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ट्रेडर्स के लिए बढ़ी मुश्किलें! RBI की सख्ती से शेयर बाजार में आ सकती है सुस्ती​

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंक गारंटी से जुड़े नियमों में की गई सख्ती का असर अब देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों पर भी पड़ सकता है. ब्रोकरेज फर्म Dolat Capital की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों से प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्मों की फंडिंग महंगी हो जाएगी. इसका सीधा असर डेरिवेटिव मार्केट में ट्रेडिंग […]

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंक गारंटी से जुड़े नियमों में की गई सख्ती का असर अब देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों पर भी पड़ सकता है. ब्रोकरेज फर्म Dolat Capital की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों से प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्मों की फंडिंग महंगी हो जाएगी. इसका सीधा असर डेरिवेटिव मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ सकता है, जिससे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज , बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज की आय पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

₹1.5 लाख करोड़ की फंडिंग पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में करीब ₹1.3 लाख करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ की बैंक गारंटी आधारित फंडिंग का इस्तेमाल प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्में करती हैं. पहले ये फर्में बैंक गारंटी के जरिए अपनी पूंजी से लगभग दोगुना बाजार एक्सपोजर ले सकती थीं. लेकिन RBI के संशोधित नियमों के बाद यह लीवरेज घटकर एक गुना रह गया है. इसका मतलब है कि पहले जितनी ट्रेडिंग करने के लिए अब अधिक पूंजी की जरूरत होगी.

ट्रेडिंग करना हो सकता है महंगा

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बैंक गारंटी की जगह ट्रेडर्स को कमर्शियल पेपर के जरिए फंड जुटाना पड़ा, तो उनकी फंडिंग लागत करीब 1% से बढ़कर 11% तक पहुंच सकती है. हाल ही में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में हुई बढ़ोतरी ने भी ट्रेडिंग की लागत बढ़ा दी है. ऐसे में कई ट्रेडिंग रणनीतियां पहले जितनी लाभदायक नहीं रहेंगी.

NSE पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

Dolat Capital का मानना है कि सबसे अधिक दबाव NSE पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के इंडेक्स ऑप्शंस कारोबार का 45% से ज्यादा हिस्सा प्रोप्राइटरी और हाईफ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्मों से आता है. यही कारोबार एक्सचेंज की कुल आय का लगभग 53% योगदान देता है.ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY27 में NSE का औसत दैनिक इंडेक्स ऑप्शंस कारोबार उसके पहले के अनुमान से 8% कम रह सकता है, जबकि FY28 में यह गिरावट 18% तक पहुंच सकती है.

BSE और MCX भी अछूते नहीं

BSE की आय का करीब 60% हिस्सा इंडेक्स ऑप्शंस से आता है. अगर प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स की भागीदारी कम होती है, तो FY27 में इसका कारोबार अनुमान से 10% और FY28 में 20% तक घट सकता है.वहीं MCX पर असर अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद है, लेकिन यहां भी बैंक गारंटी आधारित ट्रेडिंग का हिस्सा 15% से 20% तक माना जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में MCX का कारोबार अनुमान से 6% और FY28 में 13% तक कम रह सकता है.

लंबी अवधि की संभावनाएं बनी हुई हैं

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय पूंजी बाजार की लंबी अवधि की तस्वीर अब भी मजबूत है. NSE के साथ पंजीकृत निवेशकों की संख्या 13 करोड़ से अधिक हो चुकी है और खुदरा निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. लेकिन फिलहाल RBI के नए नियमों से फंडिंग महंगी होने के कारण ट्रेडिंग गतिविधियों में कुछ समय के लिए सुस्ती आ सकती है. ऐसे में आने वाले महीनों में निवेशकों और बाजार सहभागियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नए नियमों का वास्तविक असर एक्सचेंजों के कारोबार और आय पर कितना पड़ता है.

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संपादकीय टीम

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