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मुश्किल में तेल कंपनियां, उपभोक्ताओं की मौज ! सरकार ने तय किए खाद्य तेल के मानक पैकेट, जानें नया नियम

मुश्किल में तेल कंपनियां, उपभोक्ताओं की मौज ! सरकार ने तय किए खाद्य तेल के मानक पैकेट, जानें नया नियम

नई दिल्ली: देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अक्सर बाजार में सामान खरीदते समय पैकेट के वजन को लेकर धोखा खाने वाले ग्राहकों को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों की मनमानी पैकेजिंग और चालाकी पर पूरी तरह से रोक लगाते हुए तेल के पैकेटों का मानक आकार (Standard Size) निर्धारित कर दिया है।

मुश्किल में तेल कंपनियां, उपभोक्ताओं की मौज ! सरकार ने तय किए खाद्य तेल के मानक पैकेट, जानें नया नियम
मुश्किल में तेल कंपनियां, उपभोक्ताओं की मौज ! सरकार ने तय किए खाद्य तेल के मानक पैकेट, जानें नया नियम

केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब कंपनियां बाजार में अपनी मनमर्जी से पैकेट का साइज घटा या बढ़ा नहीं सकेंगी। लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) में किए गए इस बड़े संशोधन के बाद, कंपनियों को अब 200 ग्राम से लेकर 20 किलोग्राम तक के तय पैकेट्स में ही खाद्य तेल बेचना होगा।

ये हैं सरकार द्वारा तय किए गए मानक आकार

  • नए नियमों के मुताबिक, अब बाजार में खाद्य तेल सिर्फ इन तय वजनों में ही उपलब्ध होगा:
  • छोटे पैकेट्स: 200 ग्राम और 500 ग्राम
  • मध्यम पैकेट्स: 1 किलोग्राम, 2 किलोग्राम, 3 किलोग्राम, 4 किलोग्राम और 5 किलोग्राम
  • बड़े पैकेट्स: 15 किलोग्राम और 20 किलोग्राम

ध्यान देने योग्य बात: सरकार ने स्पष्ट किया है कि 200 ग्राम या 200 मिलीलीटर से कम के छोटे पाउच या पैकेटों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इसके अलावा, यदि कोई कंपनी तेल की मात्रा वॉल्यूम (मिलीलीटर या लीटर) में लिखती है, तो उसे पैकेट पर उसके बराबर का वजन (ग्राम या किलोग्राम) भी समान आकार के अक्षरों और अंकों में अनिवार्य रूप से छापना होगा।

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इन सभी तेलों पर लागू होगा नया नियम

सरकार का यह सख्त नियम बाजार में बिकने वाले लगभग सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू होने जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन तेल, सूरजमुखी (सनफ्लावर) तेल, सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, तिल का तेल, राइस ब्रान ऑयल, कॉटनसीड ऑयल, कॉर्न ऑयल और इन तेलों के विभिन्न मिश्रण (Blended Oils) शामिल हैं।

आखिर क्यों पड़ी इस कड़े नियम की जरूरत?

दरअसल, पिछले कुछ समय से खाद्य तेल बाजार में कंपनियों ने मुनाफा कमाने का एक अनोखा और चालाकी भरा ट्रेंड अपना लिया था। कंपनियां पैकेट की कीमतें सीधे तौर पर बढ़ाने के बजाय, धीरे-धीरे और चुपके से पैकेट का साइज घटा देती थीं। बाजार में 1 किलोग्राम या 1 लीटर के बजाय 850 ग्राम, 900 ग्राम या 910 ग्राम जैसे अजीबोगरीब आकारों वाले पैकेट्स की बाढ़ आ गई थी।

एक आम उपभोक्ता अक्सर पैकेट की चौड़ाई देखकर उसे 1 किलो या 1 लीटर का समझकर खरीद लेता था, जिससे उसकी जेब पर सीधा डाका डल रहा था। इस ‘प्रेडेटरी पैकेजिंग’ के कारण अलग-अलग ब्रांड्स की कीमतों की सही तुलना करना ग्राहकों के लिए नामुमकिन हो गया था। सरकार के इस कदम से बाजार में पारदर्शिता आएगी और ग्राहकों के साथ होने वाली इस धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।

कंपनियों को मिला 3 महीने का समय, उद्योग जगत ने किया स्वागत

सरकार ने इस बदलाव को सुचारू रूप से लागू करने के लिए तेल कंपनियों, पैकर्स और आयातकों को 3 महीने का ट्रांजिशन पीरियड (समय) दिया है, ताकि वे अपने पुराने स्टॉक और पैकेजिंग मटेरियल को बदल सकें।

इस बीच, इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने सरकार के इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। IVPA के चेयरमैन सुधाकर देसाई ने कहा, “पिछले तीन वर्षों में अजीबोगरीब पैकेट साइज की प्रथा ने बाजार को पूरी तरह बिगाड़ दिया था और रीटेल शेल्फ पर उपभोक्ताओं के बीच भारी भ्रम था। सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से रीटेल बाजार में एक ढांचागत समझ बहाल होगी और सभी कंपनियों को समान अवसर मिलेगा।”

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