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क्या शेयर बाजार में आएगा Tata Sons का IPO? आरबीआई के नए अपडेट के बाद भी सस्पेंस बरकरार​

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा नॉनबैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए स्केलबेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू करने के लगभग पांच साल बाद भी, टाटा संस की लिस्टिंग का सवाल अनसुलझा है. गुरुवार को जारी 202627 के लिए अपरलेयर NBFCs की लिस्ट में सेंट्रल बैंक ने टाटा संस को लिस्टिंग की ज़रूरत वाली कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर […]

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा नॉनबैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए स्केलबेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू करने के लगभग पांच साल बाद भी, टाटा संस की लिस्टिंग का सवाल अनसुलझा है. गुरुवार को जारी 202627 के लिए अपरलेयर NBFCs की लिस्ट में सेंट्रल बैंक ने टाटा संस को लिस्टिंग की ज़रूरत वाली कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर तो रखा है, लेकिन एक फुटनोट ने मामले को असल में वहीं पहुंचा दिया है जहां से यह शुरू हुआ था.

RBI ने कहा कि टाटा संस को लिस्ट में शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि डीरजिस्ट्रेशन के लिए उसकी अर्जी के नतीजे पर कोई असर पड़ेगा. यह अर्जी अभी भी जांच के दायरे में है. इसका मतलब है कि आरबीआई का अभी भी वही रुख बना हुआ है जो उसने जनवरी 2025 में पिछली लिस्ट जारी करते समय अपनाया था.

इसलिए, टाटा संस लिस्टिंग से बच पाएगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI उसे अपना CIC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की इजाजत देता है या नहीं. इस फ्रेमवर्क के तहत, अपर लेयर में रखी गई NBFC कम से कम पांच साल तक कड़े रेगुलेटरी नियमों के दायरे में रहती है, भले ही बाद के सालों में वह क्लासिफिकेशन के क्राइटेरिया को पूरा न करे.

CIC एक ऐसी NBFC है जिसका मुख्य काम ग्रुप कंपनियों में निवेश करना है. नियमों के मुताबिक, उसे अपनी नेट एसेट्स का कम से कम 90 फीसदी हिस्सा इन कंपनियों के इक्विटी शेयरों, प्रेफरेंस शेयरों, बॉन्ड, डिबेंचर, डेट या लोन में रखना होता है.

रजिस्ट्रेशन सरेंडर अर्जी पेंडिंग

यह फ्रेश लिस्ट RBI के अपरलेयर NBFCs की पहचान करने वाले संशोधित, सिद्धांतबेस्ड फ्रेमवर्क के तहत तैयार की गई है. यह ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया पर आधारित है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की एसेट लिमिट भी शामिल है. टाटा संस संशोधित नियमों के तहत भी योग्य बनी हुई है, जबकि NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की उसकी अर्जी अभी भी पेंडिंग है. कानूनी जानकारों का कहना है कि RBI के स्पष्टीकरण का मतलब है कि टाटा संस को लिस्ट में शामिल करने का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि लिस्टिंग का सवाल अपनेआप सुलझ गया है. इसके बजाय, यह रेगुलेटर को पेंडिंग डीरजिस्ट्रेशन अर्जी पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेने की क्षमता बनाए रखता है.

‘वेट एंड वॉच’ स्टेटस

सुप्रीम कोर्ट के वकील एचपी रनिना ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा कि RBI ने टाटा संस को अपरलेयर NBFCs की लिस्ट में बनाए रखा है, लेकिन इस शर्त के साथ कि कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर डीरजिस्टर करने की उसकी अर्जी की जांच चल रही है. इससे यह स्थिति ‘वेट एंड वॉच’ वाली बन गई है, जब तक कि RBI कोई फैसला नहीं ले लेता. सुप्रीम कोर्ट के वकील तुषार कुमार ने कहा कि RBI का “बिना किसी पूर्वाग्रह के” वाक्यांश का इस्तेमाल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रेगुलेटर का अधिकार सुरक्षित रहता है. उन्होंने आगे कहा कि इससे यह भी पता चलता है कि संशोधित सूची में टाटा संस को शामिल करने का उसकी अर्जी की जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

आरबीआई को लेना होगा जल्द फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील यश जोगलेकर ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि इसलिए, यह मान लेना उचित होगा कि रेगुलेटरी प्रोसेस अभी चल रही है और लिस्टिंग का मामला अभी पूरी तरह से तय नहीं हुआ है. जानकारों का कहना है कि जब तक डीरजिस्ट्रेशन का प्रोसेस पूरा नहीं हो जाता, तब तक टाटा संस की लिस्टिंग की बाध्यता पर कोई भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.

प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इनगवर्न के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीधर सुब्रमण्यन ने एफई की रिपोर्ट में कहा कि RBI को टाटा संस की लंबित अर्जी पर जल्द ही कोई फैसला लेना होगा. अगर अर्जी मंजूर हो जाती है, तो टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी प्राइवेट बनी रह सकती है. अगर इसे खारिज कर दिया जाता है, तो टाटा संस को लिस्ट होना पड़ सकता है. लिस्टिंग की पिछली समयसीमा 30 सितंबर, 2025 को खत्म हो गई थी.

टाटा संस के पास खुला है कोर्ट का रास्ता

ज्यूरिस कॉर्प के पार्टनर सौरभ शर्मा ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि अगर RBI टाटा संस का NBFC के तौर पर डीरजिस्ट्रेशन नहीं करता है, तो कंपनी के पास कई कानूनी रास्ते अपनाने का विकल्प है, जिसमें संबंधित हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करना भी शामिल है. हालांकि, रनिना ने कहा कि टाटा संस रिट याचिका के जरिए हाई कोर्ट जा सकती है, लेकिन कोर्ट ऐसे मामलों में शायद ही दखल देते हैं, इसलिए इससे बहुत कुछ हासिल होने की उम्मीद कम है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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