केंद्र सरकार विदेशी निवेशकों को फिर से भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए टैक्स नियमों में राहत देने पर विचार कर रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट ने एक अध्यादेश की सिफारिश की है, जिसका मकसद कुछ खास तरह की सिक्योरिटीज में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स नियम आसान बनाना है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6% कमजोर हो चुका है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जनवरी से अब तक भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं.
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रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और RBI मिलकर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने और रुपये पर दबाव कम करने के लिए कई कदमों पर काम कर रहे हैं. उम्मीद है कि RBI भी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद कुछ अहम घोषणाएं कर सकता है. सरकार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को भारतीय सरकारी बॉन्ड (G-Secs) में निवेश पर लगने वाले टैक्स से पूरी छूट देने पर विचार कर रही है. फिलहाल विदेशी निवेशक सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय पर 20% विथहोल्डिंग टैक्स चुकाते हैं. इससे पहले यह दर 5% थी. सरकार इसमें निवेशकों को फिर से कुछ राहत दे सकती है. इससे फॉरेन इंवेस्टवेस्टर्स बॉन्ड में पैसा लगाएंगे और डॉलर का निवेश बढ़ेगा.
टैक्स को लेकर क्या की थी मांग?
विदेशी निवेशकों ने बजट से पहले सरकार से कैपिटल गेन टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) के नियमों की समीक्षा की मांग भी की थी. टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बढ़े टैक्स बोझ की वजह से भारत विदेशी निवेशकों के लिए पहले जितना आकर्षक नहीं रह गया है. अगर यह अध्यादेश लागू होता है, तो इसे विदेशी निवेशकों की वापसी और बाजार में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा.
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