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‘अगर सोनम वांगचुक नहीं चल पाए तो मैं मार्च लीड करूंगी’​

नई दिल्ली: सोनम वांगचुक को जंतरमंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर वांगचुक 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाते हैं तो वह खुद आंदोलन का नेतृत्व करेंगी। वांगचुक की गिरफ्तारी से […]

नई दिल्ली: सोनम वांगचुक को जंतरमंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर वांगचुक 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाते हैं तो वह खुद आंदोलन का नेतृत्व करेंगी। वांगचुक की गिरफ्तारी से लेकर रिहाई और अब भूख हड़ताल के दौरान भी गीतांजलि लगातार उनके समर्थन में सक्रिय रही हैं।

शनिवार को मीडिया से बातचीत में गीतांजलि आंग्मो ने कहा, ‘अगर सोनम वांगचुक मार्च में शामिल नहीं हो सकते, तो मैं उनकी ओर से उस मार्च का नेतृत्व करूंगी।’ यह बयान ऐसे समय आया है जब वांगचुक को 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद जंतरमंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। गीतांजलि का आरोप है कि उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया गया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम अदालत के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उठाया गया।

कौन हैं गीतांजलि आंग्मो?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गीतांजलि आंग्मो सोशल एंटरप्रेन्योर और शिक्षाविद हैं। वह लद्दाख स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख की सहसंस्थापक हैं, जिसकी स्थापना उन्होंने 2017 में सोनम वांगचुक के साथ मिलकर की थी। यह संस्थान लद्दाख की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ तकनीक, सोलर ऊर्जा, ग्रीन कैंपस और स्थानीय जरूरतों पर आधारित शिक्षा मॉडल विकसित करने के लिए जाना जाता है। 2021 में HIAL ने सेना के लिए सोलरहीटेड टेंट भी विकसित किए थे। हालांकि, पिछले वर्ष विदेशी फंडिंग से जुड़े कथित नियम उल्लंघन को लेकर HIAL सीबीआई की जांच के दायरे में भी आया था।

कॉरपोरेट करियर छोड़ चुना सामाजिक बदलाव का रास्ता
ओडिशा के बालासोर में एक पंजाबी परिवार में जन्मीं गीतांजलि ने फकीर मोहन विश्वविद्यालय से फिजिक्स में स्नातक और भुवनेश्वर के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से MBA किया। इसके बाद उन्होंने करीब 15 वर्ष तक, मुख्य रूप से डेनमार्क में, कॉरपोरेट सेक्टर में काम किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने ‘पुषण’, ‘शंघाई पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड’ और ‘हेलिओस बुक्स’ जैसे उद्यम शुरू किए। वह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की चेवनिंग स्कॉलर भी रह चुकी हैं और उन्हें ‘वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। कराटे में ब्लैक बेल्ट होने के साथसाथ वह ओडिसी और रूसी बैले नृत्य में भी प्रशिक्षित हैं।

शिक्षा सम्मेलन में हुई थी सोनम वांगचुक से मुलाकात
गीतांजलि ने 2025 में दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मुलाकात सोनम वांगचुक से एक शिक्षा सम्मेलन के दौरान हुई थी। दोनों शिक्षा और समाज को लेकर समान सोच रखते थे और यही समानता धीरेधीरे रिश्ते में बदल गई। गौरतलब है कि गीतांजलि, सोनम वांगचुक की दूसरी पत्नी हैं। इससे पहले उनकी शादी अमेरिकी नागरिक रेबेका नॉर्मन से हुई थी, जो बाद में तलाक पर समाप्त हुई।

गिरफ्तारी से रिहाई तक हर लड़ाई में बनीं सबसे बड़ी ताकत
गीतांजलि पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आईं जब पिछले वर्ष लद्दाख आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया था। उस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, राष्ट्रपति को पत्र लिखा और लगातार वांगचुक की रिहाई के लिए अभियान चलाया। माना जाता है कि उनकी कानूनी लड़ाई और लगातार दबाव के बाद करीब 170 दिनों की हिरासत के पश्चात वांगचुक को रिहा किया गया।

भूख हड़ताल के दौरान भी रहीं एक्टिव
28 जून से शुरू हुई सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान गीतांजलि प्रदर्शन स्थल पर लगातार मौजूद नहीं रहीं, लेकिन उन्होंने अखबारों में लेख लिखकर आंदोलन के मुद्दों को सामने रखा। जब वांगचुक की तबीयत बिगड़ने लगी तो वह अस्पताल पहुंचीं और उनसे अनशन खत्म करने की अपील भी की, लेकिन वांगचुक अपने फैसले पर कायम रहे।

अस्पताल को लेकर लगाए गंभीर आरोप
वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उनकी सहमति के कोई इलाज न किया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें मोबाइल फोन लेकर अस्पताल के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई और अस्पताल में भारी पुलिस बल की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए। गीतांजलि ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें वांगचुक की मेडिकल स्थिति पर दूसरी राय लेने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

20 जुलाई को संसद मार्च का करेंगी नेतृत्व
सोनम वांगचुक को 20 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित मार्च में शामिल होना था। अब उनकी अनुपस्थिति में गीतांजलि आंग्मो ने खुद इस मार्च का नेतृत्व करने का ऐलान किया है। ऐसे में आंदोलन का चेहरा अब केवल सोनम वांगचुक नहीं, बल्कि उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी बनती नजर आ रही हैं।

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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