वाले कुछ सालों में भारत पेप्सिको के टॉप 10 ग्लोबल मार्केट की लिस्ट में शामिल हो जाएगा. इसके लिए कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर पूरा फोकस लगा दिया है.

निवेश का मेगा प्लान

पेप्सिको इंडिया देश की बढ़ती खपत का पूरा फायदा उठाना चाहती है. इसके लिए कंपनी ने 2030 तक करीब 5,700 करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया है. इसी कड़ी में गुरुवार को असम के नलबाड़ी में पेप्सिको ने अपना पांचवां मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू कर दिया. इस प्लांट पर 778 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. कंपनी का दायरा सिर्फ नॉर्थ या ईस्ट तक सीमित नहीं है. इससे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी एक नया कंसंट्रेट प्लांट खोला गया था. अब दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में भी एक नया प्लांट लगाया जा रहा है.

क्षेत्रीय स्वाद पर कंपनी की नजर

पेप्सिको अब पूरे देश में एक ही तरह का प्रोडक्ट बेचने की रणनीति पर काम नहीं कर रही है. कंपनी का प्लान भारत की विविधता को भुनाने का है. सीईओ जागृत कोटेचा ने बताया कि कंपनी अब क्षेत्रीय स्वाद के हिसाब से अपने प्रोडक्ट उतारेगी. पेप्सिको देश को 7 या 9 अलगअलग जियोग्राफी में बांटकर उनके स्वाद के मुताबिक काम करेगी. उनका सीधा फंडा है भारत में बने, भारत के लिए बने, भारतीयों द्वारा बने. कंपनी का मुख्य फोकस पूरी तरह से घरेलू बाजार पर है. हालांकि भूटान, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में थोड़ा बहुत निर्यात जारी रहेगा.

किसानों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

असम का नया प्लांट रोजगार के लिहाज से भी गेमचेंजर साबित होने वाला है. 44.2 एकड़ में फैले इस प्लांट से 700 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा. इसके अलावा स्थानीय एमएसएमई सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा. सबसे बड़ा फायदा इलाके के किसानों को होने वाला है. पेप्सिको को चिप्स बनाने के लिए खास तरह के आलू चाहिए होते हैं. इससे आने वाले सालों में 5,000 से ज्यादा किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा. साथ ही 60,000 टन कोल्ड स्टोरेज क्षमता की नई डिमांड भी पैदा होगी, जिससे कृषि इकोसिस्टम मजबूत होगा.

टॉप 10 मार्केट का लक्ष्य

फिलहाल भारत पेप्सिको के टॉप 13 एंकर बाजारों में आता है. भारत में पैकेज्ड फूड की प्रति व्यक्ति खपत अभी भी दुनिया के कई देशों के मुकाबले काफी कम है. इसी गैप को पेप्सिको एक बड़े मौके के तौर पर देख रही है. साल 2025 में पेप्सिको इंडिया का टर्नओवर 9,789 करोड़ रुपये रहा था. वहीं कंपनी के बॉटलिंग पार्टनर वरुण बेवरेजेज का रेवेन्यू 15,070.7 करोड़ रुपये रहा. इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में कंपनी का बेस काफी मजबूत हो चुका है. अब 5700 करोड़ के नए निवेश से कंपनी अपने टॉप 10 के विजन को जल्द हकीकत में बदलने की तैयारी कर रही है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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