पंजाब में विधानसभा चुनाव में से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को निकाय चुनावों में बड़ी सफलता मिली है।AAP ने 48 प्रतिशत से अधिक वार्डों में जीत दर्ज की, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जनता ने सत्ताधारी पार्टी की विकासवादी नीतियों का समर्थन किया और विपक्ष की ‘नफरत की राजनीति’ को परास्त किया। पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ‘आप’ ने कुल 1,977 वार्डों में से 958 में जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस 397 वार्ड जीतकर दूसरे स्थान पर रही, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने 191 वार्ड जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 172 वार्डों में जीत का परचम फहराया। इन शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 251 वार्डों में जीत दर्ज की।

क्या कहता है इतिहास
इन निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सेमी फाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि इतिहास पर गौर करें तो निकाय चुनाव में जीतने वाली पार्टी के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी नहीं है। 2015 में हुए निकाय चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी ने मिलकर 1420 वॉर्ड्स में कब्जा कर लिया था। वहीं कांग्रेस के खाते में केवल 356 सीटें गई थीं। एक साल बाद ही कांग्रेस 117 में से 77 सीटें जीतकर पंजाब की सत्ता में आ गई और बीजेपी-शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन 18 सीटों पर ही सिमटकर रह गया।
ऐसा ही कुछ 2021 में भी हुआ था। नगर निकाय के चुनाव में कांग्रेस ने 1516 सीटों पर कब्जा किया। एक महीने बाद ही विधानसभा चुनाव हुए और आम आदमी पार्टी 92 सीटें जीतकर जबरदस्त बहुमत के साथ सत्ता में आ गई और कांग्रेस हाथ मलती रह गई।
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बीएसपी ने भी जीती हैं सात सीटें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी सात वार्ड में जीत हासिल की। ॉ अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ‘आप’ जीत पर मुख्यमंत्री मान ने कहा कि जनता ने ‘आप’ सरकार के विकास कार्यों पर अपनी मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ने विपक्ष की नफरत की राजनीति को हरा दिया।
मान ने कहा, “जनता ने विभाजनकारी राजनीति करने वाली पार्टियों को नकार दिया है।” इससे पहले, विपक्षी दलों ने ‘आप’ सरकार पर चुनावों के दौरान सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। इन निकाय चुनावों को सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य में अपनी सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद कर रही है।





