Iran और United States के बीच जारी तनाव के बीच एक नया और बड़ा अपडेट सामने आया है. दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच अंतरिम परमाणु समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है. जिसमें अमेरिका ईरान के अंदर 28 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा और इस पूरे समझौते में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका होगी.

28 लाख करोड़ का निवेश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर परमाणु समझौता सफल होता है तो अमेरिका की ओर से ईरान में करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा सकता है. यह निवेश तेल, गैस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में होने की संभावना है.
बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव पहले भी ओमान में हुई बातचीत के दौरान सामने आया था. ईरान चाहता है कि विदेशी निवेश के जरिए उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और लंबे समय से लगे प्रतिबंधों का असर कम हो.
पाकिस्तान को बनाया जा सकता है गारंटर
सऊदी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित अंतरिम समझौते में पाकिस्तान को गारंटर देश के तौर पर शामिल करने की चर्चा है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच भरोसे का पुल बनाने की भूमिका निभा सकता है.
हालांकि इस मामले पर अभी तक न तो ईरान और न ही पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है. लेकिन मेहर न्यूज एजेंसी ने पाकिस्तान के सूत्रों के हवाले से कहा है कि डील काफी आगे बढ़ चुकी है.
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होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमति
समझौते के तहत ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल सकता है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है. यहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चे तेल की सप्लाई होती है. डील के अनुसार, इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई अतिरिक्त रोक या टोल नहीं लगाया जाएगा. इसके बदले ईरान को उसके जब्त किए गए फंड वापस मिल सकते हैं, जो फिलहाल Qatar में रखे बताए जा रहे हैं.
परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है. हालांकि उसके पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता सफल होता है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल बाजार को भी बड़ी राहत मिलेगी. वहीं पाकिस्तान की संभावित भूमिका ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा अहम बना दिया है.





