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गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कारगर हैं ये 10 स्वदेशी ड्रिंक्स, PM Narendra Modi ने दी अपनाने की सलाह

गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कारगर हैं ये 10 स्वदेशी ड्रिंक्स, PM Narendra Modi ने दी अपनाने की सलाह

चिलचिलाती गर्मी और आसमान से बरसती आग के बीच खुद को हाइड्रेटेड रखना सबसे बड़ी चुनौती है। जब पारा 40 डिग्री के पार जाता है, तो अक्सर हम प्यास बुझाने के लिए फ्रीज में रखी कोल्ड ड्रिंक्स की तरफ भागते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पैक्ड ड्रिंक्स आपकी प्यास बुझाने के बजाय शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकते हैं? गर्मी में बॉडी को हाइड्रेट रखने और गर्मी से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को इन विदेशी कोल्ड ड्रिंक्स की जगह भारत के पारंपरिक और स्वदेशी पेय पदार्थों (Desi Drinks) को अपनाने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने कहा गर्मियों के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड और कूल रखने के लिए देश के पारंपरिक और क्षेत्रीय पेय पदार्थों (Traditional Indian Drinks) से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के इन स्वदेशी और स्वास्थ्यवर्धक देसी ड्रिंक्स को बढ़ावा देने की बात कही है।

गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कारगर हैं ये 10 स्वदेशी ड्रिंक्स, PM Narendra Modi ने दी अपनाने की सलाह
गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कारगर हैं ये 10 स्वदेशी ड्रिंक्स, PM Narendra Modi ने दी अपनाने की सलाह

देसी पेयों का स्वाद, संतुष्टि और सुकून बेजोड़ है। ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पारंपरिक पेयों की खासियत बताई। उन्होंने कहा कि हमारे देश में गर्मी से राहत का उपाय अक्सर रसोई घर में ही मिल जाता है। उन्होंने उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत के कई पारंपरिक पेय का जिक्र करते हुए कहा,ये सिर्फ ड्रिंक नहीं हैं, बल्कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं का हिस्सा हैं। ये ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी दर्शाते हैं। मोदी ने बताया अधिकांश पेय हमारी अपनी रसोई, खेतों और खलिहानों से आते हैं। इनमें भले ही कोई बड़ी ब्रांडिंग न हो, लेकिन इनमें पीढ़ियों का अनुभव समाया हुआ है। इस गर्मी में इन देसी ड्रिंक का सेवन करें।आइए जानते हैं इन पारंपरिक ड्रिंक के बारे में कैसे ये गर्मी और लू से बचाव करते हैं और गर्मी से निजात दिलाते हैं।

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आम पन्ना (उत्तर भारत)

आम पन्ना कच्चे आम, पानी, चीनी या गुड़, पुदीना, काला नमक और भुना जीरा डालकर बनाया जाता है। यह विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर को ऊर्जा देने, पाचन सुधारने और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। Journal of Food Science and Technology के एक अध्ययन के अनुसार, कच्चे आम को उबालने पर उसमें मौजूद विटामिन C और मैलिक एसिड (Malic Acid) एक्टिव हो जाते हैं। रिसर्च बताती है कि जब इसमें काला नमक और भुना जीरा मिलाया जाता है, तो यह एक बेहतरीन नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट (Natural Electrolyte) बन जाता है। यह गर्मियों में पसीने के रास्ते निकले सोडियम और पोटैशियम की कमी को तुरंत पूरा करके लू (Heat Stroke) और मांसपेशियों की ऐंठन (Cramps) से बचाता है।

लस्सी (पंजाब और हरियाणा)

लस्सी दही से बनने वाला पारंपरिक पेय है, जो अपने गाढ़े, मलाईदार और ताजगी भरे स्वाद के लिए पूरे देश में पसंद किया जाता है। इसे दही, चीनी और ठंडे पानी या दूध को मिलाकर बनाया जाता है। कई बार इसमें इलायची, गुलाब जल, केसर और सूखे मेवे भी डाले जाते हैं। यह शरीर को ठंडक देने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करती है। International Dairy Journal में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक लस्सी में गाढ़े दही के इस्तेमाल के कारण कैल्शियम, विटामिन B12 और आसानी से पचने वाला ‘व्हे प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है। क्लिनिकल स्टडी से पता चलता है कि लस्सी में मौजूद इलायची और गुलाब जल पेट के तापमान को तुरंत कम करते हैं और गर्मी के कारण होने वाली एसिडिटी व सीने की जलन को शांत करते हैं।

छाछ (राजस्थान और गुजरात)

छाछ या मठ्ठा अपने ठंडक पहुंचाने वाले और पाचन संबंधी फायदों के लिए जाना जाता है। इसे दही में पानी मिलाकर तथा भुना जीरा, काला नमक, धनिया और पुदीना जैसे मसालों के साथ तैयार किया जाता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे पाचन और ओवर ऑल हेल्थ में सुधार होता है। American Journal of Clinical Nutrition की एक रिपोर्ट के अनुसार
दही को मथकर जब मक्खन अलग कर दिया जाता है, तो बचा हुआ तरल यानी छाछ लैब-फर्मेंटेड प्रोबायोटिक्स (Lactobacillus) से भरपूर होता है। रिसर्च साबित करती है कि भुने जीरे और पुदीने से युक्त छाछ आंतों के ‘गुड बैक्टीरिया’ को बढ़ाती है। इसमें मौजूद ‘मिल्क फैट ग्लोब्यूल मेम्ब्रेन’ (MFGM) ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और पेट के भारीपन को दूर करने में मददगार है।

सत्तू ड्रिंक (बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश)

सत्तू का शरबत भुने हुए चने के आटे से तैयार किया जाता है और यह प्रोटीन से भरपूर ड्रिंक है। इसमें फाइबर, आयरन और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं। इसे मीठे और नमकीन दोनों रूपों में बनाया जाता है। सत्तू को पानी, नींबू, काला नमक, जीरा, गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी प्रदान करता है। Food Chemistry और Journal of Agricultural and Food Chemistry के अनुसार भुने हुए काले चने से बना सत्तू प्लांट प्रोटीन और अघुलनशील फाइबर (Insoluble Fiber) का पावरहाउस है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बेहद कम होता है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, सत्तू का शरबत पीने से शरीर में ग्लूकोज बहुत धीरे-धीरे रिलीज होता है, जिससे लंबे समय तक ऊर्जा बनी रहती है। इसमें मौजूद आयरन और मैग्नीशियम खून की कमी (Anemia) दूर करते हैं और पेट को लंबे समय तक ठंडा रखते हैं।

बेल पन्ना (ओडिशा)

बेल पन्ना बेल फल (वुड एप्पल) के गूदे से बनाया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से मीठा होता है और शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए जाना जाता है। फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह पेय पाचन तंत्र और आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसका नमकीन संस्करण भी बनाया जा सकता है, जिसमें नमक, चाट मसाला, पुदीना और काली मिर्च मिलाई जाती है। Phytomedicine और Journal of Ethnopharmacology की एक संयुक्त रिसर्च के मुताबिक बेल के गूदे में ‘टैनिन’ (Tannins) और ‘म्यूसिलेज’ (Mucilage) नामक प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं। कई रिसर्च में ये साबित हो चुका है कि बेल का पन्ना आंतों की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षात्मक कोटिंग बनाता है, जो गर्मी के दिनों में होने वाले गैस्ट्रिक अल्सर, डायरिया (दस्त) और पुरानी कब्ज को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।

कोकम शरबत (कोंकण और गोवा)

कोकम फल से तैयार होने वाला यह पारंपरिक पेय पश्चिमी भारत के तटीय क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय है। इसका खट्टा-मीठा स्वाद और गहरा लाल-बैंगनी रंग इसे खास बनाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और गर्मी से राहत दिलाता है। Phytotherapy Research में छपे एक क्लिनिकल ट्रायल के अनुसार कोकम फल (Garcinia indica) में हयड्रोक्सीसिट्रिक एसिड(HCA) और गार्सिनोल (Garcinol) पाया जाता है। रिसर्च बताती है कि गार्सिनोल एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर की गर्मी (पित्त) को शांत करता है। वहीं, इसमें मौजूद HCA शरीर में एक्स्ट्रा फैट को जमा होने से रोकता है और गर्मी में मेटाबॉलिज्म को सुचारू बनाए रखता है।

सोल कढ़ी (कोंकण और गोवा)

सोल कढ़ी गोवा और महाराष्ट्र का पारंपरिक पेय है, जिसे कोकम और नारियल के दूध से बनाया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकता है। European Journal of Clinical Nutrition के एक अध्ययन के अनुसार सोल कढ़ी में कोकम के साथ ताजे नारियल के दूध (Coconut Milk) का उपयोग होता है। नारियल के दूध में ‘लॉरिक एसिड’ (Lauric Acid) नामक मीडियम-चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) होते हैं। रिसर्च के अनुसार, यह कॉम्बिनेशन न सिर्फ इम्युनिटी बढ़ाता है, बल्कि पेट की गर्मी को शांत कर भारी और मसालेदार भोजन को बहुत आसानी से पचाने में मदद करता है।

पनकम (दक्षिण भारत)

पनकम दक्षिण भारत का लोकप्रिय पेय है, जिसे गुड़, पानी, सूखी अदरक, इलायची और नींबू के रस से तैयार किया जाता है। इसका स्वाद मीठा और हल्का मसालेदार होता है। यह शरीर को ठंडक और ताजगी देता है, इसलिए गर्मियों में इसे खूब पसंद किया जाता है। Indian Journal of Traditional Knowledge (IJTK) की एक रिपोर्ट के अनुसार पनकम में इस्तेमाल होने वाला गुड़ और सोंठ मिलकर काम करते हैं। सूखी अदरक में ‘जिंजरॉल (Gingerol) होता है, जो पाचन अग्नि को बढ़ाता है। विज्ञान के अनुसार, नींबू और इलायची के साथ मिलकर यह ड्रिंक गर्मियों में होने वाले इंफेक्शंस (Antimicrobial Effect) से बचाता है और शरीर को तुरंत ग्लूकोज प्रदान करता है।

नीर मोर (दक्षिण भारत)

नीर मोर दक्षिण भारत का पारंपरिक पेय है, जो पतली छाछ में करी पत्ता, अदरक, हरी मिर्च, धनिया और जीरा मिलाकर बनाया जाता है। यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है और शरीर को ठंडक तथा ताजगी देता है। International Journal of Dairy Technology के अनुसार नीर मोर (पतली छाछ) में कढ़ी पत्ता, अदरक और हरी मिर्च का तड़का लगाया जाता है। कढ़ी पत्ते में मौजूद ‘कार्बाज़ोल एल्कलॉइड्स’ (Carbazole Alkaloids) लीवर को महफूज रखते हैं। यह ड्रिंक अत्यधिक पतली होने के कारण शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को सबसे तेजी से रिकवर करती है और दक्षिण भारत की उमस भरी गर्मी में पसीने के बैलेंस को बनाए रखती है।

सांबरम (केरल)

सांबरम केरल का पारंपरिक पेय है, जिसे छाछ, पानी, अदरक, हरी मिर्च, करी पत्ता और नमक के साथ तैयार किया जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स इसके हेल्थ बेनेफिट को और बढ़ाते हैं। Journal of Clinical Gastroenterology के एक शोध के मुताबिक सांबरम में छाछ के साथ कुचली हुई हरी मिर्च और अदरक का अर्क होता है। हरी मिर्च में मौजूद ‘कैप्साइसिन’ (Capsaicin) और अदरक का मिश्रण पेट के पाचक रसों (Gastric Juices) के स्राव को उत्तेजित करता है। प्रोबायोटिक रिसर्च के अनुसार, केरल की अत्यधिक गर्मी और नमी में यह ड्रिंक पेट के संक्रमणों (Gastrointestinal Infections) को रोकने में 100% प्रभावी पाया गया है।

डिस्क्लेमर:यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से उचित चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक विवरण के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने निजी चिकित्सक से संपर्क करें।

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