शनिवार, 1 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
आज से बदल जाएंगे कई बड़े नियम: सस्ता हुआ कमर्शियल LPG, रेलवे, GST और बैंकिंग समेत इन 8 बदलावों का आपकी जेब पर असर​ | 40 लाख के बीमा के लिए पति बना हैवान… लव मैरिज के 2 साल बाद पत्नी की हत्या, एक्सीडेंट दिखाने के लिए शव पर चढ़ाई कार​ | Maruti Brezza vs Renault Kiger: 10 लाख के बजट में कौन-सी SUV है ज्यादा दमदार और वैल्यू फॉर मनी?​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

शेयर बाजार में बड़ा उलटफेर… विदेशी कंपनियों में मची तबाही, इधर रॉकेट बन गए TCS और इंफोसिस के स्टॉक!​

शेयर बाजार में बुधवार को एक गजब का नजारा दिखा. एक तरफ जहां दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में हाहाकार मचा है, वहीं दूसरी तरफ हमारी अपनी भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों ने तूफानी रफ्तार पकड़ ली. लगातार दूसरे दिन इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, विप्रो, कोफोर्ज और टेक […]

शेयर बाजार में बुधवार को एक गजब का नजारा दिखा. एक तरफ जहां दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में हाहाकार मचा है, वहीं दूसरी तरफ हमारी अपनी भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों ने तूफानी रफ्तार पकड़ ली. लगातार दूसरे दिन इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, विप्रो, कोफोर्ज और टेक महिंद्रा के शेयरों में 5 परसेंट तक की बंपर तेजी आई.

दरअसल, विदेशी निवेशकों को अब यह डर सताने लगा है कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां एआई पर जो अंधाधुंध पैसा लुटा रही हैं, उससे कोई कमाई होगी भी या नहीं. इस घबराहट में उन्होंने विदेशी बाजारों में शेयर बेचने शुरू कर दिए. लेकिन उनका ये डर, भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ा मौका बन गया.

भाव की बात करें तो टीसीएस का शेयर 3.2 परसेंट चढ़कर 2,476 रुपये और इंफोसिस 4.1 परसेंट भागकर 1,152 रुपये पर पहुंच गया. एचसीएल टेक और विप्रो में भी 2 परसेंट से ज्यादा की तेजी रही. छोटी और मझोली आईटी कंपनियों का हाल तो और भी शानदार रहा. अच्छे तिमाही नतीजों के बाद कोफोर्ज का शेयर 5 परसेंट और उछल गया. यह तेजी इसलिए भी खास है क्योंकि हाल तक भारतीय आईटी कंपनियां कम खर्च और एआई के खतरे जैसी कई मुश्किलों से जूझ रही थीं.

विदेशी निवेशकों का AI से उठ रहा भरोसा

विदेशी बाजारों के बड़े निवेशक अब एआई वाली कंपनियों को शक की नजर से देख रहे हैं. ‘जेनी मोंटगोमरी स्कॉट’ के मुख्य निवेश रणनीतिकार मार्क लुस्चिनी का कहना है कि अब लोग बिना सोचेसमझे एआई कंपनियों के शेयर बेच रहे हैं. अमेरिका के टेक शेयरों वाले बाजार ‘नैस्डैक 100’ में आई हालिया भारी गिरावट इसी घबराहट का नतीजा है.

ऊपर से चीन ने भी टेंशन बढ़ा दी है. चीन की एक कंपनी ने बाजार में आते ही 500 परसेंट की छलांग लगा दी. इसके अलावा खबर है कि चीन की एक सरकारी कंपनी ने खुद चिप बनाने वाली मशीनें बनानी शुरू कर दी हैं. बाजार के जानकारों को डर है कि चीन की कंपनियां अपना काम बढ़ाकर कोरियाई कंपनियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं.

एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली

एआई कंपनियों को लेकर मचे इस डर का असर एशिया के बाकी बाजारों पर भी साफ दिखा. दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार बुधवार को दिन के समय 12 परसेंट तक धड़ाम हो गया. वहां की बड़ी चिप कंपनी एसके हाइनिक्स का मुनाफा छह गुना बढ़ने के बावजूद उसका शेयर 14 परसेंट टूट गया, क्योंकि बाजार को इससे कुछ ज्यादा ही उम्मीदें थीं. सैमसंग के शेयर भी 10 परसेंट गिर गए. यही हाल जापान के शेयर बाजार का भी है, जहां गिरावट का दौर जारी है.

भारतीय IT शेयरों में शानदार वापसी की उम्मीद

विदेशी बाजारों की इस उठापटक के बीच भारत का शेयर बाजार एक सुरक्षित जगह बनकर उभर रहा है. जानीमानी ब्रोकरेज फर्म ‘जेफरीज’ की रिपोर्ट बताती है कि 50 से ज्यादा बड़े विदेशी निवेशक अब भारत की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं.

जेफरीज का मानना है कि विदेशी बाजारों में एआई को लेकर जो सुस्ती आई है, उससे भारतीय आईटी सेक्टर में वापसी का शानदार रास्ता खुल गया है. इस साल अब तक आईटी सेक्टर 25 परसेंट तक गिर चुका है और टीसीएसइंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियां अपने पुराने ऊंचे भाव से काफी नीचे मिल रही हैं. इसे देखते हुए जेफरीज ने अब आईटी शेयरों को लेकर अपना नजरिया बदला है और इंफोसिस व कोफोर्ज जैसे शेयरों को अपनी पसंद में शामिल किया है.

अमेरिकी फेड के फैसले पर टिकी नजरें

अब शेयर बाजार की नजरें अमेरिका के सेंट्रल बैंक की बैठक पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि इस बार तो ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी, लेकिन सितंबर में दरें बढ़ने की आशंका पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हो गई है.

अमेरिका में ब्याज दरों का सीधा असर हमारे आईटी शेयरों पर पड़ता है. अगर वहां दरें बढ़ती हैं, तो अमेरिकी कंपनियां अपना बजट कम कर सकती हैं, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों को नए काम मिलने में दिक्कत हो सकती है. वहीं, अगर डॉलर मजबूत होता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों की विदेशी कमाई रुपये में बढ़ जाती है, जिसका फायदा सीधे उनके मुनाफे में दिखता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY