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Autoimmune Diseases: क्या ऑटोइम्यून डिजीज को ठीक किया जा सकता है, एक्सपर्ट से जानें​

जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम ही हेल्दी सेल्स और अंगों पर अटैक करने लगे तो इसे ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है. नॉर्मल कंडीशन में हमारा इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बॉडी की रक्षा करता है. लेकिन अगर ऑटोइम्यून बीमारी हो जाए तो यहीं सिस्टम हमारे बॉडी की हेल्दी […]

जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम ही हेल्दी सेल्स और अंगों पर अटैक करने लगे तो इसे ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है. नॉर्मल कंडीशन में हमारा इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बॉडी की रक्षा करता है. लेकिन अगर ऑटोइम्यून बीमारी हो जाए तो यहीं सिस्टम हमारे बॉडी की हेल्दी कोशिकाओं को दुश्मन समझ कर उन्हें डैमेज करने लगता है. इस वजह से जोड़ों में दर्द, स्किन पर खुजली, थायराइड का बढ़ना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा हमारी आंत, नस और दूसरे अंग इससे प्रभावित हो सकते हैं.

बताया जाता है कि इसके करीब 80 टाइप हैं, जिनमें सबसे प्रमुख रुमेटॉइड आर्थराइटिस, टाइप1 डायबिटीज, और हाशिमोटो थायरॉयडिटिस है. एक्सपर्ट बताते हैं कि इसके कारण हार्मोनल चेंज और जेनेटिक हो सकते हैं. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं क्या इसे परमानेंट ठीक किया जा सकता है.

क्या ऑटोइम्यून डिजीज को दूर किया जा सकता है?

डॉ. मानसी निगम का कहना है कि ये सवाल मुझसे अक्सर पूछा जाता है. इसका आसान सा जवाब है कि फिलहाल ज्यादातर ऑटोइम्यून बीमारियों का पूरी तरह इलाज नहीं है. लेकिन अच्छी बात ये है कि इन्हें काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और बहुत से लोग इनके साथ भी बिल्कुल सामान्य और एक्टिव जिंदगी जीते हैं.

असल में, ऑटोइम्यून बीमारी में हमारा इम्यून सिस्टम, जिसका काम हमें इंफेक्शन से बचाना होता है, गलती से शरीर के ही स्वस्थ हिस्सों पर हमला करने लगता है. यही वजह है कि ये बीमारियां अक्सर लंबे समय तक रहती हैं. अभी हमारे पास ऐसा कोई इलाज नहीं है जो इन्हें हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म कर दे.

बीमारी कब रिमिशन में जाती है

लेकिन इन्हें कंट्रोल जरूर किया जा सकता है. इलाज का मकसद होता है इम्यून सिस्टम की जरूरत से ज्यादा एक्टिविटी को कम करना, शरीर की सूजन कम करना, लक्षणों को कंट्रोल करना और जिन अंगों पर असर पड़ रहा है, उन्हें नुकसान से बचाना. कई लोगों में बीमारी रिमिशन में भी चली जाती है. यानी लंबे समय तक लक्षण बहुत कम हो जाते हैं या बिल्कुल नहीं रहते. लेकिन रिमिशन का मतलब ये नहीं है कि बीमारी हमेशा के लिए खत्म हो गई है, क्योंकि ये दोबारा एक्टिव हो सकती है.

इसलिए जितनी जल्दी बीमारी का पता चल जाए, उतना बेहतर होता है. अपनी दवाइयां समय पर लेना, डॉक्टर से नियमित फॉलो अप कराना, शरीर को एक्टिव रखना, अच्छी नींद लेना, स्ट्रेस कम करना और संतुलित खाना खाना, ये सभी चीजें बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करती हैं. हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों का इलाज करना नहीं है, बल्कि आपको लंबे समय तक स्वस्थ रखना और आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर बनाए रखना है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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