गुरुवार, 6 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
Lock Upp Season 2 | विनर बनने से पहले जूरी राउंड में घिरीं थी Shreya Kalra, अवेज दरबार ने गेमप्ले पर उठाए तीखे सवाल​ | असम में रेड, केरल में ऑरेंज, कैसे तय होते हैं बारिश के रंगों वाले अलर्ट, क्या है मतलब?​ | AI के डर से लोग बेच रहे थे शेयर, LIC ने मौका देखकर खरीदे और 35 दिन में बना लिए 21,000 करोड़!​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

Gold Market का पावरहाउस बनेगा GenZ! 315 लाख करोड़ के खुल सकते हैं रास्ते​

देश का युवा वर्ग जिसे मौजूदा समय में GenZ के नाम से संबोधित किया जा रहा है, वो रोज नए इतिहास रचने को तैयार है. देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर का नजारा पूरी दुनिया ने देखा है. मौजूदा समय में देश के शेयर बाजार में इस जेनरेशन की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी हो […]

देश का युवा वर्ग जिसे मौजूदा समय में GenZ के नाम से संबोधित किया जा रहा है, वो रोज नए इतिहास रचने को तैयार है. देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर का नजारा पूरी दुनिया ने देखा है. मौजूदा समय में देश के शेयर बाजार में इस जेनरेशन की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी हो चुकी है. इसका मतलब है कि GenZ के कंधों पर स्टॉक मार्केट का भार साफ देखने को मिल रहा है. अब बारी गोल्ड मार्केट की है. पारंपरिक रूप से भारत में सोना खरीदना शादीब्याह, त्यौहारों या बुजुर्गों की बचत से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब देश की नई पीढ़ी यानी Gen Z इस धारणा को पूरी तरह बदल रही है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, युवाओं का डिजिटलफर्स्ट नजरिया और बदलता लाइफस्टाइल भारत के ₹315 लाख करोड़ के विशाल गोल्ड मार्केट में खपत और निवेश की नई क्रांति लाने के लिए तैयार है. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

खुल सकता है 315 लाख करोड़ का मार्केट

हो सकता है कि भारत में सोने की अगली बड़ी लहर ज्वेलरी की दुकानों से नहीं, बल्कि स्मार्टफोन से शुरू हो. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मंगलवार को जारी ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल रूप से जागरूक ‘GenZ’ के सबसे तेजी से बढ़ते कंज्यूमर ग्रुप के तौर पर उभरने के साथ ही, देश के पास अपने गोल्ड इकोसिस्टम को आधुनिक बनाने और घरों में रखे लगभग 31,000 टन बेकार पड़े सोने की आर्थिक क्षमता को अनलॉक करने का एक शानदार मौका है.

रिपोर्ट के मुताबिक, GenZ सोने को सिर्फ पुश्तैनी गहनों के तौर पर नहीं, बल्कि एक फ्लेक्सीबल फाइनेंशियल एसेट के तौर पर देखते हैं. इससे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी पर बेस्ड दूसरे इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में उनकी दिलचस्पी बढ़ रही है. उम्मीद है कि 2035 तक यह ग्रुप कंज्यूमर खर्च में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि GenZ मालिकाना हक की पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर देश के गोल्ड मार्केट को तेजी से बदल रहा है.

पिछली जेनरेशंस के विपरीत, युवा कंज्यूमर फैसिलिटी, लिक्विडिटी, पर्सनलाइजेशन और जिम्मेदार सोर्सिंग पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. उनकी खरीदारी के प्रोसेस में ऑनलाइन सर्च और ऑफलाइन खरीदारी का मेल बढ़ रहा है, जबकि इन्वेस्टमेंट के विकल्प भी फिजिकल ज्वेलरी से आगे बढ़कर डिजिटल गोल्ड और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तक फैल रहे हैं.

घरों में 31 हजार टन सोना

रिपोर्ट के अनुसार, पीढ़ी में आए इस बदलाव के लिए गोल्ड इकोसिस्टम को मुख्य रूप से कंजम्पशनबेस्ड मॉडल से बदलकर ऐसा मॉडल अपनाना होगा जिसमें ज्वेलरी, टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स का तालमेल हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा बदलाव न सिर्फ युवा कंज्यूमर्स के बीच रेलेवेंट बने रहने के लिए जरूरी है, बल्कि इकोनॉमी में सोने के व्यापक योगदान को अनलॉक करने के लिए भी अहम है.

भारत में घरों में जमा भारी मात्रा में सोना सबसे बड़ा मौका है. रिपोर्ट का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 31,000 टन से ज्यादा सोना है, जिसकी कीमत लगभग 314.9 लाख करोड़ रुपए है. यह देश की सबसे बड़ी, लेकिन कम इस्तेमाल होने वाली फाइनेंशियल एसेट्स में से एक है. अगर इस सोने का एक छोटा सा हिस्सा भी इस्तेमाल में लाया जाए, तो फाइनेंशियल मार्केट मजबूत हो सकते हैं, लिक्विडिटी बढ़ सकती है, कैपिटल फ़ॉर्मेशन बेहतर हो सकता है और इम्पोर्टेड बुलियन पर निर्भरता कम हो सकती है.

4.5 लाख करोड़ का ज्वेलरी मार्केट

ऐसा करने के लिए, रिपोर्ट ने एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाने का सुझाव दिया है जो गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रीसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट, डिजिटल गोल्ड, बुलियन बैंकिंग और गोल्डबैक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को आपस में जोड़े. इस तरह के तालमेल से सोना आसानी से फिजिकल और फाइनेंशियल मार्केट के बीच आजा सकेगा, जिससे घरों में बेकार पड़ी एसेट्स प्रोडक्टिव कैपिटल में बदल जाएंगी.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत का गोल्ड ज्वैलरी मार्केट, जिसकी कीमत 2025 में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपए होगी, एक अहम मोड़ पर है. हालांकि खरीदारी के फैसलों में परंपरा और भरोसा अब भी अहम हैं, लेकिन डिजिटल अपनाने की बढ़ती दर, ऑर्गनाइज्ड रिटेल, अनिवार्य हॉलमार्किंग और ग्राहकों की बदलती उम्मीदें मांग को नया रूप दे रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, युवा खरीदारों को आकर्षित करने के लिए ज्वैलर्स को डिजाइन इनोवेशन, कस्टमाइजेशन और ओमनीचैनल रिटेल अनुभव पर ज़्यादा ध्यान देना होगा.

कम हो सकता है इंपोर्ट पर निर्भरता

रिपोर्ट में भारत के गोल्ड इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ज़रूरी पांच स्तंभों में से एक के तौर पर ‘फाइनेंशियलइजेशन’ की पहचान की गई है. इसके साथ ही घरेलू माइनिंग को बढ़ावा देना, ज्वेलरी एक्सपोर्ट बढ़ाना, आधुनिक ग्राहकों के लिए ज्वेलरी को नए नजरिए से देखना और सोने को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के तौर पर मान्यता देना भी शामिल है. इन उपायों से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, बाजार की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है और सोने को सिर्फ घरेलू संपत्ति के भंडार के बजाय भारत की लंबी अवधि की इकोनॉमिक ग्रोथ में एक मजबूत योगदानकर्ता के तौर पर स्थापित किया जा सकता है.

नेशनल गोल्ड बोर्ड का हो गठन

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत के रीजनल CEO सचिन जैन ने कहा कि इस रिपोर्ट की सि​फारिशों के केंद्र में ‘नेशनल गोल्ड बोर्ड’ का गठन है, जो गोल्ड वैल्यू चेन में पॉलिसी कोऑर्डिनेशन के लिए शीर्ष संस्था के तौर पर काम करेगा. इसके साथ ही, रिसर्च, टेक्नोलॉजी को अपनाने, डिजिटलाइज़ेशन, सस्टेनेबिलिटी और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक ‘गोल्ड इनोवेशन सेंटर’ बनाने की भी बात कही गई है. इन संस्थाओं को भारत के बिखरे हुए गोल्ड सेक्टर को एक आधुनिक और इनोवेशनआधारित इंडस्ट्री में बदलने के लिए उत्प्रेरक के तौर पर देखा जा रहा है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY