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Iran Attack on Kuwait: ईरान ने अमेरिकी एयरबेस Ali al Salem पर दागीं मिलाइलें, मची तबाही

मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा। हर गुजरते दिन के साथ हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं। अब खबर है कि ईरान ने कुवैत स्थित अली अल सलीम एयरबेस को निशाना बनाते हुए बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस घटना ने पूरे खाली क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है और आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा और फैल सकता है। जानकारी के मुताबिक हमले से कुछ समय पहले ईरान के खोजे स्तान प्रांत के आसमान में बैलस्टिक मिसाइलों की लकीरें देखी गई। इसके बाद कुवैत में मौजूद अली अल सलीम एयरबेस की ओर मिसाइलें बढ़ने की खबर सामने आई। शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया कि एयरबेस पर तैनात पेट्रियर्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने कम से कम एक मिसाइल को हवा में ही रोक लिया। हालांकि हमले से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित है। इस घटनाक्रम के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआईजीसी ने कड़ा संदेश दिया। आईआईजीसी का कहना है कि यदि ईरान पर किसी भी प्रकार का हमला किया गया तो उसका जवाब निर्णायक और पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगा। यह बयान ऐसे समय में आया जब पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। दरअसल पिछले कई महीनों से मिडिल ईस्ट लगातार तनाव और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। 

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ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। खाली देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी भी इस संघर्ष को और ज्यादा संवेदनशील बना रही है। ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा रहा है। जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि उनकी सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत स्थित एयरबेस पर हुआ यह हमला केवल एक सैन्य कारवाई नहीं बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। ईरान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसके हितों या उसकी सुरक्षा को चुनौती दी गई तो वह सीधे-सीधे जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। इस पूरे संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। तेल उत्पादन और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं। 

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तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और कई देशों को आशंका है कि अगर हालात और ज्यादा बिगड़े तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका पूरा और बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है। सवाल यही है कि क्या यह है हमला? सिर्फ एक चेतावनी है या फिर क्षेत्र में किसी बड़े संघर्ष की शुरुआत। आने वाले दिनों में अमेरिका, कुवैत और अन्य खाली देशों की प्रतिक्रिया यह करेगी तय कि यह तनाव बातचीत की मेज पर पहुंचेगा या फिर जंग का दायरा और ज्यादा बढ़ेगा। बड़ी खबर आ रही है कि ईरान ने इसराइल के खिलाफ ऐलान जंग कर दिया है। ईरान की सबसे ताकतवर और एलट फोर्स पासदाराने इस्लाम यानी आईआरजीसी ने इसराइल को दुनिया के नक्शे से मिटाने की कसम खा ली है। जी हां, मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि गजा में इसराइल की आक्रामकता और सीज फायर के बावजूद जारी हमलों के बाद इस्लामिक रेवोलशरी गार्ड कॉप्स ने साफ कह दिया है कि सारी दिक्कतों की जड़ इसराइल है। इसलिए अब इससे ही निपटना होगा। ईरान की आईआरजीसी ने ट्रंप के सारे शांति प्रस्ताव चाहे वो गजा के लिए हो या ईरान के लिए उन्हें सिर्फ कत्लेआम, मर्डर और आतंक का एजेंडा करार दिया है। 
आईआरजीसी ने ख्ते में अमन लाने के ट्रंप के सारे प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। गजा में हमास कमांडरों पर अटैक को ईरान ने पूरे इस्लामिक रेजिस्टेंस पर हमला माना है। दरअसल हमाज़ भी ईरान के एक्सेस ऑफ रेजिस्टेंस का हिस्सा है और फिलिस्तीन की आजादी ईरान की फॉरेन पॉलिसी का हिस्सा है। जिसको लेकर वो इसराइल को अपना नंबर वन दुश्मन मानता है और इसराइल भी यही चाहता है कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की रिजीम का वजूद किसी भी तरह से खत्म कर दिया जाए। ईरान का मानना है कि अमेरिका और इसराइल मिलकर इस इलाके में शांति के नाम पर सिर्फ बेगुनाहों का खून बहा रहे हैं। इसराइल तो गजा से लेकर लेबनान तक सीज फायर की खुली धज्जियां उड़ाता है और जब मर्जी चाहे तब हमले अंजाम देता है। ईरान के मुताबिक इसराइल को अपनी तकनीक और अमेरिका के साथ पर बड़ा घमंड है। अब उसी इसराइल को धरती से मिटाने का वक्त आ गया है। अमेरिका और इसराइल बस शांति के नाम पर ख्ते में अपनी मनमर्जी थोपने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने साफ किया कि वह पश्चिमी देशों के ऐसे किसी भी शांति प्रस्ताव के झांसे में आने वाला नहीं है और अब इसराइल को सबक सिखाकर ही दम लेगा। ईरान के रेवोलशनरी गार्ड्स ने अपने बयान में इसराइल और अमेरिका को चुनौती देते हुए कहा है कि हमास के टॉप कमांडरों को मार देने से फिलिस्तीनी रेजिस्टेंस कमजोर पड़ने वाला नहीं है। 

Khabar Monkey

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