
Sitapur : किसी के आशियाने पर अवैध रूप से जेसीबी चलाकर उसे जमींदोज करने वालों के खिलाफ अदालत ने बेहद सख्त और कड़ा संदेश दिया है। पिसावां थाना क्षेत्र में 13 साल पहले एक मकान को ढहाने के मामले में अपीलीय अदालत ने दोषियों की अपील को सिरे से खारिज करते हुए निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा है। जिला जज के इस फैसले के बाद मकान पर बुल्डोजर गर्जना कराने वाले चारों दबंगों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला साल 2013 का है। पिसावां ग्राम निवासी राम नरेश सिंह ने 11 जून 2013 की दोपहर करीब 3 बजे थाने में एक तहरीर दी थी। आरोप था कि पिसावां चौराहा निवासी नत्थू, उसके दो बेटों सुनील कुमार और सुधीर कुमार, तथा सेजकला निवासी रविंद्र ने मिलकर उनके प्लॉट पर बने मकान को जेसीबी से जबरन तोड़ना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। इस मामले में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपराध संख्या 131/2013 के तहत आईपीसी की धारा 427 और 506 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। लंबी तफ्तीश के बाद 28 जून 2018 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
निचली अदालत ने सुनाई थी दो साल की सजा
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पिछले साल 15 अक्टूबर 2025 को सिविल जज सीनियर डिवीजन (कोर्ट संख्या दो) विजय भान की अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने चारों अभियुक्तों—नत्थू, सुनील कुमार, सुधीर कुमार और रविंद्र को आईपीसी की धारा 427 (मकान को नुकसान पहुंचाने) के तहत दोषी पाते हुए दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही चारों पर पांच-पांच सौ रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था, जिसे न चुकाने पर सात दिन के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान था। हालांकि, कोर्ट ने धारा 506 (जान से मारने की धमकी) के आरोप में संदेह का लाभ देते हुए इन्हें बरी कर दिया था।
जिला जज ने खारिज की अपील, भेजे गए जेल
निचली अदालत के इस कड़े फैसले के खिलाफ चारों दोषियों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर कर राहत की गुहार लगाई थी। लेकिन जनपद न्यायाधीश आशीष जैन ने मामले की गंभीरता और सबूतों को देखते हुए दोषियों की अपील को पूरी तरह निरस्त कर दिया। जिला जज ने सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय भान के पुराने दंडादेश को हुबहू पुष्ट रखा। अपीलीय अदालत से मुहर लगते ही सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट संख्या 2 के आदेश पर पुलिस ने अवैध रूप से मकान पर जेसीबी चलाने वाले इन सभी दोषियों को तुरंत कस्टडी में ले लिया और जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। कानूनी हलकों में इस फैसले को दूसरों के आशियाने पर नजर डालने वाले अपराधियों के खिलाफ एक नजीर माना जा जा रहा है।





