बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) को बड़ा झटका दिया है. सेबी ने अपने ही एक पुराने आदेश को पलटते हुए सुजलॉन तथा उसके कई पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कुल 28.95 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है. यह मामला खातों में भ्रामक जानकारी देने तथा कंपनी के भीतर ही पैसों को गोल-गोल घुमाने से जुड़ा है. जून 2025 में कंपनी को इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी, लेकिन अब सेबी ने इसे शेयर बाजार के हितों के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया है. सुजलॉन के शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि कैसे कागजी बाजीगरी के जरिए कंपनियों की वित्तीय स्थिति को बेहतर दिखाया है.

जुर्माने की चाबुक किस पर कितनी चली?
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य संदीप प्रधान द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड पर सीधे तौर पर 15.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा प्रबंधन से जुड़े रहे पूर्व वाइस-चेयरमैन विनोद आर तांती को 5.75 करोड़ रुपये, गिरीश आर तांती को 5.45 करोड़ रुपये, पूर्व सीएफओ कीर्ति जे वगाडिया को 1.5 करोड़ रुपये, जबकि अमित अग्रवाल को 30 लाख रुपये की पेनाल्टी चुकानी होगी. नियामक ने सभी दोषियों को जुर्माने की यह रकम जमा करने के लिए 45 दिन का अल्टीमेटम दिया है. दरअसल, यह पूरी कार्रवाई दिसंबर 2019 में मिली एक गुमनाम शिकायत के बाद शुरू हुई थी. शिकायत मिलने पर सेबी ने वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-21 तक के वित्तीय दस्तावेजों की गहराई से जांच करने के लिए एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया था.
कागजों पर कैसे दिखाया गया बंपर मुनाफा?
सेबी की विस्तृत जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. पूरे विवाद की जड़ साल 2014 का एक सौदा है. सुजलॉन ने अपना ऑपरेशंस-मेंटेनेंस बिजनेस (OMS) अपनी ही एक अनुषंगी (सब्सिडियरी) कंपनी सुजलॉन ग्लोबल सर्विसेज लिमिटेड (SGSL) को 2,000 करोड़ रुपये में बेच दिया. हैरत की बात यह है कि इस बिजनेस की असल नेट बुक वैल्यू महज 77 करोड़ रुपये थी. इस ट्रांसफर के जरिए कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में 1,923 करोड़ रुपये का तगड़ा मुनाफा दर्ज कर लिया. सेबी का आरोप है कि इस सौदे के 1,300 करोड़ रुपये कंपनी में बाहर से नहीं आए, बल्कि यह रकम सुजलॉन तथा एसजीएसएल के बीच लोन और डिबेंचर के रूप में घुमाई गई. सेबी के अनुसार, मार्च 2017 में 150 करोड़ रुपये को छह बार, फिर 100 करोड़ रुपये को चार बार रोटेट करके कागजों पर पेमेंट दिखाया गया.
एक ही संपत्ति से डबल मुनाफे का खेल
वित्तीय बाजीगरी का यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ. इसके बाद एसजीएसएल के शेयरों को सुजलॉन की ही एक अन्य कंपनी ‘सुजलॉन स्ट्रक्चर्स लिमिटेड’ में ट्रांसफर कर दिया गया. इस इंटरनल सौदे से 829.78 करोड़ रुपये का एक और मुनाफा दिखा दिया गया. सेबी के पुराने आदेश में इन ट्रांजेक्शन को सही मान लिया गया था. लेकिन नए आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि एक ही संपत्ति को समूह के भीतर घुमाकर दो स्तरों पर भारी मुनाफा दिखाना गंभीर चिंता का विषय है. जांच में विदेशी सब्सिडियरी एई रोटर होल्डिंग बीवी की देनदारियों, एसई फोर्ज लिमिटेड के इंपेयरमेंट रिवर्सल, साथ ही सुजलॉन गुजरात विंड पार्क लिमिटेड में फंड के संदिग्ध मूवमेंट जैसे कई अन्य वित्तीय मामलों को भी पकड़ा गया है.
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नियम-कानूनों की आड़ में निवेशकों को गुमराह करना गलत
जून 2025 में नियुक्त अधिकारी ने यह कहकर क्लीन चिट दी थी कि इन सभी ट्रांजेक्शन के लिए स्वतंत्र वैल्यूएशन, बोर्ड की मंजूरी तथा शेयरधारकों की सहमति जैसी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं. लेकिन सेबी अधिकारी संदीप प्रधान ने साफ किया कि सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी कर लेने से कोई भी कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती. अगर आपके वित्तीय नतीजे निवेशकों के सामने एक भ्रामक तस्वीर पेश करते हैं, तो यह बाजार के भरोसे को तोड़ता है. हालांकि, सुजलॉन ने लगातार इन सभी आरोपों का खंडन किया है. कंपनी की दलील है कि यह सारा पुनर्गठन भारी वित्तीय दबाव के दौर में किया गया था, जिसका उनके कंसोलिडेटेड खातों पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा.
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.





