मंगलवार, 21 जुलाई 2026 ब्रेकिंग
चढ़ावा चोरी के बाद राम मंदिर में बड़ा बदलाव! चढ़ावे की गिनती में जुटे कर्मियों की छुट्टी, अब नए लोगों की एंट्री​ | भारत के इथेनॉल मिशन पर बड़ा दांव! सरकारी तेल कंपनियों ने खर्च किए ₹1.72 लाख करोड़​ | ‘सपा अपने नाम पर वोट मांगने से कतरा रही…’ ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव के PDA पर हमला​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

मिसाइल, न्यूक्लियर सब छोटे पड़ गए, ईरान-अमेरिका की जंग में आया नया हथियार​

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में अब एक नया मोर्चा खुल गया है. पहले जहां मिसाइल, ड्रोन और सैन्य ठिकाने निशाने पर थे, वहीं अब पानी की सप्लाई करने वाले प्लांट भी हमलों का लक्ष्य बनने लगे हैं. हाल ही में दोनों देशों ने एकदूसरे के उन संयंत्रों पर हमले किए, जहां समुद्र […]

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में अब एक नया मोर्चा खुल गया है. पहले जहां मिसाइल, ड्रोन और सैन्य ठिकाने निशाने पर थे, वहीं अब पानी की सप्लाई करने वाले प्लांट भी हमलों का लक्ष्य बनने लगे हैं. हाल ही में दोनों देशों ने एकदूसरे के उन संयंत्रों पर हमले किए, जहां समुद्र के खारे पानी को साफ करके पीने लायक बनाया जाता है. तकनीकी भाषा में इन प्लांट को डिसेलिनेशन प्लांट कहा जाता है.

आखिर पानी के प्लांट क्यों बने निशाना?
खाड़ी के ज्यादातर देशों में नदियां और मीठे पानी के बड़े स्रोत नहीं हैं. यहां पीने का पानी मुख्य रूप से समुद्र के पानी को साफ करके तैयार किया जाता है. यानी अगर ये प्लांट बंद हो जाएं तो लाखों लोगों के घरों में पीने का पानी पहुंचना मुश्किल हो सकता है. यही वजह है कि अब इन्हें रणनीतिक ठिकानों की तरह देखा जा रहा है.

कुवैत में क्या हुआ?
ईरान ने हाल ही में कुवैत के एक बड़े बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया. हमले में बिजली उत्पादन इकाइयों को नुकसान पहुंचा और प्लांट में आग लग गई. हालांकि आग पर जल्द काबू पा लिया गया, लेकिन सरकार ने एहतियात के तौर पर लोगों से बिजली और पानी की बचत करने की अपील की.

कुवैत की करीब 90 प्रतिशत पीने के पानी की जरूरत ऐसे ही डिसेलिनेशन प्लांट से पूरी होती है. इसलिए ऐसे हमले का असर सिर्फ बिजली पर नहीं बल्कि आम लोगों की पानी की सप्लाई पर भी पड़ सकता है.

ईरान में भी पानी की सप्लाई पर असर
दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान के होर्मोजगान प्रांत के बुंजी गांव स्थित एक डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला किया. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में प्लांट के फिल्टर और पंपिंग सिस्टम तबाह हो गए. इसका नतीजा यह हुआ कि आसपास के 20 गांवों के करीब 10 हजार लोग पीने के पानी को लेकर परेशान हो गए हैं. गर्मी के मौसम में यह हालात मानवीय संकट में बदल सकती है.

खाड़ी देशों की पानी पर कितनी निर्भरता?
दुनिया के सबसे अधिक जल संकट वाले क्षेत्रों में खाड़ी देश शामिल हैं. यहां प्राकृतिक मीठा पानी बेहद कम है, इसलिए समुद्र का पानी साफ करके ही लोगों तक पहुंचाया जाता है. कतर में 99 प्रतिशत से ज्यादा पीने का पानी डिसेलिनेशन से आता है. बहरीन और कुवैत लगभग 90 प्रतिशत पानी इसी तकनीक से हासिल करते हैं. ओमान करीब 86 प्रतिशत पानी डिसेलिनेशन से बनाता है. सऊदी अरब दुनिया में सबसे ज्यादा डिसेलिनेटेड पानी बनाने वाला देश है. यूएई के बड़े शहर, जैसे दुबई और अबू धाबी, भी मुख्य रूप से इसी पानी पर निर्भर हैं.

पूरे खाड़ी क्षेत्र में 400 से ज्यादा डिसेलिनेशन प्लांट काम कर रहे हैं. दुनिया में बनने वाले कुल डिसेलिनेटेड पानी का लगभग 45 प्रतिशत यहीं तैयार होता है.

अगर ये प्लांट बंद हो जाएं तो क्या होगा?
जानकारों का कहना है कि अगर किसी बड़े डिसेलिनेशन प्लांट का काम रुक जाता है तो शुरुआत में सरकारें अपने आपातकालीन जल भंडार का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन अगर कई दिनों तक प्लांट चालू नहीं हो पाते, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं.

पहले कुछ दिनों में पानी की राशनिंग शुरू हो सकती है. अस्पतालों, उद्योगों और जरूरी सेवाओं पर असर पड़ सकता है. भीषण गर्मी में लोगों के लिए पीने का पानी जुटाना मुश्किल हो सकता है. लंबे समय तक संकट रहने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

बिजली भी हो सकती है ठप
दिलचस्प बात यह है कि खाड़ी देशों में कई डिसेलिनेशन प्लांट बिजलीघरों के साथ जुड़े होते हैं. यानी अगर पानी बनाने वाला प्लांट बंद होता है तो बिजली बनाने की समस्या से गुजरना पड़ सकता है. इस तरह एक ही हमला पानी और बिजली, दोनों संकट पैदा कर सकता है.

अब साइबर हमला भी बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि खतरा सिर्फ मिसाइलों से नहीं है. अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े साइबर हैकर पानी और सीवेज सिस्टम को भी निशाना बना रहे हैं.

अगर हैकर कंट्रोल सिस्टम में घुस जाएं तो वे पंप बंद कर सकते हैं, गलत आंकड़े दिखा सकते हैं. इसके अलावा पानी साफ करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं. इससे बिना किसी बम या मिसाइल के भी लाखों लोगों की पानी की सप्लाई ठप हो सकती है.
अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के मुताबिक, पीने के पानी जैसी जरूरी नागरिक सुविधाओं पर हमला नहीं किया जाना चाहिए. जिनेवा कन्वेंशन भी साफ कहता है कि ऐसी संरचनाएं, जिन पर आम लोगों की जिंदगी निर्भर करती है, युद्ध के दौरान भी सुरक्षित रहनी चाहिए. फिर भी मौजूदा संघर्ष ने दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में अब सिर्फ सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि पानी जैसी बुनियादी जरूरतें भी रणनीतिक हथियार बनती जा रही हैं.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY