ज्यादातर मामलों में बच्चों में मिर्गी की बीमारी एंटीसीज़र दवाओं से कंट्रोल हो जाती है. पर कुछ बच्चों में ठीक से दवा लेने के बावजूद दौरे आते रहते हैं. इस सिचुएशन को ड्रगरेजिस्टेंट एपिलेप्सी कहा जाता है. इसका असर केवल बच्चे की शारीरिक सेहत पर ही नहीं, बल्कि उसकी पढ़ाई, सोचनेसमझने की क्षमता और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है. इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी के अनुसार अगर दो सही एंटीसीज़र दवाओं के इस्तेमाल के बाद भी दौरे कंट्रोल न हों, तो इसे ड्रगरेजिस्टेंट एपिलेप्सी माना जाता है. मिर्गी से पीड़ित लगभग एकतिहाई मरीज इस समस्या का सामना करते हैं.

इस कंडीशन में पैनिक होने के बजाय अच्छे डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
किन संकेतों पर ध्यान दें?
डॉ. सूफी रूमी ने बताया कहती हैं कि मातापिता के लिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है. अगर बच्चा समय पर दवा लेने के बावजूद बारबार दौरे का शिकार हो रहा है, दौरे पहले से ज्यादा आने लगे हैं या उनका तरीका बदल गया है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. बारबार कुछ सेकंड तक एकटक देखते रहना, अचानक गिर जाना, शरीर में अनियंत्रित हरकतें होना, कुछ समय के लिए बेहोश हो जाना, बच्चे के विकास की गति धीमी पड़ना या दौरे के बाद लंबे समय तक सामान्य न हो पाना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि इलाज संभव नहीं है, बल्कि समय पर सही जांच की जरूरत है.
सही जांच क्यों है जरूरी?
इसके बाद सबसे जरूरी कदम किसी बेस्ट एपिलेप्सी सेंटर में ठीक से जांच करानी है. इसमें लंबे समय तक ईईजी मॉनिटरिंग, एपिलेप्सी प्रोटोकॉल एमआरआई , बच्चे के विकास संबंधी परीक्षण और जरूरत पड़ने पर जेनेटिक जांच की जाती है. इन जांचों से यह पता चलता है कि दौरे वास्तव में मिर्गी के कारण हैं या नहीं, उनका सोर्स क्या है और दवाओं के असर न करने की वजह क्या है. सही जांच से सही इलाज चुनने में आसानी होती है.
दवाओं के अलावा भी हैं इलाज
अगर नॉर्मल मेडिसिन से फायदा नहीं मिल रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि इलाज के सारे रास्ते बंद हो गए हैं. आज बच्चों में मिर्गी के इलाज के कई आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं. इनमें मिर्गी की सर्जरी, न्यूरो मॉड्यूलेशन टेक्निक और डॉक्टरों की निगरानी में दी जाने वाली कीटोजेनिक डाइट शामिल हैं. यह कोई सामान्य वजन घटाने वाली डाइट नहीं है, बल्कि एक चिकित्सीय आहार है, जिसमें वसा अधिक और कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में दिए जाते हैं. इसे हमेशा विशेषज्ञों की देखरेख में ही अपनाना चाहिए.
समय पर इलाज है सबसे जरूरी
सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे को समय रहते किसी विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंचाया जाए. बिना विशेषज्ञ जांच के बारबार दवाएं बदलते रहने से बेहतर इलाज के अवसर छूट सकते हैं. समय पर सही इलाज मिलने से बच्चे की पढ़ाई, मानसिक विकास और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है.
हालांकि, डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी दवा बंद न करें और न ही उसकी मात्रा में बदलाव करें. सही समय पर इलाज मिलने से ड्रगरेजिस्टेंट एपिलेप्सी से जूझ रहे बच्चे भी बेहतर और सामान्य जीवन जी सकते हैं.