मजबूत फिजिकल डिमांड और ग्लोबल मार्केट में स्ट्रांग ट्रेंड की वजह से बुधवार को राजधानी दिल्ली में सोने की कीमतों में 1,900 रुपए की बढ़ोतरी हुई और 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के दो हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9 फीसदी प्योरिटी वाले सोने की कीमत 1,900 रुपये बढ़कर 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई.

मंगलवार को यह 1,47,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. 7 जुलाई को स्थानीय बाज़ार में सोने की कीमत 1,49,250 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. वहीं दूसरी ओर लगातार छह सत्रों की गिरावट के बाद चांदी में सुधार हुआ और इसकी कीमत 8,500 रुपये बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई. पिछले सत्र में चांदी 2,21,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी.
ट्रेडर्स ने कहा कि विदेशी बाजार में मजबूत कीमतों, फिर से बढ़ी फिजिकल डिमांड और पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग के कारण सोने की बढ़त लगातार तीसरे सत्र में भी जारी रही. HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि बुधवार को ग्लोबल मार्केट से मिले सकारात्मक संकेतों के कारण सोने की कीमतों में तेजी आई और फिजिकल डिमांड में सुधार के बाद कीमतें दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं. उन्होंने कहा कि वैल्यू बाइंग और एक्सचेंजट्रेडेड फंड्स में नए निवेश से भी इस तेज़ी को समर्थन मिला, जो हालिया गिरावट के बाद निवेशकों के बेहतर होते सेंटीमेंट को दर्शाता है.
विदेशी बाजारों में सोना और चांदी
ग्लोबल लेवल पर, स्पॉट गोल्ड 47.43 डॉलर या 1.16 प्रतिशत बढ़कर 4,125.24 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था और चांदी लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 59.32 डॉलर प्रति औंस हो गई. कोटक सिक्योरिटीज की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चेनवाला ने कहा कि इंट्राडे ट्रेड में स्पॉट गोल्ड 4,140 USD प्रति औंस के दो हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी 60 USD के करीब पहुंच गई. वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के पांच हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर बने रहने के बावजूद दोनों धातुओं में तेज़ी देखी गई. चेनवाला के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कूटनीतिक सफलता की उम्मीदों को कम करते हुए कहा है कि वॉशिंगटन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन तेहरान बातचीत को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे निवेशक ‘इंतजार करो और देखो’ की स्थिति में हैं. उन्होंने कहा कि बुलियन ट्रेडिंग पर मॉनेटरी पॉलिसी से जुड़ी उम्मीदों का असर बना हुआ है और ट्रेडर्स अगले हफ्ते होने वाली फेडरल रिजर्व ओपन मार्केट कमेटी की बैठक पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं.
क्या और बढ़ेंगे दाम?
जून की बैठक के मिनट्स से पता चला कि अमेरिकी पॉलिसी मेकर्स ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के पक्ष में थोड़ा अधिक झुकाव रखते हैं. नौ अधिकारी बढ़ोतरी के पक्ष में थे और आठ यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में. इससे संकेत मिलता है कि जब तक पॉलिसी को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक कीमती धातुओं में बढ़त सीमित रह सकती है. मिरे एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि बुलियन को तीन मुख्य कारकों से समर्थन मिला. जिसमें जल्द ही अमेरिकाईरान शांति वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीद; ट्रंप प्रशासन द्वारा फिर से टैरिफ लगाने के बाद कीमती धातुओं की मांग में फिर से तेजी और सोने की USD 4,000 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बने रहने की क्षमता शामिल है.