मानसून के दौरान भारत के अलग-अलग राज्यों में कई सांस्कृतिक त्योहार मनाए जाते हैं. एक ऐसा फेस्टिवल भी है, जिसमें लोग जमकर मिट्टी की कीचड़ में खेलते हैं. इस त्योहार को “चिखल कालो” के नाम से जाना जाता है. एक फेस्टिवल “साओ-जोआओ” जिसमें लोग तालाबों, झरनों में छलांग लगाकर जश्न मनाते हैं. इसी तरह से गुजरात में सतपुरा मानसून फेस्टिवल होता है, जो न सिर्फ सांस्कृतिक महत्व है बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देता है. तो चलिए जान लेते हैं कि आप इन फेस्टिवल में कैसे शामिल हो सकते हैं.

मानसून में होने वाले इन फेस्टिवल में आप आदिवासी लोक कला, ट्रेडिशनल फूड को एक्सप्लोर कर सकते हैं. वहां की स्थानीय संस्कृति को समझ सकते हैं. यहां पारंपरिक डांस के साथ अनूठी चित्रकला और अलग-अलग तरह के गेम्स तक काफी कुछ होता है, जिसमें आप जमकर एंजॉय कर सकते हैं. चलिए जान लेते हैं जून से लेकर अगस्त के बीच होने वाले इन फेस्टिवल के बारे में.
साओ-जोआओ (गोवा)
गोवा का वाइब्रेंट कल्चर लोगों को खूब पसंद आता है. के दौरान आपको यहां और भी ज्यादा मजा आएगा. अगर गोवा का प्लान कर रहे हैं तो बारिश के दौरान यहां जाएं. ये फैस्टिवल संत जॉन द बैपटिस्ट को समर्पित है, जिसमें लोग तालाबों, झरनों में छलांग लगाते हैं और “विवा साओ जोआओ!” (VIVA SAO JOAO!) के नारों के साथ जमकर सेलिब्रेट करते हैं. ये त्योहार हरियाली, पानी के नेचुरल सोर्स और मानसून की शुरुआत का जश्न है. इस दिन यहां पारंपरिक डोंगी परेड होती है, जिसमें शामिल होना आपके लिए कमाल का एक्सपीरियंस रहेगा. खासकर नए पेरेंट्स और नए पति-पत्नी के लिए ये फेस्टिवल बहुत खास माना जाता है. ये हर साल 24 जून को सेलिब्रेट किया जाता है.
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चिखल कालो (गोवा)
गोवा के ही मार्सेल गांव में मानसून के दौरान बेहद अनोखा त्योहार सेलिब्रेट किया जाता है, जिसमें लोग कीचड़ में खेलते हैं. इस त्योहार को चिखल कालो के नाम से जानते हैं, जिसका कोंकणी भाषा में मतलब होता है ‘कीचड़ में खेलना’. तकरीबन चार सदियों से ये परंपरा चली आ रही है, जिसमें बड़े से बच्चे तक पूरे शरीर पर तेल लगाने के बाद मिट्टी की कीचड़ में खेलते हैं. दरअसल ये त्योहार भगवान कृष्ण की बचपन की लीलाओं को याद करने के लिए मनाया जाता है, जिसमें न सिर्फ लोकल लोग बल्कि पर्यटक भी शामिल होते हैं. इस तरह से ये महज धार्मिक नहीं बल्कि एक कल्चरल फेस्टिवल बन जाता है. ये त्योहार 28th से 30th जून को गोवा के मार्सेल गांव में देवकी कृष्णा टेम्पल में आयोजित होगा.
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ड्री फेस्टिवल (अरुणाचल प्रदेश)
आप मानसून में ड्री फेस्टिवल में शामिल हो सकते हैं जो अरुणाचल प्रदेश की अपतानी जनजाति का सबसे बड़ा कृषि महोत्सव होता है. खूबसूरत वादियों के बीच इस त्योहार को सेलिब्रेट करना आपके लिए लाइफटाइम यादगार रहेगा. इस फेस्टिवल को 5 जुलाई को सेलिब्रेट करते हैं जो तीन दिन तक चलता है. इसमें पारंपरिक नृत्य से लेकर प्रार्थना करना, सामुदायिक भोज, देवताओं की पूजा और तीरंदाजी, कुश्ती जैसे कई पारंपरिक खेल भी होते हैं. इसमें बच्चों से लेकर कलाकाकर पारंपरिक परिधान पहने भी नजर आते हैं.
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सतपुरा मानसून फेस्टिवल (गुजरात)
मानसून के दौरान गुजरात के हिल स्टेशन सापूतारा में सतपुरा मानसून फेस्टिवल (सपूतारा मानसून महोत्सव या मेघ मल्हार) पर्व सेलिब्रेट करते हैं. ये हर साल बरसात के मौसम में होने वाला कल्चरल और टूरिज्म फेस्टिवल है. जो जुलाई से अगस्त या कभी-कभी सितंबर में भी सेलिब्रेट करते हैं. इसमें अलग-अलग राज्यों के कोई लोक कलाकार शामिल होते हैं जो डांस, शास्त्री संगीत प्रस्तुत करते हैं तो वहीं आदिवासी नृत्य भी देखने को मिलता है. इसके अलावा एडवेंचर एक्टिविटी जैसे बारिश में ट्रैकिंग, बोटिंग, जिप लाइनिंग, साइकलिंग, पैरासेलिंग भी होती हैं. यहां हस्तशिल्प, दांग की आदिवासी कला (वार्ली पेटिंग) जैसी एक्टिविटी में भी शामिल हो सकते हैं.





