अगर आप इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड में नया SIP शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए विकल्प लगभग खत्म हो चुके हैं. नियामकीय सीमा के कारण अधिकांश एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय फंडों में नए SIP और लंपसम निवेश पर रोक लगा दी है. फिलहाल भारत में सिर्फ Baroda BNP Paribas Aqua Fund of Fund ही ऐसा इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड बचा है, जो नए निवेशकों से SIP और लंपसम दोनों तरह के निवेश स्वीकार कर रहा है.

क्यों बंद हो रहे हैं इंटरनेशनल फंड?
यह रोक फंडों के खराब प्रदर्शन की वजह से नहीं, बल्कि नियामकीय सीमा के कारण लगी है. भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश की कुल सीमा पहले से तय है. कई फंड हाउस अपनी उपलब्ध सीमा पूरी तरह इस्तेमाल कर चुके हैं, इसलिए वे नए निवेश स्वीकार नहीं कर सकते. यही कारण है कि हाल के दिनों में 11 और इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीमों ने नए SIP पंजीकरण बंद कर दिए हैं.
सिर्फ एक स्कीम में बचा नया निवेश का विकल्प
वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 65 इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीमों में अब केवल Baroda BNP Paribas Aqua FoF ही नई SIP और लंपसम निवेश के लिए खुली है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भी स्थायी नहीं है. यदि इस फंड हाउस की विदेशी निवेश सीमा भी पूरी हो जाती है, तो यह स्कीम भी नए निवेशकों के लिए बंद हो सकती है.
मौजूदा निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं
नए निवेश बंद होने का असर उन निवेशकों पर नहीं पड़ेगा, जिन्होंने पहले से SIP शुरू कर रखा है. अधिकांश मामलों में मौजूदा SIP सामान्य रूप से जारी रहेंगे और पहले किए गए निवेश भी पहले की तरह बाजार के प्रदर्शन के अनुसार बढ़ते या घटते रहेंगे. यह प्रतिबंध मुख्य रूप से नए निवेशकों और नई SIP रजिस्ट्रेशन पर लागू है. हालांकि, अलगअलग फंड हाउस के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए निवेशकों को अपनी AMC की ताजा सूचना जरूर देखनी चाहिए.
निवेशकों के लिए क्या हैं विकल्प?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी निवेशक का उद्देश्य केवल वैश्विक विविधीकरण है, तो वह फिलहाल खुले इंटरनेशनल फंड पर विचार कर सकता है या फिर भविष्य में नियामकीय सीमा बढ़ने का इंतजार कर सकता है. इसके अलावा, कुछ निवेशक अन्य वैध विदेशी निवेश विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं. निवेश से पहले जोखिम, निवेश अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्यों का आकलन करना जरूरी है.
जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई जाती है, तो कई इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड दोबारा नए निवेश के लिए खुल सकते हैं. तब तक वैश्विक बाजारों में निवेश के इच्छुक निवेशकों के लिए विकल्प सीमित बने रहने की संभावना है.