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“लोहिया भी पत्रकार थे” ब्रजेश पाठक के पॉडकास्ट पर भड़के अखिलेश तो DyCM ने दिलाई याद, PDA बनाम BJP की जंग तेज

यूपी की सियासत में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की पत्रकारिता चर्चा में है. दरअसल, पिछले एक-दो हफ्ते में ब्रजेश पाठक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर तीन नेताओं के साथ अपनी बातचीत का वीडियो पोस्ट किया. वॉक एंड टॉक और पॉडकास्ट जैसी पत्रकारिता शैली में इंटरव्यू किये और उसे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट भी किया. डिप्टी सीएम के इस पत्रकारिता वाली भूमिका शायद अखिलेश यादव को चुभ रही है.

“लोहिया भी पत्रकार थे” ब्रजेश पाठक के पॉडकास्ट पर भड़के अखिलेश तो DyCM ने दिलाई याद, PDA बनाम BJP की जंग तेज
“लोहिया भी पत्रकार थे” ब्रजेश पाठक के पॉडकास्ट पर भड़के अखिलेश तो DyCM ने दिलाई याद, PDA बनाम BJP की जंग तेज

इसकी बड़ी वजह है कि पाठक के पीडीए पर हमला बोल रहे हैं. डिप्टी सीएम और मंत्री नरेंद्र कश्यप के इंटरव्यू की तो खूब चर्चा भी हो रही है. क्या है इस इंटरव्यू में और इससे अखिलेश यादव को क्यों दिक्कत हो रही है, आइए पहले यह समझे.

डिप्टी सीएम का मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ पॉडकास्ट

कल यानी गुरुवार को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने ही सरकार में पिछड़ा कल्याण विभाग के मंत्री और ओबीसी नेता नरेंद्र कश्यप के साथ अपने ही आवास पर पॉडकास्ट स्टाइल में इंटरव्यू किया. इस इंटरव्यू में पाठक ने अखिलेश यादव के पिछड़ा प्रेम पर हमला किया. मंत्री नरेंद्र कश्यप ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव का पीडीए केवल एक जाति और उसमें उनके परिवार तक सीमित है. पाठक के एक सवाल के जवाब में नरेंद्र कश्यप ने कहा कि अखिलेश यादव ढकोसला करते हैं. उनके लिए पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और दलितों के कल्याण का मामला केवल वोट बैंक तक सीमित है. उनकी पार्टी केवल एक जाति विशेष के लिए काम करती है, उसमें भी वह अपने परिवार का भला करने का पहले सोचते हैं.

अखिलेश यादव शायद इसी वजह से चिढ़ गए और इस पोस्ट पर तंज कसते हुए लिखा, ‘जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गये बेकार, अब वो बन गये पत्रकार क्योंकि समय बिताने के लिए करना है कुछ काम; सरकार, संगठन, दल में तो पहले ही हुए नाकाम. प्रदेश की जनता बिन-बिजली गर्मी-बीमारी में तड़प रही है और भाजपाई मंत्री इंटरव्यू-इंटरव्यू खेलकर गर्मी की छुट्टियां मना रहे हैं.फिर डपट पड़ेगी डिप्टी को! बेहद बचकाना!

पाठक बोले-पत्रकारों का अपमान ना करें अखिलेश

अखिलेश यादव के तंज का जवाब देते हुए ब्रजेश पाठक ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट किया और लिखा,” पत्रकार होना गर्व की बात है. मैं तो लघु व्यक्ति और साधारण सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता हूं, लेकिन हमारा गौरवशाली इतिहास साक्षी है कि जितने महान जननेता हुए हैं, लगभग सभी पत्रकार रहे हैं. पंडित दीनदयाल मासिक पत्रिका राष्ट्रधर्म निकालते थे. लोहियाजी हिंदी मासिक पत्रिका जन और अंग्रेजी मासिक पत्रिका मैनकाइंड के संपादक थे. संवाद और साक्षात्कार करना हमारी सनातन परंपरा है, वादे वादे जायते तत्वबोध. लोकनायक जयप्रकाशने कहा था कि तानाशाह ही संवाद के विरोधी होते हैं.

उन्होंने आगे लिखा, हमारे पत्रकार भाई और बहन हमारे समाज के कर्मयोगी हैं. उन्हें खलिहर बताना सभी पत्रकारों और मेहनतकशों का अपमान है. एक सार्थक साक्षात्कार में कितनी मेधा और मेहनत लगती है, ये हमारे पत्रकार साथियों से पूछिए, जो युवराज होंगे, उन्हें मेहनतकश बुरे लगेंगे. जो झूठ के सौदागर होंगे, उन्हें संवाद बुरा लगेगा. समझ से परे है कि कुछ लोग संवाद और सच्चाई से इतना डरते क्यों हैं?

उन्होंने लिखा एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में यथासंभव लोकस्वास्थ्य को बेहतर कर रहा हूं और एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में संवाद चलाकर अपने लोककर्त्तव्य को निभा रहा हूं. उन्हें मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं….”

केशव मौर्या के साथ पाठक का वॉक एंड टॉक

दरअसल, ब्रजेश पाठक ने इससे पहले भी दो नेताओं के साथ बातचीत की थी. उसका वीडियो शेयर किया था. 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा के दिन कुशीनगर मे दोनों उप-मुख्यमंत्री ने एक कैजुअल वीडियो शेयर किया, जिसमें दोनों पार्क में साथ टहलते हुए भगवान बुद्ध के जीवन, शांति और विकास कार्यों पर चर्चा की. इसे पत्रकारिता की भाषा मे वॉक एंड टॉक भी कहा जाता है. इस पोस्ट पर भी अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कैप्शन दिया: “दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती.” इसके बाद पाठक ने अपने आवास पर केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल से भी बातचीत की थी और उस वीडियो को भी शेयर किया था.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्रजेश पाठक ओबीसी और पिछड़े वर्गों के बीच भाजपा की पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. मंत्री नरेंद्र कश्यप, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल और डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य जैसे ओबीसी चेहरों के साथ संवाद के जरिए वे अखिलेश के ‘पिछड़े प्रेम’ को चुनौती दे रहे हैं. वहीं, अखिलेश यादव इसे अपनी छवि पर हमला मान रहे हैं. पाठक का यह नया अंदाज भाजपा के सोशल मीडिया प्रचार को नई ऊर्जा दे रहा है, जबकि सपा इसे “सरकार की नाकामी छिपाने की कोशिश” बता रही है. चाहे पत्रकारिता हो या राजनीति, संवाद की इस बहस ने यूपी की सियासत को फिर से गरमा दिया है. अब देखना यह है कि यह “मिर्ची” वाली बहस आगे किस दिशा में जाती है?

khabarmonkey@gmail.com

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