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सावन में नॉनवेज खाने की क्यों की जाती है मनाही, समझें पूरी साइंस, एक्सपर्ट ने बताया​

सावन के महीने को भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इस माह में अधिकतर लोग नॉनवेज जैसी चीजों को खाने से बचते हैं. इसके अलावा कुछ लोग लहसुनप्याज जैसी तामसिक चीजों को भी नहीं खाते हैं. नॉनवेज को सावन या मानसून में न खाना सांइटिफिकली सही माना जाता है. लेकिन […]

सावन के महीने को भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इस माह में अधिकतर लोग नॉनवेज जैसी चीजों को खाने से बचते हैं. इसके अलावा कुछ लोग लहसुनप्याज जैसी तामसिक चीजों को भी नहीं खाते हैं. नॉनवेज को सावन या मानसून में न खाना सांइटिफिकली सही माना जाता है. लेकिन बहुत कम लोग इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण जानते हैं. लोग ये मान लेते हैं कि नॉनवेज को खाना छोड़ना धार्मिक मान्यता है जबकि ये पूरा सच नहीं है. एक्सपर्ट बताते हैं कि नॉनवेज को खाने के पीछे मौसम, पाचन तंत्र और इंफेक्शन का गहरा कनेक्शन है.

आयुर्वेद कहता है कि बारिश में डाजेस्टिव फायर यानी जठराग्नि नॉर्मल से कमजोर हो जाती है. इसलिए इन दिनों में हमारी पाचन क्षमता कम होती है. मांसाहार चीजों को पचाने में समय लगता है और कमजोर पाचन होने वजह से दिक्कतें बढ़ सकती हैं. सावन में नॉनवेज न खाने की और कौनकौन की बड़ी वजह हैं चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं….

जान लें साइंटिफिक रीजन?

डायटिशियन पायल दत्त कहती हैं कि बहुत से लोगों को लगता है कि सावन में नॉन वेज नहीं खाना सिर्फ धर्म से जुड़ी बात है. लेकिन अगर इसे सेहत के नजरिए से देखें, तो इसके पीछे कुछ वजहें भी हैं. सावन का महीना बारिश का मौसम होता है. इस समय हवा में नमी बहुत ज्यादा रहती है. ऐसे में अगर मांस, चिकन या मछली को सही तरीके से रखा या पकाया न जाए, तो वो जल्दी खराब हो सकते हैं. इससे फूड पॉइजनिंग और पेट के इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

उन्होंने आगे बताया पहले के समय में फ्रिज जैसी सुविधा नहीं होती थी, इसलिए इस मौसम में नॉन वेज से परहेज करना बीमारियों से बचने का एक तरीका माना जाता था. बारिश के मौसम में हमारा पाचन भी थोड़ा धीमा हो सकता है.

इसलिए कई लोगों को नॉन वेज जैसी भारी चीजें पचाने में दिक्कत होती है. यही वजह है कि इस समय लोग हल्का और ताजा बना हुआ खाना खाना ज्यादा पसंद करते हैं. आयुर्वेद भी इस मौसम में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन खाने की सलाह देता है.

जीवों के प्रजनन का समय

एक्सपर्ट बताती हैं कि बारिश का मौसम कई जानवरों और पानी में रहने वाले जीवों के प्रजनन का समय होता है. इसलिए इस दौरान उनका शिकार या ज्यादा इस्तेमाल कम करना प्रकृति का संतुलन बनाए रखने का भी एक तरीका माना जाता था.

इन बातों का रखें खास ध्यान

हालांकि, ऐसी कोई मेडिकल सलाह नहीं है कि सावन में हर व्यक्ति को नॉन वेज बिल्कुल बंद कर देना चाहिए. अगर आप नॉन वेज खाते हैं, तो बस इतना ध्यान रखें कि वो ताजा हो, अच्छी तरह पका हुआ हो और साफ सफाई से बनाया गया हो. सेहत के लिए सबसे जरूरी बात ये है कि खाना सुरक्षित हो, सिर्फ ये नहीं कि वो वेज है या नॉन वेज.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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