Kala Hiran Film Controversy : Salman Khan) से जुड़े विवाद पर बनी फिल्म : द बैटल फॉर लिगेसी’ एक बार फिर कानूनी पेंच में फंस गई है। फिल्म की रिलीज को लेकर में सुनवाई हुई, जहां जज ने मेकर्स से सीधे सवाल किया कि फिल्म कब रिलीज की जा रही है।

मेकर्स की ओर से पेश वकील ने कहा कि रिलीज को लेकर उन्हें निर्देश लेने होंगे। वहीं, कोर्ट को बताया गया कि फिल्म फिलहाल रिलीज के लिए तैयार स्थिति में नहीं है। फिल्म को अभी सर्टिफिकेशन के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास भेजा जाना बाकी है। इतना ही नहीं, इसका ट्रेलर भी अभी जारी नहीं हुआ है। कोर्ट के आदेश में भी दर्ज किया गया कि फिल्म फिलहाल रिलीज की स्थिति में नहीं है और साथ ही सेंसर बोर्ड से प्रमाणित होना बाकी है।
OTT रिलीज पर भी कोर्ट की नजर
सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से पेश वकील ने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए सेंसर सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। इसके बाद कोर्ट ने OTT रिलीज को भी अपने आदेश के दायरे में शामिल कर लिया। अब फिल्म के मेकर्स को दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करना है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। यानी फिलहाल यह साफ नहीं है कि ‘काला हिरण’ सिनेमाघरों में रिलीज होगी, OTT पर आएगी या इसकी रिलीज पर कानूनी अड़चन बनी रहेगी।
आखिर सलमान खान को फिल्म से क्या आपत्ति है?
इस पूरे विवाद की जड़ 1998 के काला हिरण शिकार मामले से जुड़ी है। फिल्म का नाम और इसके प्रमोशनल मटीरियल को लेकर सलमान खान की टीम ने आपत्ति जताई है। सलमान खान ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए फिल्म की रिलीज, प्रमोशन और इससे जुड़े दूसरे कामों पर रोक लगाने की मांग की थी। उनकी याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में उनकी पहचान और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स प्रभावित हो सकते हैं।
सलमान की टीम ने फिल्म के पोस्टर और प्रमोशनल मटीरियल में दिखाए गए किरदार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि किरदार की शक्लसूरत और दूसरी पहचान वाली चीजें दर्शकों को सीधे सलमान खान की याद दिलाती हैं।
1998 का काला हिरण केस फिर क्यों चर्चा में?
साल 1998 में फिल्म ‘हम साथसाथ हैं’ की शूटिंग के दौरान राजस्थान में काले हिरण के शिकार का मामला सामने आया था। इस केस के बाद सलमान खान को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ा। अब ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ को इसी विवाद से प्रेरित बताया जा रहा है। फिल्म की कहानी में काले हिरण मामले के साथ कोर्टरूम ड्रामा और उससे जुड़े विवादों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। फिल्म को लेकर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े एंगल की चर्चा भी हुई है। यही वजह है कि सलमान खान की ओर से फिल्म की कहानी और प्रमोशनल कंटेंट को लेकर लगातार आपत्ति जताई जा रही है।
पहले भी मेकर्स को कोर्ट से लग चुका है झटका
फिल्म को लेकर यह पहली कानूनी लड़ाई नहीं है। जून में सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को नोटिस जारी किया था। इसके बाद फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट को लेकर भी कोर्ट का रुख सख्त रहा। जुलाई में हाई कोर्ट ने ‘काला हिरण’ के टीजर से जुड़े कुछ सोशल मीडिया लिंक और प्रोड्यूसर अमित जानी के कुछ इंटरव्यू हटाने का निर्देश दिया था। इससे साफ है कि विवाद अब सिर्फ फिल्म की रिलीज तक सीमित नहीं है। पोस्टर, टीजर और प्रमोशन से जुड़े कंटेंट पर भी कानूनी नजर बनी हुई है।
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अमित जानी भी पीछे हटने को तैयार नहीं
फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी की ओर से भी लगातार अपना पक्ष रखा गया है। मेकर्स का कहना है कि फिल्म एक वास्तविक विवाद से प्रेरित कहानी है और इसे सीधे तौर पर सलमान खान की बायोपिक नहीं माना जाना चाहिए। विवाद बढ़ने के बाद जानी ने दिल्ली हाई कोर्ट के कुछ आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी। यानी एक तरफ सलमान खान अपनी पहचान और प्रतिष्ठा को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फिल्म के मेकर्स भी अपने प्रोजेक्ट को रिलीज कराने की कोशिश में जुटे हैं।
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अब 30 सितंबर को क्या होगा?
ताजा सुनवाई के बाद फिलहाल अगली नजर 30 सितंबर पर है। मेकर्स को दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करना है। खास बात यह है कि फिल्म अभी सेंसर सर्टिफिकेशन के चरण तक भी नहीं पहुंची है। ऐसे में अभी यह कहना मुश्किल है कि ‘काला हिरण’ कब और किस प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। फिल्म का विवाद एक तरफ 1998 के काला हिरण मामले से जुड़ा है, तो दूसरी तरफ सलमान खान की पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर कानूनी आपत्ति है। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई में कोर्ट इस मामले को किस दिशा में ले जाता है और फिल्म की रिलीज को लेकर क्या तस्वीर सामने आती है।
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