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गुलजार साहब का वो गीत, जो आज के सोशल मीडिया के दौर पर भी बिल्कुल फिट बैठता है

पुराने गानों की सबसे अच्छी बात यही है कि वे समय और उम्र के साथ पहले से ज्यादा गहरे और अपनी जिंदगी से जुड़े हुए लगने लगते है। ‘नाम गुम जाएगा’ भी एक ऐसा ही कल्ट क्लासिक गीत है, जो हर सुनने वाले को इस भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ देर रुककर सोचने पर मजबूर कर देता है। कुछ गानें सिर्फ अपने दौर के लिए नहीं बल्कि हर दौर को ध्यान में रखकर बनाए जाते। का यह गाना भी उन्हीं में से एक है जो आपको आज भी उतना ही रिलेटेबल लगेगा जितना कि शायद उस दौर में रहा हो।

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गुलजार साहब का वो गीत, जो आज के सोशल मीडिया के दौर पर भी बिल्कुल फिट बैठता है
गुलजार साहब का वो गीत, जो आज के सोशल मीडिया के दौर पर भी बिल्कुल फिट बैठता है

सोशल मीडिया के जमाने में जहां लोग आज अचानक मिलने वाले फेम को कामयाबी मान लेते है। वहीं, गुलजार साहब ने साल 1977 में फिल्म ‘किनारा’ में इस गीत के जरिए बताया कि आपकी अच्छाई और अच्छे व्यक्तित्व के अलावा आपके साथ कुछ नहीं जाएगा। इंसान का नाम, काम और यहां तक कि उसका चेहरा भी समय के साथ फीका पड़ जाता है, मिट जाता है, लेकिन अगर कुछ साथ रहता है या याद रहता है तो वो है उसकी कला। वैसे तो वह कला कुछ भी हो सकती है लेकिन इस गाने में खासतौर पर आवाज, गायन की बात हुई है।

लता मंगेशकर के जीवन से प्रेरित

1977 में बनी रोमांटिक फिल्म ‘किनारा’ का निर्देशन और लेखन गुलजार साहब ने किया था और इस गाने को भी बोल देने वाले गुलजार ही थे। इस गाने को ने अपनी शानदार आवाज दी जबकि इसका संगीत आर डी बर्मन ने तैयार किया था। कमाल की बात है कि आज भी जब यह गीत सुना जाता है तो बेशक लोग लता जी को याद करते है क्योंकि यह गाना पूरी तरह से उन्हीं की जिंदगी से प्रेरित लगता है। जैसे कि इसके बोल कहते है- ‘मेरी आवाज ही मेरी पहचान है।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि लता जी की पहचान ही उनकी आवाज है जो अब बॉलीवुड के इतिहास में हमेशा के लिए बंद हो चुकी है।

जब गुलजार ने नाम और चेहरे से आगे की सच्चाई लिख दी

इस गाने के शुरुआती बोल की बात करते है जो कहते है, ‘नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा’, यानी कि समय के साथ हर बड़ा नाम और खूबसूरत चेहरा सिर्फ एक अस्थाई चीज बनकर रह जाता है। ये सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि जिंदगी की हकीकत है। इसके सबसे बेहतरीन उदाहरण खुद बॉलीवुड के कई नाम है। खूबसूरत एक्ट्रेस सायरा बानो, बबीता, हेमा मालिनी, मुमताज, इन सभी का खूबसूरत चेहरा भले ही समय के साथ ढल गया हो लेकिन इनके काम और इनकी फिल्मों को उनके अभिनय से आज भी याद रखा जाता है। इस गाने में यही सच्चाई बताई गई कि लाइफ नाम और चेहरे से बहुत ज्यादा आगे है।

कम शब्दों में गहरी फिलॉसफी लिखने की गुलज़ार की ताकत

गुलजार साहब की सबसे खास बात ये है कि वह मुश्किल बातों को भी काफी सरल तरीके से अपने गीतों में उतार देते है। ये सिर्फ उनके इस गाने पर नहीं बल्कि हर गाने पर लागू होता है। मुश्किल बातों को आसान तरीके से कह देना ये उनकी कला रही है। जैसे ‘वक्त के सितम कम हसीं नहीं, आज है यहां कल कहीं नहीं ‘, इस लाइन को ही सुन लीजिए। सुनने में आसान लगेगी लेकिन लाइफ का एक बड़ा सच इस लाइन में है। गुलजार साहब हमेशा से इस तरह के लेखन के लिए तारीफें बटोरते आए है। उन्होंने अपने गानों में हमेशा समाज और जिंदगी के एक अलग नजरिए को जगह दी है। यही वजह है कि उन्हें ढेरों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले है।

उस दौर में भी यह गाना फेम की सच्चाई बता गया

जब 1977 में यह गाना आया था तो 70 के दशक में बॉलीवुड में स्टारडम का दौर बहुत तेज था। हर कोई पहचान और लोकप्रियता के पीछे भागने के रेस में लगा था। उस समय में गुलजार ने ऐसा गीत लिखा, जो ये बता गया कि असली शोहरत वो है जो आप अपने पीछे छोड़ते चलते है यानी कि आपका काम, आपका व्यवहार और आपकी आवाज। दो दिन की मिली शोहरत को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, इस गाने ने यह सच्चाई बताई क्योंकि नाम का क्या है वो तो समय के साथ गुम हो जाएगा।

सोशल मीडिया दौर में यह गाना ज्यादा रिलेटेबल

‘किनारा’ फिल्म का यह गाना बॉलीवुड के क्लासिक गानों में से एक है। आज के इंटरनेट वाली दुनिया में जहां लोग फॉलोअर्स, लाइक्स और जल्दी मिलने वाली शोहरत के पीछे भागने में लगे है। इस समय में ये गाना हमें याद दिलाता है कि इस अस्थाई शोहरत से ज्यादा मायने रखता है आपके काम का असर और आपकी इंसानियत। यही वजह है कि ये गाना आज की जेनरेशन को भी उतना ही कनेक्ट करता है। ये याद दिलाए रखता है कि काम से ज्यादा उसके असर पर ध्यान देना चाहिए।

क्यों यह गाना सिर्फ पुराना नहीं, सदाबहार बन गया

वैसे तो गुलजार साहब के गाने हर जेनरेशन में रिलेटेबल होते है। उस दौर की फिल्मों के अलावा आज के समय की भी काफी फिल्मों के लिए गुलजार साहब ने गाने लिखे है। लेकिन नाम गुम जाएगा पुराना होने के साथ-साथ सदाबहार भी बन गया क्योंकि ये हर दौर में नया सा महसूस होता है। ये किसी ट्रेंड को फॉलो करने पर नहीं बना था बल्कि जिंदगी और समय की सच्चाई पर लिखा गया था। यही इसकी बड़ी ताकत है जो इसे हर दौर में रिलेटेबल बनाती है।

फिल्म ‘किनारा’ में एक्ट्रेस हेमा मालिनी और जितेंद्र लीड रोल में दिखाई दिए थे। लता जी और भूपेंद्र सिंह ने इस गाने को गाया था। यह एक लव ट्राएंगल फिल्म थी जिसमें धर्मेंद्र कैमियो रोल में नजर आए थे। दिलचस्प बात ये है कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं किया था। ये फिल्म कोई बड़ी हिट नहीं थी लेकिन फिल्म का ये गाना ‘नाम गुम जाएगा’ समय के साथ एक कल्ट क्लासिक गाना बन गया। जैसे गाने का मतलब भी था कि आपका काम याद रहेगा, नाम नहीं। ऐसा इस गाने के साथ भी हुआ।

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