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ट्रंप टैरिफ के बाद बैकफुट पर क्यों आया चीन, क्या अमेरिका को जवाब नहीं देगा ड्रैगन?​

अमेरिका और चीन एक बार फिर टैरिफ के मोर्चे पर आमनेसामने आए गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले कुछ उत्पादों पर 12.5% नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. हैरान करने वाली बात ये है कि भले ही अमेरिका के इस फैसले से चीन को करारा झटका लगा हो […]

अमेरिका और चीन एक बार फिर टैरिफ के मोर्चे पर आमनेसामने आए गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले कुछ उत्पादों पर 12.5% नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. हैरान करने वाली बात ये है कि भले ही अमेरिका के इस फैसले से चीन को करारा झटका लगा हो लेकिन वह इस बार अमेरिका पर जवाबी कार्रवाई करने से बच सकता है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से चीन जरूर नाराज होगा, लेकिन इस बार वह अमेरिका के खिलाफ बड़ी जवाबी कार्रवाई करने से बच सकता है.

ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को इन नए टैरिफ की घोषणा की थी. भारत समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इससे पहले पिछले महीने भी अमेरिका ने अपने 60 व्यापारिक साझेदार देशों के लिए नए टैरिफ का प्रस्ताव रखा था. अमेरिका का कहना है कि कई देशों ने जबरन मजदूरी जैसे मुद्दों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, इसलिए यह फैसला लिया गया है.

चीन पर कितना हुआ टैरिफ?

नए टैरिफ लागू होने के बाद चीन पर लगने वाला कुल प्रभावी अमेरिकी आयात शुल्क बढ़कर 22.2% हो जाएगा. यह पहले की तुलना में 1.4 प्रतिशत ज्यादा है. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे चीन पर दूसरे देशों की तुलना में थोड़ा ज्यादा आर्थिक दबाव पड़ेगा. ये नए टैरिफ उस 10% ग्लोबल टैरिफ की जगह लेंगे, जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो गई. हालांकि चीन ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के एकतरफा टैरिफ का विरोध करता है.

आखिर जवाब क्यों नहीं देगा चीन?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन फिलहाल जवाबी कार्रवाई से बच सकता है. इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के वरिष्ठ चीन विश्लेषक तियानचेन शू का कहना है कि चीन इस फैसले का विरोध जरूर करेगा, लेकिन इस बार बड़े पैमाने पर जवाबी टैरिफ लगाने की संभावना बहुत कम है. उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. इसी बीच खबर यह भी है कि चीन अमेरिका से यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी वार्ताओं में अमेरिका आखिर चाहता क्या है? दरअसल, ट्रंप प्रशासन चीन के तेजी से बढ़ते AI सेक्टर पर भी दबाव बढ़ा रहा है.

तनाव बढ़ा तो दुनिया पर होगा असर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के उप विदेश मंत्री मा झाओशू इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचे हैं. उनका उद्देश्य अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर यह समझना है कि AI वार्ता का दायरा क्या होगा और अमेरिका की आगे की रणनीति क्या है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और तकनीक को लेकर तनाव लगातार बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीकी उद्योग पर भी पड़ सकता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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