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Mutual Fund या PF? EPFO ने बताया किसे चुनना होगा फायदे का सौदा​

अगर आप नौकरीपेशा हैं और बेहतर रिटर्न के लिए अपने कर्मचारी भविष्य निधि का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाने की सोच रहे हैं, तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने साफ तौर पर सलाह दी है कि EPF और म्यूचुअल फंड को एकदूसरे का विकल्प नहीं समझना चाहिए. संगठन […]

अगर आप नौकरीपेशा हैं और बेहतर रिटर्न के लिए अपने कर्मचारी भविष्य निधि का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाने की सोच रहे हैं, तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने साफ तौर पर सलाह दी है कि EPF और म्यूचुअल फंड को एकदूसरे का विकल्प नहीं समझना चाहिए. संगठन का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग की नींव हमेशा EPF ही रहनी चाहिए, जबकि म्यूचुअल फंड को केवल अतिरिक्त निवेश विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए.

EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक जागरूकता संदेश साझा करते हुए लिखा, “समझदार को EPF काफी है.” इसके साथ संगठन ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें EPF और म्यूचुअल फंड के बीच का अंतर समझाया गया है.

EPF और म्यूचुअल फंड का उद्देश्य अलग

EPFO के मुताबिक, EPF एक वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है. इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़ा निवेश विकल्प है, जिसका मुख्य उद्देश्य लंबी अवधि में संपत्ति बनाना है. इसमें रिटर्न बाजार की चाल पर निर्भर करता है और इसमें उतारचढ़ाव का जोखिम भी रहता है.यही वजह है कि दोनों योजनाओं की तुलना करना या एक को दूसरे का विकल्प मानना सही नहीं है.

EPF में मिलता है डबल फायदा

EPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कर्मचारी के साथ नियोक्ता भी योगदान देता है. इससे समय के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होता है. दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में केवल निवेशक ही पैसा लगाता है.

इसके अलावा, EPF पर मिलने वाली ब्याज दर हर साल सरकार तय करती है, जिससे अपेक्षाकृत स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न मिलता है. हर महीने वेतन से स्वतः कटौती होने के कारण नियमित बचत की आदत भी बनी रहती है.

पेंशन और बीमा का भी लाभ

EPFO ने बताया कि EPF सिर्फ बचत योजना नहीं है. इसके पात्र सदस्यों को कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना का लाभ भी मिलता है.

रिटायरमेंट के बाद पात्र सदस्य आजीवन पेंशन के हकदार होते हैं. वहीं, सदस्य की मृत्यु होने पर उसके परिवार को पेंशन के साथ 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिल सकता है. म्यूचुअल फंड में इस तरह की सामाजिक सुरक्षा या बीमा सुविधा स्वतः नहीं मिलती.

EPFO की सलाह क्या है?

EPFO का कहना है कि म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है. इसलिए केवल ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में EPF का पैसा समय से पहले निकालकर म्यूचुअल फंड में निवेश करना समझदारी नहीं है.

संगठन ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अपने EPF कॉर्पस को रिटायरमेंट प्लानिंग की मजबूत नींव बनाए रखें. जिन निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता अधिक है, वे अपने अतिरिक्त निवेश के लिए म्यूचुअल फंड का सहारा ले सकते हैं. हालांकि, EPFO का मानना है कि नियोक्ता का योगदान, टैक्स लाभ, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं के कारण EPF का महत्व किसी भी अन्य निवेश विकल्प से अलग और खास है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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