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ITR Filing 2026: सोना बेचने पर कितना लगेगा टैक्स? ITR फाइल करने से पहले समझें ज्वेलरी और डिजिटल गोल्ड का पूरा गणित

ITR Filing 2026 का सीजन शुरू हो चुका है और ऐसे में जिन निवेशकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सोना बेचा है, उनके लिए टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है. सोने में निवेश केवल कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे होने वाले मुनाफे पर लगने वाला टैक्स भी आपकी कमाई को प्रभावित करता है. फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं. इसलिए ITR भरने से पहले इनके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है.

ITR Filing 2026: सोना बेचने पर कितना लगेगा टैक्स? ITR फाइल करने से पहले समझें ज्वेलरी और डिजिटल गोल्ड का पूरा गणित
ITR Filing 2026: सोना बेचने पर कितना लगेगा टैक्स? ITR फाइल करने से पहले समझें ज्वेलरी और डिजिटल गोल्ड का पूरा गणित

सोना बेचने से होने वाला लाभ कैपिटल गेन की श्रेणी में आता है. टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि निवेशक ने किस प्रकार का गोल्ड खरीदा था और उसे कितने समय तक अपने पास रखा. मौजूदा नियमों के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 12.5% टैक्स लगता है, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर निवेशक की आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है.

फिजिकल गोल्ड पर क्या हैं टैक्स नियम?

फिजिकल गोल्ड में सोने के गहने, सिक्के, बार और बुलियन शामिल होते हैं. यदि निवेशक खरीद के 24 महीने के भीतर सोना बेच देता है तो होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और उस पर टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगेगा. वहीं, अगर सोना 24 महीने से अधिक समय तक रखा गया है तो बिक्री पर होने वाले लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और उस पर 12.5% टैक्स देना होगा.

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डिजिटल गोल्ड पर भी लागू हैं समान नियम

डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वालों के लिए टैक्स नियम लगभग फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं. चूंकि डिजिटल गोल्ड के पीछे वास्तविक सोने का समर्थन होता है, इसलिए टैक्स के लिहाज से इसे भी फिजिकल गोल्ड की तरह माना जाता है. यदि डिजिटल गोल्ड को 24 महीने के भीतर बेचा जाता है तो लाभ पर स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लगेगा. वहीं 24 महीने से अधिक होल्डिंग पर 12.5% LTCG टैक्स देना होगा. हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डिजिटल गोल्ड अभी RBI या SEBI के नियमन के दायरे में नहीं है.

Gold ETF में जल्दी मिलता है LTCG का फायदा

गोल्ड ETF उन निवेशकों के बीच लोकप्रिय हैं जो बिना स्टोरेज की चिंता के सोने में निवेश करना चाहते हैं. टैक्स के नजरिए से भी यह एक आकर्षक विकल्प माना जाता है. गोल्ड ETF में केवल 12 महीने की होल्डिंग के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का लाभ मिल जाता है. यदि निवेशक 12 महीने के भीतर यूनिट बेचता है तो लाभ पर स्लैब रेट से टैक्स लगेगा. वहीं 12 महीने से अधिक समय तक रखने के बाद बेचने पर 12.5% LTCG टैक्स लागू होगा.

Gold Mutual Fund पर क्या है टैक्स व्यवस्था?

गोल्ड म्यूचुअल फंड आमतौर पर गोल्ड ETF में निवेश करते हैं. हालांकि टैक्स के मामले में इन पर अलग नियम लागू होते हैं. यदि यूनिट्स को 24 महीने से पहले बेचा जाता है तो मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और उस पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा. दूसरी ओर, 24 महीने से अधिक समय तक होल्डिंग के बाद बिक्री करने पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा.

SGB में मिलता है सबसे बड़ा टैक्स फायदा

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को टैक्स के लिहाज से सबसे फायदेमंद गोल्ड निवेश माना जाता है. यदि निवेशक बॉन्ड को उसकी पूरी 8 साल की मैच्योरिटी तक रखता है तो कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता. हालांकि मैच्योरिटी से पहले बिक्री करने पर अलग नियम लागू होते हैं. 12 महीने के भीतर बेचने पर लाभ पर स्लैब रेट से टैक्स लगेगा, जबकि 12 महीने से अधिक होल्डिंग पर 12.5% LTCG टैक्स लागू होगा.

गोल्ड फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर अलग नियम

कमोडिटी मार्केट में गोल्ड फ्यूचर्स और ऑप्शंस की ट्रेडिंग से होने वाली आय को कैपिटल गेन नहीं माना जाता. इसे बिजनेस इनकम की श्रेणी में रखा जाता है. ऐसे मामलों में निवेशक की आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देनदारी तय होती है. कुछ मामलों में अकाउंटिंग रिकॉर्ड और टैक्स ऑडिट से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं.

गिफ्ट में मिले सोने पर क्या लगता है टैक्स?

विरासत में मिला सोना या माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों जैसे करीबी रिश्तेदारों से उपहार में मिला सोना टैक्स फ्री होता है. शादी के अवसर पर प्राप्त सोना भी कर मुक्त माना जाता है. हालांकि यदि किसी गैर-रिश्तेदार से 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का सोना उपहार में मिलता है तो उसकी वैल्यू ‘अन्य स्रोतों से आय’ के तहत टैक्सेबल हो सकती है. बाद में उसे बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स भी लागू होगा.

कौन सा गोल्ड निवेश है सबसे ज्यादा टैक्स फ्रेंडली?

यदि केवल टैक्स के नजरिए से देखा जाए तो मैच्योरिटी तक रखे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सबसे अधिक फायदे वाले हैं क्योंकि उन पर कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स मुक्त रहता है. वहीं बाजार आधारित निवेश विकल्पों में गोल्ड ETF को अपेक्षाकृत अधिक टैक्स एफिशिएंट माना जाता है क्योंकि इसमें केवल 12 महीने बाद ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का लाभ मिल जाता है. इसलिए ITR Filing 2026 से पहले निवेशकों को अपने गोल्ड निवेश के प्रकार और होल्डिंग अवधि के आधार पर टैक्स देनदारी की सही गणना कर लेनी चाहिए.

khabarmonkey@gmail.com

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