How to Lose Belly Fat: एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने पेट के निचले हिस्से के मोटापे के संबंध में अपना पक्ष रखा है, तब से लोअर बेली फैट पर बहस तेज हो गई है। उन्होंने बायोलॉजिकल डिजाइन और वॉटर रिटेंशन को सही तरीके से समझाते हुए अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि शरीर के निटले हिस्से में फैट का होना जरूरी है, यह हमारे अंदरूनी अंगों को प्रोटेक्ट करता है।

हमारे शरीर में फैट कई प्रकार से डिपॉजिट होता है। ब्लड लिपिडस मतलब ब्लड में मौजूद फैट, सबक्यूटेनियस फैट यानी त्वचा के ठीक नीचे वाला फैट, विसरल फैट यानी अंदरूनी अंगों पर जमने वाला फैट, जो हार्ट, लंग्स, लिवर और शरीर के दूसरे अंगों के आसपास जमा होने लगता है।
क्या है अल्फा 2 और बीटा 3 रिसेप्टर्स
हमारे शरीर के फैट में अल्फा 2 और बीटा 3 नाम के रिसेप्टर्स होते हैं। बीटा 3 रिसेप्टर फैट घटाने में सहायक होते हैं। मतलब शरीर के जिन हिस्सों में बीटा 3 रिसेप्टर होते हैं, वहां का फैट कम करना आसान होता है, वहीं अल्फा 2 रिसेप्टर फैट घटाने के प्रोसेस को मुश्किल बनाता है। पेट, कमर और हिप एरिया के फैट में अल्फा 2 रिसेप्टर होते हैं, इसलिए इन जगहों का फैट कम करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
पेट पर जमे फैट को कम करने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि टमी फैट किस प्रकार का है। टमी फैट के प्रकार को जानकर उसके डाइट और एक्सरसाइज की शुरुआत करके बेली फैट को कम किया जा सकता है।
लोअर बेली फैट को कम करने के उपाय
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ब्रेकफास्ट स्किप न करें
एक्सपर्ट के अनुसार, सुबह का नाश्ता छोड़ने से पाचन दर धीमी होने लगती है, जिससे वेटगेन की समस्या बढ़ जाती है। इसके चलते शरीर ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल करने की बजाय उसे जस का तस बनाए रखता है। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग नाश्ता नहीं करते हैं उनमें अधिक वजन या मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।
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कार्डियो पर ध्यान दें
लोअर बेली फैट को कम करने के लिए कार्डियो एक अच्छा एक्सरसाइज है। इससे पूरे शरीर को फायदा पहुंचता है। मिलते हैं, लेकिन इसके साथ ही स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानि रेसिस्टेंस ट्रेनिंग को नज़रअंदाज़ करने से मोबिलिटी घटने लगती है। नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से मसल्स बिल्डिंग में मदद मिलती है। साथ ही वजन को नियंत्रित करने में भी फायदा मिलता है। दरअसल, रोज़ाना व्यायाम करने से मांसपेशियां कैलोरीज़ को बर्न करने में मदद करती हैं। जिससे फैट कम होता है।
पेट कम करने के उपाय (साभार. सोशल मीडिया)
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प्रोटीन डाइट में शामिल करें
आहार में प्रोटीन को शामिल करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए अक्सर लोग सप्लीमेंटस और प्रोटीन शेक्स की मदद लेते हैं। मगर उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उन्हें दिनभर में प्रोटीन की कितनी मात्रा लेनी चाहिए। यूएसडीए के अनुसार 19 वर्ष से अधिक महिलाओं को रोज़ाना 46 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा जो भी व्यक्ति शारिरक तौर पर अधिक श्रम करता है या फिजिकली अधिक एक्टिव रहता है, उसे प्रोटीन की अधिक मात्रा लेने की आवश्यकता होती है।
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अल्कोहल का सेवन न करें
एल्कोहल और बेली फैट एक-दूसरे के लिए खतरनाक है। अल्कोहल का नियमित रूप से सेवन करने से वेटगेन का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इसके सेवन से मेटाबॉलिज्म स्लो होने लगता है और एपिटाइट बढ़ने लगता है। इससे शरीर में लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे हार्मोन का स्त्राव बढ़ जाता है, जिससे वेटगेन की समस्या बढ़ने लगती है।
बेली फैट (फोटो. सोशल मीडिया)
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फलों और सब्जियों को आहार में शामिल करें
विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फलों और करने से शरीर को वॉटर कंटेट की प्राप्ति होती है। साथ ही इन लो कैलोरी फूड से शरीर में कैलोरीज़ के जमा होने का जोखिम कम हो जाता है। जिससे शरीर में फैट का जमना कम होता है।
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नींद है बेहद जरूरी
रोज़ाना 7 घंटे से कम नींद लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे अनिद्रा का सामना करना पडता है, जिससे शरीर में का स्तर बढ़ जाता है। इससे वेटगेन की समस्या बढ़ने लगती है और लोअर बैली फैट का सामना करना पड़ता है।












